Total Pageviews
विषय सूची
- 1. भाषा : आधारभूत (Language: Fundamentals)
- 2. सामान्य भाषाविज्ञान (General Linguistics)
- 3. ध्वनि/स्वनविज्ञान एवं स्वनिमविज्ञान (Phonetics&Phonology)
- 4. रूपविज्ञान (Morphology)
- 5. वाक्यविज्ञान (Syntax)
- 6. अर्थविज्ञान (Semantics)
- 7. प्रोक्ति-विश्लेषण और प्रकरणार्थविज्ञान (Discourse Analysis & Pragmatics)
- 8. भारतीय भाषा चिंतन (Indian Language Thought)
- 9. पश्चिमी भाषा चिंतन (Western Language Thought)
- 10. व्याकरण सिद्धांत (Grammar Theories)
- 11. ऐतिहासिक/ तुलनात्मक भाषाविज्ञान (His.&Com. Lig.)
- 12. लिपिविज्ञान (Graphology)
- 13. व्यतिरेकी भाषाविज्ञान (Contrastive Ligs)
- 14. अंतरानुशासनिक भाषाविज्ञान (Interdisciplinary Ligs)
- 15. समाजभाषाविज्ञान (Sociolinguistics)
- 16. मनोभाषाविज्ञान (Psycholinguistics)
- 17. संज्ञानात्मक भाषाविज्ञान (Cognitive Linguistics)
- 18. न्यूरोभाषाविज्ञान (Neurolinguistics)
- 19. शैलीविज्ञान (Stylistics)
- 20. अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान (A.L.)
- 21. अनुवाद (Translation)
- 22. भाषा शिक्षण (Language Teaching)
- 23. कोशविज्ञान (Lexicology)
- 24. भाषा सर्वेक्षण (Language Survey)
- 25. भाषा नियोजन (Lg Planning)
- 26. क्षेत्र भाषाविज्ञान (Field Ligs)
- 27. मीडिया/ सिनेमा और भाषा (Media/Cinema & Language)
- 28. UGC-NET भाषाविज्ञान
- 29. गतिविधियाँ/नौकरी (Activities/Job)
- 30. SCONLI-12 (2018)
- 31. भाषाविज्ञान : शोध (Linguistics : Research)
- 32. EPG भाषाविज्ञान
- 33. विमर्श (Discussion)
- 34. लिंक सूची (Link List)
- 35. अन्य (Others)
Monday, January 26, 2026
कविता 1 (200)
प्रोफेसर, केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा
Professor, Kendriya Hindi Sansthan, Agra
(Managing Director : Ms. Ragini Kumari)
बुद्धि : उत्तम साथी (कविता -2)
प्रोफेसर, केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा
Professor, Kendriya Hindi Sansthan, Agra
(Managing Director : Ms. Ragini Kumari)
साथी हाथ बढ़ाना: साहिर लुधियानवी
साथी हाथ बढ़ाना, साथी हाथ बढ़ाना
एक अकेला थक जाएगा मिल कर बोझ उठाना
साथी हाथ बढ़ाना
हम मेहनतवालों ने, जब भी मिलकर कदम बढ़ाया
सागर ने रस्ता छोड़ा, पर्वत ने शीश झुकाया
फौलादी हैं सीने अपने, फौलादी हैं बाँहें
हम चाहें तो चट्टानों में, पैदा कर दें राहें
साथी हाथ बढ़ाना
मेहनत अपनी लेख की रेखा मेहनत से क्या डरना
कल ग़ैरों की ख़ातिर की अब अपनी ख़ातिर करना
अपना दुख भी एक है साथी अपना सुख भी एक
अपनी मंज़िल सच की मंज़िल अपना रस्ता नेक,
साथी हाथ बढ़ाना
एक से एक मिले तो कतरा बन जाता है दरिया
एक से एक मिले तो ज़र्रा बन जाता है सेहरा
एक से एक मिले तो राई बन सकता है पर्वत
एक से एक मिले तो इन्सान बस में कर ले क़िस्मत,
साथी हाथ बढ़ाना
प्रोफेसर, केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा
Professor, Kendriya Hindi Sansthan, Agra
(Managing Director : Ms. Ragini Kumari)
Thursday, January 22, 2026
संसक्ति (Cohesion)
संसक्ति (Cohesion) से आशय उन भाषिक साधनों से है जिनके द्वारा वाक्य और उपवाक्य आपस में जुड़कर एक संबद्ध और अर्थपूर्ण पाठ का निर्माण करते हैं। इनमें संदर्भ (जैसे—वह, यह), प्रतिस्थापन, लोप (ellipsis), संयोजक (और, लेकिन, इसलिए) तथा शब्दों की पुनरावृत्ति आदि आते हैं। प्रोक्ति विश्लेषण और शैलीविज्ञान दृष्टि से देखा जाए तो पाठ में संसक्ति केवल पाठ का औपचारिक गुण नहीं है, बल्कि वह माध्यम है जिसके द्वारा वक्ता या लेखक श्रोता और पाठक को पाठ के भीतर अर्थ-संबंध समझने में मार्गदर्शन करता है। व्यापक रूप से संसक्ति वह शक्ति है जो पाठ को एक इकाई के रूप में बाँधकर रखती है। इसी के कारण सभी वाक्य आपस में जुड़कर एक पाठ का निर्माण करते हैं। यदि संसक्ति से भिन्न किसी वाक्य का पाठ में प्रवेश हो जाए तो पाठक सहज ही बता देगा कि यहाँ भिन्न वाक्य का समावेश हो गया है।
संसक्ति किसी पाठ में संदर्भ और साझा ज्ञान के साथ
घनिष्ठ रूप से जुड़ा पक्ष है। संयोजक संकेत पाठ के विभिन्न भागों के बीच संबंध
स्पष्ट करते हैं, किंतु उनका सही अर्थ परिस्थितिजन्य और सांस्कृतिक
संदर्भ पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए सर्वनाम “वह” का अर्थ तभी स्पष्ट होता है जब वक्ता और
श्रोता के बीच यह साझा ज्ञान हो कि किस व्यक्ति की बात हो रही है। संसक्ति
पारस्परिक समझ और सामान्य पृष्ठभूमि ज्ञान पर आधारित होता है।
प्रोफेसर, केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा
Professor, Kendriya Hindi Sansthan, Agra
(Managing Director : Ms. Ragini Kumari)


