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Tuesday, April 28, 2026

हिंदी में प्रेरणार्थीकरण (Causativization)

हिंदी में प्रेरणार्थीकरण (Causativization)

हिंदी में प्रेरणार्थीकरण (Causativization) वह प्रक्रिया है, जिसमें कर्ता स्वयं कार्य न करके किसी अन्य से वह कार्य करवाता है। यानी वाक्य में “काम करवाने” का भाव होता है।

 परिभाषा

जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति से कार्य करवाता है, तो उस क्रिया के रूप को प्रेरणार्थक क्रिया कहते हैं।

👉 सामान्य क्रिया → स्वयं कार्य करना

👉 प्रेरणार्थक क्रिया → किसी से कार्य करवाना

 उदाहरण -

साधारण वाक्य                   प्रेरणार्थक वाक्य

राम किताब पढ़ता है            राम मोहन से किताब पढ़वाता है

सीता खाना बनाती है           सीता नौकर से खाना बनवाती है

बच्चा लिखता है                  शिक्षक बच्चे से लिखवाता है

प्रेरणार्थीकरण के प्रकार

1. प्रथम प्रेरणार्थक (Simple Causative)

कर्ता सीधे किसी से काम करवाता है

उदाहरण:

पढ़ना → पढ़ाना

लिखना → लिखाना

2. द्वितीय प्रेरणार्थक (Double Causative)

कर्ता किसी तीसरे व्यक्ति के माध्यम से काम करवाता है

उदाहरण:

पढ़ना → पढ़वाना

लिखना → लिखवाना

क्रिया रूपांतरण के उदाहरण

मूल क्रिया        प्रथम प्रेरणार्थक     द्वितीय प्रेरणार्थक

बैठना              बैठाना                  बैठवाना

खाना              खिलाना                खिलवाना

पीना               पिलाना                 पिलवाना

करना              कराना                   करवाना 

अंग्रेजी से व्यतिरेक :

हिंदी के सापेक्ष अंग्रेजी की व्यवस्था को देखा जाए तो उसमें प्रेरणार्थीकरण की व्यवस्था नहीं पाई जाती। वहाँ पर कुछ सहायक क्रियाओं के माध्यम से इस प्रकार के वाक्य बनाए जाते हैं। अतः दोनों की संरचना में भिन्नता को निम्नलिखित प्रकार से देख सकते हैं- 

हिंदी में प्रेरणार्थीकरण रूपात्मक (morphological) होता है—यानी क्रिया के रूप में बदलाव होता है।
अंग्रेज़ी में यह अधिकतर वाक्यगत (syntactic) होता है—यानी अलग सहायक क्रियाओं (make, have, get) का प्रयोग किया जाता है।

उदाहरण :

  • हिंदी: लिखना → लिखाना → लिखवाना
  • English: write → make someone write / have someone write

संरचना (Structure)

(A) हिंदी संरचना

कर्ता + कार्यकर्ता + से + कर्म + प्रेरणार्थक क्रिया

उदाहरण:

  • राम मोहन से पत्र लिखवाता है

(B) अंग्रेज़ी संरचना

Subject + causative verb + object + base verb

उदाहरण:

  • Ram makes Mohan write a letter.
  • Ram has Mohan write a letter.

संक्षेप में- 

व्यतिरेक हिंदीअंग्रेज़ी
प्रकार        रूपात्मक (Morphological)            वाक्यगत (Syntactic)
क्रिया परिवर्तन            हाँ (जैसे -आना, -वाना)            नहीं (मुख्य क्रिया वही रहती है)
सहायक क्रिया                    नहीं                make, have, get


उदाहरण 1

  • हिंदी: सीता खाना बनाती है (स्वयं)
  • हिंदी (प्रेरणार्थक): सीता नौकर से खाना बनवाती है
  • English: Sita cooks food.
  • English (causative): Sita gets the servant to cook food.

उदाहरण 2

  • हिंदी: शिक्षक बच्चे से उत्तर लिखवाता है
  • English: The teacher makes the child write the answer

उदाहरण 3

  • हिंदी: माँ बच्चे को दूध पिलाती है
  • English: The mother makes the child drink milk



Friday, March 27, 2026

01 year Blog report : 2026

 



Monday, March 23, 2026

भाषा नियोजन क्या है? (What is Language Planning)

 


 भाषा नियोजन (Language Planning)

 किसी ‘क्षेत्र’ की एक या एकाधिक भाषाओं के प्रकार्यसंरचना एवं भाषा अर्जन या अधिगम हेतु किया जाने वाला नियोजन भाषा नियोजन कहलाता है। यहाँ ‘क्षेत्र’ से तात्पर्य भाषायी समाजदेश का एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र आदि से है। नियोजन का अर्थ है- ‘योजनाबद्ध ढंग से प्रभावित करना। चूँकि इसमें लिए जाने वाले निर्णय विशाल जनसंख्या को प्रभावित करते हैंइस कारण प्रायः यह कार्य सरकार द्वारा किया जाता हैकिंतु साथ ही इसमें अनेक सरकारी/ गैर-सरकारी संस्थाएँ एवं व्यक्ति भी सहभागी होते हैं। इसमें सहभागी होने वाले लोगों के लिए भाषाविज्ञान या समाजभाषाविज्ञान का ज्ञान आवश्यक होता है। यद्यपि अन्य प्रकार के लोग भी इसमें सहभागी होते हैंकिंतु भाषाओं की स्थिति और प्रकार्य के निर्धारण में समाजभाषावैज्ञानिकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती हैक्योंकि वे द्विभाषिकताबहुभाषिकता,  भाषाद्वैतभाषा विस्थापनभाषा निष्ठाभाषा संरक्षण आदि संबंधी स्थितियों से भली-भाँति परिचित होते हैं।

भाषा-नियोजन के अंतर्गत मुख्य रूप से निम्नलिखित कार्य आते हैं-

(1) स्थिति नियोजन (Status planning)- जब किसी भाषायी समाज में एक से अधिक भाषाओं का व्यवहार होता हैतो यह निर्धारित करना कि किस भाषा का प्रयोग किस प्रयोजन के लिए होगास्थिति नियोजन के अंतर्गत आता है। इसमें हम केवल प्रयोजन का ही निर्धारण नहीं करते हैंबल्कि उन भाषाओं के प्रयोग की स्थितियों का निर्धारण करते हैं। उदाहरण के लिए हिंदी भाषी समाज में ‘हिंदी’ और ‘अंग्रेजी’ के संदर्भ में स्थितियों का निर्धारण किया गया है। जैसे उच्च न्यायालय एवं उच्चतम न्यायालय की मूल भाषा ‘अंग्रेजी’ होगी तथा आवश्यकतानुसार कहीं-कहीं ‘हिंदी’ के प्रयोग की अनुमति है। यह विधि के क्षेत्र में इन भाषाओं की स्थिति का निर्धारण है।

इसी प्रकार किसी देश की राजभाषा का निर्धारणराष्ट्रभाषा की स्थिति पर विचारकिसी भाषा की लिपि का निर्धारण/विकास आदि संबंधी कार्य भी इसके अंतर्गत आते हैं। हिंदी अंग्रेजी और अन्य भारतीय भाषाओं की स्थिति के निर्धारण के संबंध में राजभाषा अधिनियम 1976 के अंतर्गत भारत सरकार द्वारा किए गए प्रावधानों को निम्नलिखित लिंक पर ‘15.6.2 संपर्क भाषा’ शीर्षक के अंतर्गत देखा जा सकता है-

 हिंदी का अधुनिक विकास और संवैधानिक स्थिति

(2) कॉर्पस नियोजन (Corpus planning)- तकनीकी रूप से किसी भाषा के वास्तविक व्यवहार से संकलित पाठों का विशाल संग्रह कार्पस कहलाता है। पाठों का यह संग्रह इतना विशाल और इतना वैविध्यपूर्ण होता है कि उसमें उस भाषा के व्यवहार के सभी प्रयोग क्षेत्रउनकी प्रयुक्तियाँ (registers),  शब्दावली तथा विविध प्रकार की वाक्य रचनाएँ आदि सभी का समावेश हो जाता है। किंतु हम जानते हैं कि भाषा निरंतर परिवर्तनशील एवं विकासशील इकाई है। अतः समय के साथ नये शब्दोंअभिव्यक्तियों का सृजन आदि होता ही रहता है। अतः उसके लिए आवश्यक शब्दावलीअभिव्यक्ति रूपों तथा भाषा के मानक रूप का निर्माणजैसे- वर्तनी और व्याकरणशब्दकोश निर्माणभाषायी शुद्धता बनाए रखने संबंधी कार्य आदि कार्पस नियोजन के अंतर्गत आते हैं।

हिंदी के संदर्भ में देखा जाए तो भारत सरकार द्वारा केंद्रीय हिंदी निदेशालय के अंतर्गत वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली निर्माण आयोग को मानक हिंदी वर्तनी तथा शब्दावली के विकास का कार्य दिया गया है। आयोग द्वारा समय-समय पर मानक हिंदी वर्तनी संबंधी पुस्तिका का प्रकाशन किया जाता है इनमें से 2016 में प्रकाशित मानक हिंदी वर्तनी संबंधी पुस्तिका को इस लिंक पर देख सकते हैं-

https://lgandlt.blogspot.com/2020/08/2016.html

(3) अर्जन नियोजन (Acquisition planning)- मानव शिशु जन्म के पश्चात अपने परिवार और परिवेश में प्राप्त भाषा को सीखता हैजिसे उसकी मातृभाषा कहते हैंकिंतु जब उस समाज में एक से अधिक भाषाओं का प्रयोग होता है या हो रहा होता हैतो ऐसी स्थिति में उसके प्राथमिक शिक्षण के दौरान कौन-सी भाषा का किस रूप में शिक्षण किया जाए तथा किस भाषा के माध्यम से शिक्षण प्रक्रिया संपन्न की जाएआदि इसके अंतर्गत आते हैं।

 अतः इसमें प्रथम भाषा का शिक्षणद्वितीय भाषा का शिक्षणशिक्षण की माध्यम भाषा का निर्धारण आदि संबंधी बिंदु आते हैं। उदाहरण के लिए भारतीय समाज में अंग्रेजी का प्रभुत्व धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है। इस कारण अब माता-पिता प्रारंभ से ही बच्चों को अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में प्रवेश दिलाते हैंकिंतु विभिन्न शोधों द्वारा स्पष्ट हुआ है कि कोई भी बच्चा अपनी मातृभाषा में ही अपना सर्वोत्तम विकास कर सकता है।

 इसे ध्यान में रखते हुए भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 जारी की गई हैजिसमें बच्चों को प्राथमिक शिक्षा उनकी मातृभाषा में ही दिए जाने पर बल दिया गया है। यह भाषा अर्जन संबंधी नियोजन का एक उपयुक्त उदाहरण है ।

भाषा नियोजन के लक्ष्य

भाषा नियोजन के निम्नलिखित लक्ष्य हैं-

§  भाषा शुद्धि 

§  भाषा पुनरुद्धार के भीतर से विचलन

§  भाषा सुधार

§  भाषा एकीकरण

§  भाषा के बोलने वालों की संख्या बढ़ाने का प्रयास

§  शब्दकोशीय समृद्धि

§  शब्दावली एकीकरण

§  लेखन शैली सरलीकरण

§  अंतरभाषायी संप्रेषण

§  भाषा संरक्षण

§  सहायक-कोड विकास (मूक बधिरों आदि के लिए)