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Tuesday, July 13, 2021

पाइथन में if और else if का प्रयोग

 पाइथन में  if और else if का प्रयोग

अंक के आधार पर श्रेणी का निर्धारण करने वाले प्रोग्राम का निर्माण 

if का प्रयोग करते हुए जो प्रोग्राम किसी भी प्रोग्रामिंग भाषा में विकसित किए जाते हैं, उनमें प्राप्तांक के आधार पर श्रेणी निर्धारण करने वाले प्रोग्राम का निर्माण प्रमुख है। इसके लिए if और else if दोनों का प्रयोग किया जाता है।  इसका कोड निम्नलिखित प्रकार से लिखते हैं -

marks = int (input("Enter the Marks: "))

if marks >= 60:

  print("First")

elif marks >= 45:

  print("Second")

elif marks >= 33:

  print("Third")

else:

  print("Fail")

कोड लिखने के बाद हमें अपना इनपुट नंबर देने के लिए वही बॉक्स प्राप्त होता है जिसकी चर्चा पिछले लेख में की गई है। उसमें आप जो भी इनपुट अंक देंगे उसके आधार पर मशीन हमें यह बताएगी कि विद्यार्थी को कौन सी श्रेणी मिली है , 70 का इनपुट देने पर मशीन प्रथम श्रेणी- First बताएगी-


इसी प्रकार 55 का इनपुट देने पर मशीन द्वितीय श्रेणी- Second बताएगी -

यदि 40 का इनपुट दिया जाए तो तृतीय श्रेणी- Third बताएगी -

यदि इनपुट 33 से कम रहा तो Fail बताएगी - 

अतः पाइथन में  if और else if का प्रयोग करते हुए उक्त प्रकार से प्रोग्राम बनाए जाते हैं ।


पाइथन भाषा में प्रोग्रामिंग का आरंभ

पाइथन : एक परिचय

 पाइथन क्या है?

पाइथन वर्तमान दौर (21वीं शताब्दी के दूसरे दशक) की सबसे प्रसिद्ध भाषा है। प्रोग्रामिंग के क्षेत्र में कार्य कर रहे लोगों द्वारा इसके कई कारण बताए जाते हैं, जैसे- यह भाषा अन्य प्रोग्रामिंग भाषाओं की तुलना में अधिक सरल है; इसका उपयोग विविध प्रकार के सॉफ्टवेयर के विकास, जैसे- web development, software development और Scientific application आदि किसी में भी किया जा सकता जाता है। वर्तमान दौर की अनेक बड़ी कंपनियाँ, जैसे- Google, Yahoo, Quora, Pinterest और Spotify आदि इसका व्यापक स्तर पर उपयोग कर रही हैं। इसलिए पाइथन भाषा सीखना इन सभी जुड़ने के लिए एक अच्छा विकल्प सिद्ध हो सकता है।

Python एक ‘general purpose programming language’ है। इसका कारण है कि इस भाषा में App development, Website building, Machine learning, Data analysis, Web scraping और Natural language processing आदि सभी कार्य किए जाते हैं। यह एक Object-oriented और High level programming language है। यह एक interpreted language है। अर्थात पाइथन भाषा में लिखे गये program के कोड को पहले compile करने की जरूरत नही पड़ती है। इसमें कंपाइलर की जगह इंटरप्रेटर का प्रयोग होता है। पाइथन भाषा में modules और packages का प्रयोग किया जाता है। इसका लाभ यह है कि किसी python program को एक modular style में design किया जा सकता है और इसके code का निर्बाध रूप से दूसरे project में पुनः उपयोग किया जा सकता है।

पाइथन के नवीन संस्करण 

·       Python 3.0 – December 3, 2008

·       Python 3.1 – June 27, 2009

·       Python 3.2 – February 20, 2011

·       Python 3.3 – September 29, 2012

·       Python 3.4 – March 16, 2014

·       Python 3.5 – September 13, 2015

·       Python 3.6 – December 23, 2016

·       Python 3.7 – June 27, 2018

·       Python 3.8 – October 14, 2019

पाइथन इंस्टॉल करना

पाइथन इंस्टॉल करने के लिए गूगल सर्च इंजन में ‘install python’ सर्च करें या https://www.python.org/downloads/ वेबसाइट पर जाएँ। यहाँ आपको ‘Download the latest version for Windows’ का विकल्प मिलेगा। इसके साथ-साथ अन्य ऑपरेटिंग सिस्टम पर भी इंस्टॉल के लिए लिंक दिए रहते हैं। आप अपने ऑपरेटिंग सिस्टम के अनुसार डाउनलोड कर सकते हैं। 

पाइथन और अनाकोंडा (Python and Anaconda)

‘Anaconda’ Python और R प्रोग्रामिंग भाषाओं के लिए एक निःशुल्क और open-source distribution है। इसके अंतर्गत Python interpreter के साथ-साथ machine learning और data science के बहुत से पैकेज आते हैं। इन पैकेजों की आवश्यकता हमें प्रोग्राम बनाने के समय पड़ती ही रहती है। यदि हम चाहें तो प्रत्येक पैकेज को अलग-अलग इंस्टॉल कर सकते हैं, किंतु इसमें बहुत अधिक समय जाता है और सोच-विचार भी अधिक करना पड़ता है। अतः सभी प्रकार के पैकेजों को एक ही जगह पर अनाकोंडा distribution को इंस्टॉल करके पाया जा सकता है। 

पाइथन और IDE

 IDE का पूरा नाम ‘integrated development environment’ है। यह एक software suite होता है जो किसी प्रोग्राम के विकास के लिए आवश्यक टूल्स और परिवेश उपलब्ध कराता है। IDE के माध्यम से development-related tools को एक single framework के अंतर्गत लाया जाता है, जिससे प्रोग्राम का निर्माण करना और कोडिंग करना अत्यंत सरल हो जाता है।  

पाइथन भाषा में प्रोग्रामिंग के लिए अनेक IDEs का प्रयोग किया जाता है, जिनमें से 04 प्रमुख इस प्रकार हैं-

1. JUPYTER LAB

2. JUPYTER NOTEBOOK

3. SPYDER

4. PYCHARM

सामान्यतः आरंभिक प्रोग्रामर JUPYTER NOTEBOOK  का प्रयोग करते हुए पाइथन में प्रोग्रामिंग करते हैं। आगे हम इसका या गूगल कोलैब (Google COlab) का प्रयोग करते हुए प्रोग्रामिंग सीखेंगे।


Sunday, July 11, 2021

रवीन्द्रनाथ श्रीवास्तव : एक परिचय

(किसी मित्र का ह्वाट्सएप संदेश कॉपी)

 हिन्दी के आलोचक : जिनका आज जन्मदिन है-41

हिन्दी में शैलीविज्ञान के प्रस्तोता : प्रो. रवीन्द्रनाथ श्रीवास्तव

बलिया ( उ.प्र.) में जन्मे, लेनिनग्राद और कैलीफोर्निया में पढ़-लिखे और हिन्दी में शैली विज्ञान को प्रतिष्ठित करने वाले प्रो. रवीन्द्रनाथ श्रीवास्तव ( 09.07.1936-03.10.1992) मूलत: विज्ञान के विद्यार्थी थे लेकिन उन्होंने भाषा विज्ञान और साहित्य के अध्ययन का रास्ता चुना. भारत में आने के बाद अपनी प्रतिभा और लेखन से यहाँ के भाषा विज्ञान और साहित्य के अध्ययन की पद्धतियों को व्यापक रूप से प्रभावित किया. उन्होंने श्रवणिक ध्वनिविज्ञान, सैद्धांतिक भाषा विज्ञान, शैली विज्ञान, समाज भाषा विज्ञान, अनुवाद विज्ञान, भाषा शिक्षण और कंप्युटेशनल भाषा विज्ञान आदि भाषा विज्ञान के विविध पक्षों पर कार्य किया है. उन्होंने साहित्य, संस्कृति, शिक्षा और संप्रेषण से संबंधित विविध विषयों पर पुस्तकें लिखी हैं.

रवीन्द्रनाथ श्रीवास्तव की मौलिक पुस्तकों में ‘प्रगतिशील आलोचना’, ‘शैली विज्ञान और आलोचना की नई भूमिका’, ‘भाषा शिक्षण’, ‘संरचनात्मक शैलीविज्ञान’, ‘प्रयोजनमूलक हिन्दी व्याकरण’, ‘भाषाई अस्मिता और हिन्दी’, ‘हिन्दी भाषा का समाजशास्त्र’, ‘हिन्दी भाषा संरचना के विविध आयाम’, ‘भाषा विज्ञान : सैद्धांतिक चिन्तन’,  ‘अनुप्रयुक्त भाषा विज्ञान : सिद्धांत और प्रयोग’, ‘साहित्य का भाषिक चिन्तन’ आदि महत्वपूर्ण हैं.  इसके अलावा  ‘प्रयोजनमूलक हिन्दी’, ‘हिन्दी भाषा : संरचना और प्रयोग’, ‘व्यावहारिक हिन्दी’, ‘हिन्दी का शैक्षिक व्याकरण’, ‘अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान’, ‘साहित्य अध्ययन की दृष्टिय़ाँ’, ‘भाषा के सूत्रधार’, ‘अनुवाद : सिद्धांत समस्याएं’, ‘भाषा विज्ञान परिभाषा कोश’, ‘हिन्दी के संदर्भ में सैद्धाँतिक एवं अनुप्रयुक्त भाषा विज्ञान’ आदि उनकी संपादित पुस्तकें हैं.

रवीन्द्रनाथ श्रीवास्तव ने भाषा को प्रतीक व्यवस्था माना है तथा भारतीय बहुभाषिकता को बहुभाषी एवं बहुसांस्कृतिक समाज की सहज संप्रेषण व्यवस्था के रूप में प्रस्तावित किया है. उनकी मान्यता है कि, “ भाषा का गहरा संबंध समाज से है और इसी कारण वह विषमरूपी होने की नियति से बँधी है. भाषा वस्तुत: प्रयोजनसिद्ध शैलियों के समुच्चय का दूसरा नाम है. किसी एक भाषा की विभिन्न शैलियाँ आपस में अंतत: या तो सामंजस्य की स्थिति में रहती हैं या फिर तनाव की स्थिति में. सामंजस्य की स्थिति शैलियों को प्रयोजन से बाँधती हैं और तनाव की स्थिति उनमें प्रतिस्पर्धा का कारण बनती हैं. भाषा न केवल व्यक्ति के संज्ञानात्मक बोध का प्रतिबिम्ब है बल्कि इस संप्रदाय में वह ऐसा दर्पण भी है जिसमें आधारभूत शैली अन्य आरोपित शैलियों के साथ अपने संबंधों का चित्र भी प्रतिबिंबित करती हैं. इसीलिए भाषा वैज्ञानिकों का दायित्व है कि किसी भाषा के व्याकरण के भीतर वे शैलीभेद संबंधी चर-संयुक्त उपनियमों की व्यवस्था को भी समेंटें.” ( भाषाई अस्मिता और हिन्दी, पृष्ठ-10)

रवीन्द्रनाथ श्रीवास्तव के अनुसार,” हिन्दी मात्र व्याकरण नहीं है और न ही वह केवल विशिष्ट भाषिक संरचना है. भाषा के रूप में वह एक सामाजिक संस्था भी है, संस्कृति के रूप में सामाजिक प्रतीक भी है और साहित्य के रूप में वह एक जातीय परंपरा भी है. “ ( उपर्युक्त, पृष्ठ- 12)

रवीन्द्रनाथ श्रीवास्तव ने हिन्दी के सवाल को भारतीय सांस्कृतिक एवं सामाजिक प्रश्न से जोडकर देखने की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए कहा है, “ हम अपनी सामाजिक अस्मिता को पहचानें और इस संदर्भ में भाषाई अस्मिता के सवाल पर एक बार फिर गौर करें. अगर हिन्दी –उर्दू भाषा आम जनता के लिए एक है तो इसी कारण कि वह शैक्षणिक स्तर पर बनाए गए कृत्रिम विभाजन को स्वीकार नहीं करती. वह हिन्दी और उर्दू की अपनी मूल संरचना, प्रकृति और नियमों के आधार पर भाषा का प्रयोग करती है और इस दृष्टि से हिन्दी और उर्दू एक भाषा, एक जबान ठहरती है. इस एक जबान को बोलने वालों में न कोई भेद- भाव है और न सामाजिक अस्मिता के धरातल पर कोई दुराव. “ ( सामाजिक अस्मिता और हिन्दी –उर्दू का सवाल, पृष्ठ- 40-41)

उनके भाषा चिन्तन के बारे में प्रो. दिलीप सिंह ने लिखा है, “ उनका संपूर्ण लेखन उनके भाषानुरागी मन का स्वच्छ चमकीला प्रतिबिम्ब है. उनके लेखन के साथ चलना पूर्व और पश्चिम के भाषा चिन्तन की सधी रज्जु पर चलना है. अपनी संपूर्ण सजग चेतना के साथ. इस चेतना के बिना उनके लेखन की गहराई को माप पाना सहज नहीं है. “ ( वे भाषा के अनुरागी थे, दिलीप सिंह, पूर्णकुंभ, सितंबर 1996, रवीन्द्रनाथ श्रीवास्तव स्मृति ग्रंथ, पृष्ठ-33)

अंग्रेजी भाषा में भी उनकी अनेक पुस्तकें प्रकाशित हैं जिनमें ‘लिटरेसी’, ‘स्टाइलिस्टिक्स’, ‘मल्टीलिंगुअलिज्म’, ‘अप्लॉयड लिंग्विस्टिक्स’, ‘हिन्दी लिंग्विस्टिक्स’, ‘लैंग्वेज थियरी एंड लैंग्वेज स्ट्रक्चर’ तथा ‘जेनेरेटिव फोनोलॉजी’ आदि प्रमुख हैं.

 जन्मदिन के अवसर पर हम उनके महान योगदान का स्मरण करते हैं और उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करते हैं।

( किसी मित्र के पास यदि रवीन्द्रनाथ श्रीवास्तव की तस्वीर हो तो कृपया उपलब्ध करा दें.)