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Wednesday, August 5, 2026

अनुशीलन पत्रिका अनुवाद

 विनम्र निवेदन है कि केंद्रीय अनुवाद ब्यूरो, राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय द्वारा पत्रिका अनुशीलन के आगामी अंक का प्रकाशन किया जाना प्रस्तावित है | इस अंक के लिए निम्नलिखित विषयों पर सरल और सहज हिंदी में उत्कृष्ट लेख आमंत्रित किये जाते हैं | 


1. केन्द्रीय अनुवाद ब्यूरो, एक परिचय I

2. अनुवाद कार्य की चुनौतियाँ और समाधान I

3. वर्तमान में अनुवाद की प्रासंगिकता और महत्व I 

4. अनुवाद का इतिहास I 

5. अनुवाद में सूचना प्रोद्योगिकी का प्रयोग I 

6. अनुवाद में व्यतिरेकी विश्लेषण I

7. विदेशी साहित्य के हिंदी में अनुवाद की समस्याएं I

8. अनुवाद कैसे करें ?

9. अनुवाद में भाषा व्यवहार I 

10. असांविधिक साहित्य का अनुवाद I

11. भाषा सम्प्रेषण में अनुवाद की भूमिका I

12. अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद की चुनौतियां और समाधान I 

13. अनुवाद में पुनरीक्षण का महत्व I 

14. राजभाषा नीति और इसके कार्यान्वयन में अनुवाद की भूमिका I

15. कार्यालयीन हिंदी का बदलता स्वरूप, समस्याएं और समाधान I

16. अनुवाद का सरलीकरण I

17. अनुवाद कार्य में प्रोद्योगिकी टूल्स I

18. क्षेत्रीय भाषाओँ और राजभाषा हिंदी के बीच अनुवाद के संदर्भ में परस्पर समन्वय I

19. सांस्कृतिक सेतु के रूप में अनुवाद की भूमिका I

20. अनुवाद प्रशिक्षण की आवश्यकता एवं महत्व I


 इस अंक में प्रकाशन के लिए लेखों के चयन के संबंध में अंतिम निर्णय केन्द्रीय अनुवाद ब्यूरो का होगा। लेख मंगल फॉन्ट (वर्ड फाइल) में टाइप किए हुए, व्याकरणिक एवं तथ्यात्मक दृष्टि से सही तथा अधिकतम 2000 शब्दों तक हो सकते हैं। शोध से संबंधित लेखों में शब्द सीमा 3000 तक हो सकती है। लेखक अपने नाम, पता, ईमेल एवं संपर्क नंबर सहित इस आशय का एक स्व हस्ताक्षरित प्रमाण पत्र भी अनिवार्य रूप से संलग्न करें कि लेख मौलिक एवं अप्रकाशित है और इसे अन्यत्र प्रकाशनार्थ नहीं भेजा गया है। कृपया लेख (फोटो सहित) दिनांक 10.08.2026 सांय 5.30 बजे तक ई मेल आई डी lekhandrafting123@gmail.com पर भिजवाना सुनिश्चित करें।


सादर

https://ctb.rajbhasha.gov.in/

तुतलाना

 तुतलाने वाले बच्चे की भाषा कैसे सुधारें?

बच्चों की भाषा धीरे-धीरे विकसित होती है। ऐसे में माता-पिता बच्चे पर हमेशा सही बोलने का दबाव बनाने की बजाय धैर्य रखें। भाषा सुधार के लिए कुछ बातों का ध्यान रखें-

  • बच्चे से नियमित बातचीत करें और उसे अपनी बात कहने का मौका दें।
  • बच्चे की बात ध्यान से सुनें, उसकी बात पूरी होने दें।
  • साफ और सरल भाषा में बोलें, ताकि बच्चा सही शब्द और उच्चारण सीख सके।
  • गलत बोलने पर डांटें या बार-बार टोकें नहीं, बल्कि सही शब्द दोहराकर सिखाएं।
  • कहानियां सुनाएं और चित्रों वाली किताबें पढ़ाएं। इससे शब्दावली बढ़ती है।
  • गाने, कविताएं और राइम्स सुनाएं। इससे भाषा और उच्चारण बेहतर होता है।
  • स्क्रीन टाइम सीमित रखें, क्योंकि ज्यादा स्क्रीन देखने से बातचीत के अवसर कम होते हैं।
  • रोजमर्रा की बातचीत में नए शब्द शामिल करें और उनका अर्थ भी समझाएं।
  • खेल-खेल में भाषा सिखाएं, जैसे चित्र पहचानना, रंगों और चीजों के नाम बताना।
  • दूसरे बच्चों के साथ खेलने का मौका दें। कम्युनिकेशन से आत्मविश्वास बढ़ता है।
  • हर बच्चे की ग्रोथ अलग होती है। इसलिए दूसरे बच्चों से तुलना न करें।
  • अगर उम्र के अनुसार भाषा में स्पष्टता न हो तो पीडियाट्रिशियन या स्पीच-लैंग्वेज थेरेपिस्ट से सलाह लें।



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Monday, August 3, 2026

Blog report 18 lakhs

 


Thursday, July 30, 2026

अवग्रह (Avagraha)

 चिह्न ‘ऽ’ को अवग्रह (Avagraha) कहा जाता है। इसका मुख्य उपयोग संस्कृत और हिंदी व्याकरण में संधि के कारण विलुप्त हुए ‘अ’ स्वर को दर्शाने, शब्दों में स्वर को लंबा खींचने, तथा छंदशास्त्र में गुरु मात्रा को दिखाने के लिए किया जाता है।इस चिह्न के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया अवग्रह लेख देख सकते हैं।

मुख्य उपयोग :

पूर्वरूप संधि: जब पद के अंत में 'ए' या 'ओ' हो और उसके बाद 'अ' आए, तो 'अ' छिप जाता है और उसकी जगह 'ऽ' लगता है। जैसे: सो + अहम् = सोऽहम्।

स्वर को खींचना: आधुनिक भाषाओं या बोलियों में किसी को पुकारते समय स्वर को दीर्घ (लंबा) करने के लिए इसका प्रयोग होता है। जैसे: माँ ऽऽऽ।

छंदशास्त्र: कविता या छंद में गुरु (भारी/दीर्घ) मात्रा को दर्शाने के लिए भी इस चिह्न का उपयोग किया जाता है।