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Sunday, July 30, 2017

सूचना 1-2

सूचना जुलाई-2017-2
कवि एवं लघु-कथा लेखकों के लिए-
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सूचना जुलाई-2017-1
भाषा और कार्यशाला
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Monday, July 10, 2017

हिंदी में ई-सामग्री : वर्तमान स्थिति


आभ्यंतर : लोक, भाषा, विश्व साहित्य और समकालीन वैचारिकि का मंच; वर्ष-01, अंक : 02, जनवरी-2017
ISSN: 2348-7771, संपादक : कुमार विश्वमंगल पाण्डेय, जहाँगीरपुरी दिल्ली


डॉ. धनजी प्रसाद , सहायक प्रोफेसर, (भाषा-प्रौद्योगिकी)
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा (महाराष्ट्र)
dhpr.langtech@gmail.com
1. परिचय
आज के समय में इंटरनेट हमारे तकनीकी जीवन का आधार है। पाठ, चित्र के अलावा ऑडियो-विजुअल सामग्री में असीमित मात्रा में आज इंटरनेट पर उपलब्ध है। किसी भी प्रकार की जानकारी या ज्ञान की आवश्यकता होने पर हम तुरंत इंटरनेट खोलते हैं और उसे प्राप्त कर लेते हैं। इंटरनेट हमारे जीवन में ज्ञान-विज्ञान, प्रचार-प्रसार और सूचनाओं के त्वरित विस्तारण का माध्यम बन चुका है। इसलिए आज किसी भी देश या समाज की तकनीकी प्रगति बहुत हद तक इस बात पर निर्भर करती है कि वह इंटरनेट से कितना जुड़ा हुआ है या इंटरनेट का वहाँ कितना विस्तार है। यह बात भाषा के संदर्भ में भी उतनी ही सत्य है। आज किसी भी भाषा के प्रयोग और विस्तार को बढ़ाने के लिए उस भाषा में इंटरनेट पर सामग्री उपलब्ध होना अतिआवश्यक है।
हिंदी भारत की राजभाषा है। पिछले कुछ दशकों में हिंदी को तकनीकी के क्षेत्र में अग्रणी भाषा के रूप में स्थापित करने के लिए अनेक प्रकार के संस्थागत और व्यक्तिगत प्रयास किए गए हैं। भारत में कंप्यूटर क्रांति के बाद इंटरनेट क्रांति आज के समय की माँग है। भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री माननीय मोदी जी द्वारा भी डिजिटल इंडिया के रूप में तकनीकी साधनों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिनमें इंटरनेट सर्वोपरि है। इंटरनेट का वास्तविक अर्थों में भारत में विस्तार तभी हो सकेगा, जब इंटरनेट पर हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में अधिकाधिक सामग्री उपलब्ध हो सकेगी। इसलिए आज यह जानना नितांत आवश्यक है कि हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में कितनी और किस प्रकार की सामग्री इंटरनेट पर उपलब्ध है। इसी का ध्यान रखते हुए व्यक्तिगत स्तर पर हिंदी में ऑनलाइन उपलब्ध सामग्री का एक सर्वेक्षण करके प्रमुख वेबसाइटों और उन पर उपलब्ध सामग्री के बारे में प्रस्तुत आलेख में चर्चा की जा रही है। इसे निम्नलिखित शीर्षकों में प्रस्तुत किया जा रहा है-
भाषा और साहित्य, हिंदी विकिपेडिया, स्वास्थ्य और चिकित्सा, मीडिया (समाचार चैनल और समाचार पत्र), मनोरंजन (सिनेमा और गीत)
2. भाषा और साहित्य
इंटरनेट ज्ञान को संग्रहित करने एवं प्राप्त करने का आज सबसे बड़ा भंडार है। यहाँ पर भी हिंदी ने प्रभावशाली दस्तकत दी है। आज हिंदी के लाखों  ब्लॉग एवं वेबसाइटें हैं। ब्लॉग एवं वेबसाइटों के अतिरिक्त धीरे-धीरे हिंदी के बहुत सारे भाषिक टूल भी इंटरनेट पर ऑनलाइन उपलब्ध हो गए है; जैसे: हिंदी के ई-कोश, हिंदी शब्द-तंत्र (Hindi WordNet) एवं हिंदी साहित्य तथा ज्ञान विज्ञान से संबंधित ई-लाइब्रेरी आदि। इन सभी की उपलब्धता आधुनिक युग में हिंदी को नई ऊँचाई प्रदान कर रही है। इंटरनेट पर केवल हिंदी ही नहीं बल्कि अनेक भारतीय भाषाओं के लिए ऑनलाइन शब्दकोश उपलब्ध कराने वाली वेबसाइटें हैं। इस प्रकार भिन्न-भिन्न प्रकार की सामग्री और साहित्य उपलब्ध कराने वाली वेबसाइटें भी हैं। उदाहरण के लिए कुछ वेबसाइटों को देख सकते हैं-
2.1 http://www.hindisamay.com/ : यह महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा का एक बृहद प्रयास है। जिसमें हिंदी के प्रमुख साहित्यकारों की रचनाओं की सामग्री लगभग पाँच लाख पृष्ठों में उपलब्ध है और आगे भी कार्य निरंतर जारी है। हिंदी के विविध रचनाकारों को इसमें वर्णानुक्रम में उनके नाम के अनुसार खोजा जा सकता है, अथवा हिंदी साहित्य के विविध क्षेत्रों के लिए दिए गए टैबों को क्लिक करके भी आवश्यक सामग्री प्राप्त की जा सकती है-

आज देश-विदेश में लाखों लोगों द्वारा हिंदी सीखने और सीखाने के लिए इसका प्रयोग किया जा रहा है।
2.2 http://www.shabdkosh.com/ : इस वेबसाइट पर अंग्रेजी-हिंदी या हिंदी-अंग्रेजी में शब्दार्थ देखे जा सकते हैं। साथ इसमें हिंदी के अलावा बंगाली, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, मराठी, पंजाबी, तमिल और तेलुगु भाषाओं के विकल्प भी उपलब्द हैं। इसमें एक-एक शब्द के 40 तक अर्थ देखे जा सकते हैं। उदाहरण के लिए ‘science’ शब्द का अर्थ देखने पर 14 अर्थ प्राप्त होते हैं- अध्ययन, उस्तादी, कौशल, ज्ञान, तकनीक, प्रक्रिया, विज्ञान, विद्या, विषय,  शास्त्र, हुनर, इल्म, विद्या, विभाग। इसी प्रकार प्रत्येक शब्द के उच्चारण को सुना भी जा सकता है। इसी प्रकार पर्यायवाची और विलोम आदि की भी व्यवस्था है।
2.3 http://bharatdiscovery.org/india/मुखपृष्ठ : भारत की साहित्यिक और सांस्कृतिक थाती को सहेजता हुआ यह एक उल्लेखनीय प्रयास है। इसमें भारत के इतिहास, पर्यटन, साहित्य, धर्म, संस्कृति, दर्शन आदि से जुड़ी विशाल सामग्री एक ही स्थान पर प्राप्त हो जाती है-



2.4 http://kavitakosh.org/kk/कविता_कोश_मुखपृष्ठ : हिंदी और उसकी बोलियों के लोक साहित्य को सहेजने की दृष्टि से यह भी एक बड़ा संकलन है। इसमें हिंदी की अनेक सहभाषाओं और बोलियों के लोक साहित्य को देखा और पढ़ा जा सकता है-


2.5 http://www.hindikunj.com/ : यह भी हिंदी साहित्य और व्याकरण संबंधी ज्ञान के लिए एक उत्तम स्रोत है। वैसे इस वेबसाइट पर व्याकरण संबंधी ज्ञान बहुत कम है, किंतु साहित्यिक सामग्री पर्याप्त मात्रा में है-

इसी प्रकार इंटरनेट पर करोड़ों वेबसाइटें हैं जहाँ प्रत्येक विषय से संबंधित ज्ञान विशाल मात्रा में उपलब्ध है। यद्यपि यहाँ भी अंग्रेजी का वर्चस्व है किंतु इसके बावजूद विभिन्न विषयों से जुड़े ज्ञान का पर्याप्त भंडार इंटरनेट पर हिंदी में भी देखा जा सकता है जो कंप्यूटर, तकनीकी और सूचना प्रौद्योगिकी के सभी पक्षों से संबंधित हैं। इन्हें गूगल सर्च या वेबसाइट के नाम से खोजा जा सकता है।
3. हिंदी विकिपीडिया
हिंदी विकिपीडिया, विकिपीडिया का हिंदी भाषा का संस्करण है, जिसका स्वमित्व विकिमीडिया संस्थान के पास है। हिंदी संस्करण जुलाई 2003 में आरम्भ किया गया था, और 31 अगस्त 2011 तक इसमें 1,0,013 से अधिक वैध लेख और लगभग 51,220 से अधिक पंजीकृत सदस्य हैं। इसी दिन यह एक लाख लेखों का आँकड़ा पार करने वाला प्रथम भारतीय भाषा विकिपीडिया बना।–

4. स्वास्थ्य और चिकित्सा
चिकित्सा (medical) एक ऐसा क्षेत्र है जिसका कामकाज सामान्यतः अंग्रेजी में ही होता है। यह सभी प्रकार के लोगों की मूल आवश्यकता है। इसलिए इससे संबंधित सामग्री का आम आदमी की भाषा में होना नितांत आवश्यक है। वर्तमान में हिंदी में अनेक वेबसाइटें हैं, जिन पर भिन्न-भिन्न प्रकार के रोगों और उनकी चिकित्सा संबंधी जानकारियाँ उपलब्ध हैं। उदाहरण के लिए कुछ को देखा जा सकता है-
4.1 http://jkhealthworld.com/hindi/ : इस वेबसाइट पर आयुर्वेद, होम्योपैथ, प्राकृतिक चिकित्सा और हेल्थ से जुड़े अनेक क्षेत्रों की जानकारियाँ सरल भाषा में उपलब्ध हैं। अतः यह वेबसाइट विभिन्न प्रकार के रोगों और उनके इलाजों के बारे में हिंदी माध्यम से उपलब्ध कराते हुए चिकित्सा के क्षेत्र में हिंदी को संपन्न बनाने का कार्य कर रही है-

4.2 http://www.onlymyhealth.com/hindi.html : हमारी वर्तमान जीवनशैली के कारण होने वाली प्रमुख बिमारियों और विभिन्न गंभीर रोगों, जैसे- अर्थराइटिस, कैंसर, डायबिटीज, बी.पी., थायराइड, माइग्रेन आदि के बारे में और उनके इलाज में जानने के लिए यह एक उपयुक्त वेबसाइट है। साथ ही इस पर डाइट और फिटनेस, हेयर और ब्यूटी, गर्भावस्था और परवरिश संबंधी महत्वपूर्ण बातें भी दी गई हैं। इसी प्रकार कुछ अन्य वेबसाइटों को भी देखा जा सकता है-




इसी प्रकार विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं के ऑनलाइन वर्जन पर हेल्थ से संबंधित एक लिंक रहता है, जहाँ स्वास्थ्य और चिकित्सा संबंधी विभिन्न जानकारियाँ प्राप्त की जा सकती हैं।
5. मीडिया (समाचार चैनल और समाचार पत्र)
मीडिया के क्षेत्र में हिंदी का स्थान बहुत ही उन्नत है। हिंदी माध्यम से अनेक समाचार चैनल और समाचार पत्र संपूर्ण भारत में चल रहे हैं। आज ये सभी हिंदी समाचार चैनल और समाचार पत्र ऑनलाइन भी उपलब्ध हैं। उदाहरण के लिए कुछ समाचार चैनलों के लिंक इस प्रकार हैं-


·        khabar.ndtv.com/
·        aajtak.intoday.in/
·        abpnews.abplive.in/india-news/
·        khabar.ibnlive.com/
·        zeenews.india.com/hindi/india
·        www.newsnation.in/livevideo


इसी प्रकार समाचार पत्रों के भी लिंक देखे जा सकते हैं-


·        www.jagran.com/
·        www.bhaskar.com/
·        navbharattimes.indiatimes.com/
·        www.livehindustan.com/
·        www.amarujala.com/
·        www.bbc.com/hindi


ऑनलाइन प्लेटफॉर्म उपलब्ध होने के कारण अब समाचार पत्रों के पास यह बाध्यता नहीं रही कि समाचारों को अगले दिन ही दिखाएँ। जैसे ही कोई घटना घटित होती है, अपने वेबपेज पर वे तुरंत अपडेट कर देते हैं और बाद में अगले दिन के अखबार में छपती है। इससे वे इलेक्ट्रानिक मीडिया के साथ कदम-से-कदम मिलाकर चल रहे हैं।
6. मनोरंजन (सिनेमा और गीत)
हिंदी के अंतरराष्ट्रीय प्रचार-प्रसार में हिंदी सिनेमा का बहुत बड़ा योगदान रहा है। आरंभ से हिंदी फिल्में और गीत विदेशियों को अपनी ओर आकर्षित करते रहे हैं। इस कारण बहुत से विदेशिओं ने प्रेरित होकर हिंदी सीखने में दिलचस्पी दिखाई। पहले इन फिल्मों और गीतों को संपूर्ण विश्व में पहुँचाना एक चुनौती भरा कार्य रहा है। इंटरनेट के आगमन के पश्चात यह समस्या खत्म हो गई। अब हम घर बैठे किसी भी फिल्म अथवा गीत को अपलोड और डाउनलोड कर सकते हैं। इस कारण हिंदी के विस्तार में अधिक गति आई है। आज हिंदी फिल्मों और गीतों के लिए अनेक वेबसाइटें उपलब्ध हैं। उदाहरणस्वरूप कुछ प्रमुख इस प्रकार हैं-
हिंदी फिल्में देखने या डाउनलोड करने हेतु-




हिंदी गीत देखने या डाउनलोड करने हेतु –




7. उपसंहार

इस प्रकार, वर्तमान समय में इंटरनेट पर हिंदी में विविध प्रकार की सामग्री बहुत अधिक मात्रा में उपलब्ध है। इससे हिंदी आधुनिक प्रौद्योगिकी के साथ कदम-से-कदम मिलाकर चलना संभव हो सका है। आज विश्व के किसी भी कोने में हम घर बैठे हिंदी में भाषा और साहित्य, स्वास्थ्य और चिकित्सा, समाचार और मनोरंजन संबंधी बिना किसी अवरोध के प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा ज्ञान-विज्ञान और प्रौद्योगिकी संबंधी सामग्री भी प्रचुर मात्रा में ऑनलाइन उपलब्ध है। इसके लिए हजारों या लाखों की संख्या में वेबसाइटें तो हैं ही यू-ट्यूब आदि पर ऑडियो-विजुअल सामग्री में पर्याप्त मात्रा में देखी जा सकती है। यद्यपि यह सामग्री बहुत अधिक होते हुए भी विश्व अन्य प्रमुख भाषाओं, जैसे- अंग्रेजी आदि के सामने बहुत कम दिखाई पड़ती है। फिर भी ऑनलाइन हिंदी में उपलब्ध सामग्री की विशाल मात्रा को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि शुरुआत अच्छी है, बस आवश्यकता है और अधिक मनोयोग से लगकर इसे समृद्ध करने की तथा जन-जन तक पहुँचाने की।

Sunday, July 2, 2017

मुक्त शिक्षा (Open Education) के महत्वपूर्ण Terms

मुक्त शिक्षा (Open Education) के महत्वपूर्ण Terms
1.     OER (Open Educational Resource) : इस term का प्रयोग सर्वप्रथम UNESCO द्वारा 2002 में किया गया। इसका उद्देश्य सबको उच्च शिक्षा की सामग्री निःशुल्क उपलब्ध कराना है।
2.     COL (Commonwealth of Learning) : यह Commonwealth देशों का एक संगठन है, जिसकी स्थापना 1988 में हुई थी। इसका मुख्यालय Vancouver, Canada में है। इसका मुख्य उद्देश्य मुक्त और दूरस्थ शिक्षा (Open and distance learning) हेतु ज्ञान, स्रोत और तकनीकी का विकास करने तथा उसे share करने हेतु प्रेरित करना है।
3.     INFLIBNET (Information and Library Network) : यह इंटरनेट के माध्यम से ज्ञान-विज्ञान की सामग्री को सभी के लिए निःशुल्क उपलब्ध कराने का MHRD, भारत सरकार का एक उपक्रम है। इसके अंतर्गत संचालित ई-पी.जी. पाठशाला के अंतर्गत अनेक स्नातकोत्तर विषयों की सामग्री ऑनलाइन उपलब्ध है।
4.     NMEICT (National Mission on Education through Information and Communication Technology) : यह MHRD, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है, जिसके अंतर्गत उच्च शिक्षा के क्षेत्र में ज्ञान और तकनीकी के विकास और प्रचार-प्रसार को प्रोत्साहित और regulate किया जाता है।
5.     NPTEL (National Program on Technology Enhanced Learning) : यह NMEICT के अंतर्गत ही एक initiative है, जिसमें इंजिनियरिंग और विज्ञान संबंधी पाठ्यक्रमों से संबंधित सामग्री तैयार और share की जाती है।
6.     NKN (National Knowledge Network) : यह भारत में उच्च शिक्षा से जुड़े सभी शैक्षिक संस्थानों को आपस में जोड़ने के उद्देश्य से निर्मित कार्यक्रम है। इसके अंतर्गत अनेक संस्थान आपस में जुड़ चुके हैं और शोध, ज्ञान, तकनीकी एवं सूचनाओं का परस्पर आदान-प्रदान करते हैं।
7.     SWAYAM (Study Webs of Active Learning for Young Aspiring Minds) : यह विभिन्न पाठ्यक्रमों के ऑनलाइन अध्ययन-अध्यापन हेतु एक प्लेटफॉर्म है।
8.     MOOCs (Massive Open Online Courses) : यह भी विभिन्न पाठ्यक्रमों के ऑनलाइन अध्ययन-अध्यापन हेतु एक प्लेटफॉर्म है, जो MHRD द्वारा प्रायोजित है।


Monday, June 19, 2017

भाषाविज्ञान का सैद्धांतिक अनुप्रयुक्त एवं तकनीकी पक्ष




भाषाविज्ञान का सैद्धांतिक, अनुप्रयुक्त एवं तकनीकी पक्ष (Theoretical, Applied and Technological Aspect of Linguistics)

डॉ. धनजी प्रसाद (2011)
प्रिय साहित्य सदन, सोनिया विहार, दिल्ली  110094


भूमिका



भाषाविज्ञान मानविकी के विषयों में सर्वाधिक वैज्ञानिक और विज्ञानों में सर्वाधिक मानवीय है। अत: भाषाविज्ञान एक ओर भाषा शिक्षण, अनुवाद, कोश निर्माण, साहित्य समीक्षा, वाकदोष चिकित्सा तथा भाषा नियोजन जैसे भाषा केंद्रित मानवीय कार्य व्यापारों में अनुप्रयुक्त होता है तो दूसरी ओर नितांत मानवीय सत्ता के बावजूद भाषा की रूपात्मक, तार्किक संरचना के गणितवत्स स्वरूप के कारण मानव-मशीन अंतरापृष्ठ का आधार बनकर भाषा प्रौद्योगिकी और भाषा अभियांत्रिकी के उपकारक शास्त्र के रूप में कम्प्यूटर साधित भाषा शिक्षण, अनुवाद, कोश निर्माण, वाक् से पाठ एवं पाठ से वाक् जैसे अनेक उपयोगी अनुप्रयोगों को संभव बनाता है।
स्वायत्त व्यवस्था के रूप में भाषा के अध्ययन – सूक्ष्म भाषाविज्ञान तथा उसके अंतरानुशासनिक अध्ययन-क्षेत्रों, अनेकविध अनुप्रयोग क्षेत्रों तथा कम्प्यूटर साधित विभिन्न प्रणालियों के विकास की दृष्टि से भाषाविज्ञान के इस विस्तार – वृहत भाषाविज्ञान के अध्ययन के लिए प्रवृत्त नवागत छात्रों के लिए अध्ययन हेतु अंग्रेजी पुस्तकें प्राय: दुर्बोध या दुष्प्राप्य होती हैं। हिंदी में उपर्युक्त व्याप्ति वाली पुस्तकों का अभाव है। भाषाविज्ञान के हिंदी छात्रों की इन कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए भाषा प्रौद्योगिकी विभाग,भाषा विद्यापीठ, महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के हमारे छात्र एवं शोधार्थी श्री धनजी प्रसाद ने भाषाविज्ञान का सैद्धांतिक, अनुप्रयुक्त एवं तकनीकी पक्ष की रचना की है।
यह पुस्तक केवल पुस्तकीय सूचनाओं पर आधारित नहीं है अपितु लेखक द्वारा शिक्षकों एवं विषय-विशेषज्ञों से निरंतर परिप्रश्नों से संचित ज्ञान पर आधारित है। हम उनके इस प्रयास की सराहना करते हैं। इस आरंभिक प्रयास की गुणवत्ता को देखते हुए हमें उनसे अनेक अपेक्षाएँ हैं। आशा है भाषाविज्ञान के क्षेत्र में कदम रखने वाले हिंदी छात्रों के लिए यह पुस्तक उपयोगी सिद्ध होगी और उन्हें इस विषय के गहन अध्ययन के लिए प्रेरित करेगी।

         उमाशंकर उपाध्याय
                                       प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष (भाषा प्रौद्योगिकी विभाग) एवं,
       अधिष्ठाता (भाषा विद्यापीठ)
म.गां.अं.हिं.वि.वि., वर्धा




आमुख


भाषा मनुष्य के साथ जुड़ी हुई एक नैसर्गिक शक्ति है जो प्रकृति द्वारा उसे सहजात रूप से दी गई है। मनुष्य द्वारा विचार करने, किसी विचार को एक से अधिक व्यक्तियों तक संप्रेषित करने एवं विचारों तथा अनुभवों को ज्ञान के रूप में संचित करने का कार्य भाषा के कारण ही किया जा सका है जिसके फलस्वरूप समाज और सभ्यताओं का विकास संभव हो सका है।
मनुष्य की स्वाभाविक प्रवृत्ति यह है कि वह अपने से जुड़ी प्रत्येक वस्तु, प्रक्रिया एवं क्षेत्र के बारे में जानने के लिए सदैव जिज्ञासु रहता है और अपनी क्षमता के अनुसार इनका सुव्यवस्थित, सुगठित एवं क्रमबद्ध विश्लेषण करता है। भाषा भी इससे अछूती नहीं है। मानव सभ्यता के विकास के साथ-साथ भाषिक इकाइयों, शब्द-अर्थ संबंध एवं भाषिक संप्रेषण पर विभिन्न दार्शनिकों और विद्वानों द्वारा किए गए सुस्पष्ट विवेचन एवं व्याख्याओं को देखा जा सकता है। भारत में तो यह कार्य संस्कृत काल में ही उन्नति के शिखर पर था। यूरोप और अमेरिका में यह सर विलियम जोंस, एफ. डी. सस्यूर और लियोनार्ड ब्लूमफिल्ड से होता हुआ नोएम चॉम्स्की तक निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है।
तकनीकी के क्षेत्र में विकास मानव सभ्यता के विकास की उन्नत कड़ी है जो इसे निरंतर वैभवपूर्ण बनाती जा रही है। पिछले 60 सालों में तो इसने चमत्कारिक प्रगति की है जिसमें संगणक (computer)का आगमन क्रांतिकारी घटना है। मानव व्यवहार के क्षेत्रों में संगणक और अन्य तकनीकी मशीनों ने इतनी गहरी पैठ बना ली है कि प्रत्येक विज्ञान के सैद्धांतिक ज्ञान का इन क्षेत्रों में अधिक से अधिक अनुप्रयोग करने का प्रयास किया जा रहा है। भाषाविज्ञान भी इस कार्य में पीछे नहीं है। भाषावैज्ञानिक ज्ञान की उपयोगिता मानव जीवन के व्यावहारिक क्षेत्रों में निर्विवाद है, किंतु इसके साथ-ही-साथ इसका अनुप्रयोग तकनीकी क्षेत्रों में संगणक और अन्य अंकीय मशीनों (digital machines) में भी विभिन्न सॉफ्टवेयर प्रणालियों के माध्यम से किया जा रहा है जिससे इसके अनुप्रयोग क्षेत्रों में एक नया आयाम जुड़ गया है। अतः भाषाविज्ञान पर सैद्धांतिक और अनुप्रयुक्त दृष्टि से चिंतन के साथ-साथ तकनीकी अनुप्रयोग की दृष्टि से चिंतन भी वर्तमान समय की मांग है।
भाषा विज्ञान के तकनीकी पक्ष पर हिंदी में पुस्तकों की अनुपलब्धता को देखते हुए प्रस्तुत पुस्तक में भाषावैज्ञानिक ज्ञान के तकनीकी अनुप्रयोग से संबंधित विविध पक्षों पर परिचयात्मक प्रकाश डाला गया है। किंतु भाषा विज्ञान के तकनीकी पक्ष को समझने से पूर्व इसके सैद्धांतिक और अनुप्रयुक्त पक्ष पर भी विचार करना आवश्यक हो जाता है जिससे कि विवेचन में सात्तय और संपूर्णता आ जाए।
इन बातों को ध्यान में रखते हुए प्रस्तुत पुस्तक को दो खंडों में विभाजित किया गया है, खंड - क भाषाविज्ञान: सैद्धांतिक एवं अनुप्रयुक्त पक्ष तथा खंड - ख तकनीकी पक्ष एवं अनुप्रयोग। भाषाविज्ञान के सैद्धांतिक पक्ष पर किए गए चिंतन को अधिक से अधिक संक्षिप्त रखने का प्रयास किया गया है एवं विवेचन हेतु नवीन दृष्टि अपनाई गई है। इसमें भाषा को कथ्य और अभिव्यक्ति के संबंधों पर आधारित ऐसी व्यवस्था के रूप में देखा गया है जिसकी सत्ता अमूर्त होती है तथा जो स्वनों को अर्थ से जोड़ने का कार्य करती है। भाषाविज्ञान की विभिन्न शाखाओं में इसका अध्ययन अभिव्यक्ति व्यवस्था और कथ्य व्यवस्था के रूप में किया जाता है।
अनुप्रयोग वह प्रक्रिया है जो प्रत्येक सैद्धांतिक ज्ञान को व्यावहारिकता प्रदान करती है। भाषावैज्ञानिक ज्ञान के अनुप्रयोगों को प्रस्तुत पुस्तक में तीन वर्गों में वर्गीकृत करके देखने का प्रयास किया गया है : व्यावहारिक अनुप्रयोग, अंतरानुशासनिक अनुप्रयोग और तकनीकी अनुप्रयोग। भाषा शिक्षण,अनुवाद, कोशविज्ञान, भाषा नियोजन और वाक् तथा भाषा व्याधि चिकित्सा ऐसे क्षेत्र हैं जो भाषावैज्ञानिक ज्ञान को सीधे-सीधे व्यावहारिक अनुप्रयोग का धरातल प्रदान करते हैं। इनके अतिरिक्त समाजभाषाविज्ञान,मनोभाषाविज्ञान, न्यूरोभाषाविज्ञान और शैलीविज्ञान ऐसे विषयक्षेत्र हैं जो अन्य ज्ञानानुशासनों के साथ जुड़ते हुए भाषा के विविध पक्षों के बारे में और अधिक ज्ञान अर्जित करते हैं। इन सभी को इस पुस्तक में समाविष्ट किया गया है और इनके अंतर्गत जिन शीर्षकों पर हिंदी में पर्याप्त सामग्री उपलब्ध है उनका उल्लेख मात्र करते हुए इन विषयों के संबंध में नवीन संकल्पनाओं को अधिक से अधिक विवेचित करने का प्रयास किया गया है।
तकनीकी आधुनिक ज्ञान विज्ञान के क्षेत्र में एक नवीन पक्ष है जो मुख्यत: स्वचलित इंजनों,विद्युतिक मशीनों, औजारों (tools), प्रणालियों (systems) और उपकरणों (instruments) के विकास और प्रयोग से जुड़ा हुआ है। इस क्षेत्र में भी भाषावैज्ञानिक ज्ञान की महत्ता को देखते हुए प्रस्तुत पुस्तक केखण्ड-ख तकनीकी पक्ष एवं अनुप्रयोग में भाषाविज्ञान के तकनीकी पक्ष को सूचना प्रौद्योगिकी और अभियांत्रिकी (information technology and engineering) से जोड़ते हुए देखने का प्रयास किया गया है। इसके अतिरिक्त प्राकृतिक भाषा संसाधन (NLP) और विभिन्न अनुप्रयोग क्षेत्रों : मशीनी अनुवाद, प्रकाशिक अक्षर संज्ञान, पाठ से वाक् और वाक् से पाठ, संगणकीय कोशविज्ञान एवं सूचना प्रत्ययन आदि को समुचित स्थान दिया गया है। इसके साथ ही भाषाविज्ञान और तकनीकी के संयोग से उत्पन्न नवीन क्षेत्र कार्पस भाषाविज्ञान एवं समस्त मानव मेधा को आत्मसात कर मशीन में स्थापित करने की ओर अग्रसर कृत्रिम बुद्धि को भी इसमें सम्मिलित किया गया है।
पुस्तक के अंतिम भाग संदर्भ एवं परिशिष्ट में विवेचन से संबंधित आवश्यक सूचनाएँ दी गई हैं। भाषाविज्ञान के सैद्धांतिक, अनुप्रयुक्त और तकनीकी पक्ष से जुड़ी नवीन संकल्पनाओं के लिए यथासंभव वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग द्वारा मान्य शब्दावली का प्रयोग किया गया है किंतु जहाँ पर ये शब्द अपर्याप्त सिद्ध हुए हैं वहाँ कुछ नवीन पारिभाषिक शब्दों की रचना भी की गई है। इन सभी को पुस्तक के अंत में अंग्रेजी-हिंदी पारिभाषिक शब्दावली शीर्षक के अंतर्गत दिया गया है इसके अतिरिक्त आवश्यकतानुसार लिप्यंतरण करने और रोमन लिपि में ही लिख देने का  कार्य भी किया गया है।
प्रस्तुत पुस्तक की भूमिका श्रद्धेय गुरुवर प्रो. उमाशंकर उपाध्याय ने लिखकर मुझे उपकृत किया। मैं उनका चिरऋणी हूँ। इसके साथ ही मैं परम पूज्य गुरुवर डॉ. अनिल कुमार पाण्डेय के प्रति हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करता हूँ जिन्होंने इस पुस्तक पर अपनी सारगर्भित टिप्पणी कर मुझे प्रोत्साहित किया। इसके साथ ही मैं उनकी पत्नी श्रीमती आशा पाण्डेय (चाची) का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ जिन्होंने मुझे पुत्र के समान मानते हुए स्नेह एवं प्यार दिया। मैं आदरणीय प्रो. महेंद्र कुमार सी. पाण्डेय, डॉ. हरीश ए. हुनगुंद एवं डॉ. अनिल दुबे का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ जिन्होंने निरंतर मेरा मार्गदर्शन किया।
किसी भी व्यक्ति द्वारा विद्यार्थी और शोधार्थी जीवन में बड़े कार्य को पूर्ण करने में मित्रों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। अत: यहाँ पर अपने दो दोस्तों प्रवीण कुमार पाण्डेय एवं रणजीत भारती का नाम न लेना मेरी धृष्टता होगी। मैं इन दोनों को हृदय से धन्यवाद देता हूँ जिन्होंने समय-समय पर विभिन्न विषयों पर चर्चा करते हुए अनेक महत्वपूर्ण सुझाव दिए। विश्वविद्यालय के सभी अध्यापक, कर्मी एवं शोधार्थी जिनका प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से इस कार्य में सहयोग रहा है उनका मैं कृतज्ञ हूँ। मैं अपने दादा समान परम श्रद्धेय श्री बालेश्वर पाण्डेय का आभारी हूँ जिनके आशिर्वाद से यह कार्य संपन्न हो सका है। इसके साथ ही मैं अपने बड़े भाई रणजीत कुशवाहा एवं चाचाजी श्री शुभनारायण कुशवाहा के प्रति हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त करता हूँ जिन्होंने मुझे घर की जिम्मेदारियों से मुक्त रखा और हरसंभव सहयोग किया।
अंत में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के कुलपति आदरणीय विभूति नारायण राय का हृदय से आभारी हूँ जिन्होंने इस विश्वविद्यालय में पठन-पाठन का परिवेश उपलब्ध कराया है।
सुधी पाठकों एवं विद्वजनों के सुझाव सादर आमंत्रित हैं।


धनजी प्रसाद


विषय सूची

खण्ड : क भाषाविज्ञान : सैद्धांतिक एवं अनुप्रयुक्त पक्ष
             पृ.सं.
भाषाविज्ञान : सैद्धांतिक पक्ष                                                 15
(Linguistics : Theoretical Aspect)
1.1   भाषा                                                                            15                        
1.2   मानव मस्तिष्क में भाषा                                                       18
1.3   भाषा : अमूर्त व्यवस्था                                                        25                          
1.4   भाषाविज्ञान                                                                     25
1.5   भाषाविज्ञान के प्रकार                                                         33
                                                                                  
अनुप्रयुक्त पक्ष : व्यावहरिक अनुप्रयोग                                   35
(Applied Aspect : Practical Application)                                                        
2.1   अनुप्रयोग                                                                       35            
2.2   भाषाविज्ञान का अनुप्रयुक्त पक्ष                                               35
2.3   व्यावहारिक अनुप्रयोग                                                        36

अनुप्रयुक्त पक्ष : अंतरानुशासनिक अनुप्रयोग                           63
(Applied Aspect : Interdisciplinary Application)                                                          
3.1   समाजभाषाविज्ञान                                                             65
3.2   मनोभाषाविज्ञान                                                                70
3.3   न्यूरोभाषाविज्ञान                                                               75
3.4   शैलीविज्ञान                                                                     80           

खण्ड : ख तकनीकी पक्ष एवं अनुप्रयोग
तकनीकी                                                                             89
(Technology)
4.1   तकनीकी : विविध पक्ष                                                       90
4.2   भाषाविज्ञान और तकनीकी                                                   98
·              संगणकीय भाषाविज्ञान
·              भाषा प्रौद्योगिकी
·              भाषा अभियांत्रिकी

अनुप्रयोगात्मक प्रक्रिया: प्राकृतिक भाषा संसाधन            107
(Applying Process: Natural Language Processing)
5.1   प्राकृतिक भाषा संसाधन : विविध पक्ष                                     108
5.2   प्राकृतिक संसाधन में होने वाली प्रक्रियाएँ                                  116

अनुप्रयोगात्मक क्षेत्र                                                             124
 (Applying Areas)
6.1    मशीनी अनुवाद                                                               125
6.2    प्रकाशिक अक्षर संज्ञान                                                       131
6.3    पाठ से वाक् और वाक् से पाठ                                              131
6.4    सूचना प्रत्ययन                                                                134
6.5    पाठ सारांशीकरण                                                             135
6.6    संगणकीय कोशविज्ञान                                                       136
6.7    संगणक साधित भाषा अधिगम                                             137
6.8    प्रश्न उत्तर प्रणालियाँ                                                          138
6.9    भाषा पठन एवं लेखन सहयोग                                              140
6.10  वाक् संज्ञान                                                                    141
6.11  वार्ता प्रणालियाँ                                                               141
6.12  खोज विस्तार                                                                  142
कार्पस भाषाविज्ञान                                                              144
 (Corpus Linguistics)
7.1   कार्पस                                                                           144
7.2   कार्पस भाषाविज्ञान                                                            146
7.3   कार्पस भाषाविज्ञान एवं भाषा-विश्लेषण                                    147
7.4   कार्पस के प्रकार                                                                149
7.5   कार्पस एवं ट्रीबैंक                                                              152
7.6   कार्पस का उपयोग                                                             152
कृत्रिम बुद्धि                                                                         155
(Artificial Intelligence)
8.1    बुद्धि                                                                            155
8.2    कृत्रिम बुद्धि                                                                    157
8.3    कृत्रिम बुद्धि : संक्षिप्त इतिहास                                               158
8.4    कृत्रिम बुद्धि और मानव बुद्धि                                                160
8.5    कृत्रिम बुद्धि के क्षेत्र                                                           162
8.6    बुद्धि की प्रकृति                                                               164
8.7    कृत्रिम बुद्धि और ज्ञान प्रतिरूपण                                           165                               
8.8    ज्ञान प्रतिरूपण में निरूपित ज्ञान                                             166
8.9    कृत्रिम बुद्धि और ज्ञान आभियांत्रिकी                                       168
8.10  कृत्रिम बुद्धि और ट्यूरिंग परीक्षण                                           169
8.11  कृत्रिम बुद्धि और अन्य विषय                                               171
संदर्भ एवं टिप्पणी                                                                  174
संदर्भ ग्रंथ                                                                             176
 पारिभाषिक शब्दावली                                                          181