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Monday, April 10, 2023

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Saturday, April 1, 2023

हिंदी भाषा की संरचना (Structure of Hindi Language)

 हिंदी भाषा की संरचना (Structure of Hindi Language)

 हिंदी एक आधुनिक भारतीय आर्य भाषा है। अन्य भाषाओं की तरह हिंदी के भी सभी स्तरों पर विश्लेषण का भाषा वैज्ञानिक नियमों का निर्माण किया जा सकता है दूसरे शब्दों में हिंदी में भी विविध भाषिक स्तरों पर संरचना देखी जा सकती है उन सभी को समेकित रूप से हिंदी भाषा की संरचना के रूप में जानते हैं।  भाषा और भाषा संरचना के संबंध में निम्नलिखित लिंक पर संक्षिप्त चर्चा की गई है जहां इसे विस्तार से पढ़ा जा सकता है-

§  भाषा और भाषा संरचना

 इसमें बताए गए भाषा के स्तरों और उनकी संरचना की दृष्टि से विचार किया जाए तो हिंदी भाषा की संरचना के अंतर्गत भी सभी स्तर आते हैं, जिनका वर्णन निम्नलिखित शीर्षकों के अंतर्गत किया जा सकता है -

संरचना के मूल स्तर 

§  हिंदी की शब्द संरचना

§  हिंदी की पद संरचना

§  हिंदी की पदबंध संरचना

§  हिंदी की वाक्य संरचना 

§  [हिंदी की उपवाक्य संरचना]

 संरचना के अतिरिक्त स्तर 

§  हिंदी की ध्वनि संरचना

§  हिंदी की अर्थ संरचना

§  हिंदी की प्रोक्ति संरचना

 इनमें से हाइपरलिंक किए गए शीर्षकों को क्लिक करके विस्तार से पढ़ सकते हैं। 

एक व्यवस्था के रूप में भाषा (Language as a System)

 एक व्यवस्था के रूप में भाषा (Language as a System) 

प्रत्येक भाषा एक बहुस्तरीय व्यवस्था होती है, जिसमें 'स्वनिम से लेकर प्रोक्ति' तक विविध इकाइयां पाई जाती हैं। भाषाविज्ञान में इन इकाइयों की चर्चा निम्नलिखित स्तरों के अंतर्गत की जाती है-

स्वनिम- रूपिम - शब्द/पद - पदबंध - उपवाक्य - वाक्य - प्रोक्ति - अर्थ

 इन स्तरों के गठन दृष्टि से निम्नलिखित उपव्यवस्थाएँ पाई जाती हैं-

जब हम किसी भाषा की संरचना की बात करते हैं, तो उपयुक्त स्तरों और उपव्यवस्थाओं में से केवल उन स्तरों को चुनते हैं, जिनकी संरचना के स्पष्ट नियम दिए जा सकते हैं अथवा व्यवस्थित विवेचन किया जा सकता है। आगे 'भाषा और संरचना' शीर्षक के अंतर्गत इन्हें संक्षेप में समझते हैं।

भाषा और संरचना (Language and Structure)

 पृष्ठभूमि- 

इसकी पृष्ठभूमि को ठीक से समझने के लिए एक व्यवस्था के रूप में भाषा शीर्षक के बारे में निम्नलिखित लिंक पर विस्तार से पढ़ें -

एक व्यवस्था के रूप में भाषा

अब मूल विषय पर आते हैं -

भाषा और संरचना

जब कोई वस्तु एक से अधिक इकाइयों से कुछ नियमों के माध्यम से निर्मित होती है तो उन नियमों और घटकों की खोज 'संरचना' के रूप में की जाती है। अर्थात किसी निर्मित वस्तु में प्रयुक्त होने वाली इकाइयों और उनके नियमों की व्यवस्था का वर्णन संरचना कहलाता है। यहाँ संरचना के संबंध में एक बात स्पष्ट है कि संरचना उन्हीं चीजों की हो सकती है जिनका निर्माण एक से अधिक घटकों से हुआ हो। इस संदर्भ में भाषा को देखा जाए तो भाषा  एक बहुस्तरीय व्यवस्था है। इसके सबसे छोटे स्तर के अलावा शेष सभी स्तरों पर एक से अधिक इकाइयों का योग होता है, अतः उनकी संरचना ज्ञात की जा सकती है। 

हम जानते हैं कि भाषा के मूलता दो पक्ष हैं- ध्वनि और  अर्थ। एक व्यवस्था के रूप में भाषा इन दोनों को जोड़ने का कार्य करती है। यह कार्य भाषा द्वारा विविध स्तरों पर संपन्न किया जाता है जिनकी चर्चा ऊपर 'एक व्यवस्था के रूप में भाषा' शीर्षक के अंतर्गत की जा चुकी है। उनमें से निम्नलिखित स्तरों की संरचना देखी जाती है-

 शब्द संरचना

 पद संरचना

 पदबंध संरचना

 वाक्य संरचना 

भाषिक इकाइयों और नियमों की व्यवस्था के रूप में आधारभूत रूप से 'ध्वनि, अर्थ और प्रोक्ति' की संरचना जैसी बात नहीं की जाती।  इन तीनों  की संरचना का विश्लेषण नहीं करने के कारण इस प्रकार दिए जा सकते हैं-

 ध्वनि भाषा की सबसे छोटी इकाई है। अतः इसकी संरचना के विश्लेषण की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है कि उसी वस्तु या इकाई की संरचना का विश्लेषण किया जा सकता है, जिसका निर्माण उसे छोटे घटकों से हुआ हो। किसी भाषा की ध्वनि व्यवस्था का विश्लेषण किया जा सकता है, जिसे सामान्यतः 'ध्वनि संरचना' नाम दे दिया जाता है। उदाहरण के लिए 'हिंदी की ध्वनि संरचना' नाम से कहीं कोई सामग्री प्राप्त होती है तो उसे हम 'हिंदी की ध्वनि व्यवस्था' के रूप में समझ सकते हैं।

अर्थ भी कोई ऐसी चीज नहीं है जिसका निर्माण एक से अधिक छोटे घटकों के योग से हुआ हो, बल्कि अर्थ के स्तर पर विविध प्रकार के प्रतीकों की व्यवस्था काम करती है, जिसे हम 'आर्थी व्यवस्था' नाम दे सकते हैं, किंतु कहीं-कहीं उसके लिए अर्थ संरचना शब्द भी चलता है। उदाहरण के लिए 'हिंदी की अर्थ संरचना' नाम से कहीं कोई सामग्री प्राप्त होती है तो उसे हम 'हिंदी की आर्थी व्यवस्था' के रूप में समझ सकते हैं।

प्रोक्ति की संरचना संभव है, किंतु अभी तक प्रोक्ति संरचना का वस्तुनिष्ठ विश्लेषण करते हुए उसके रचक घटकों और उनके नियमों की खोज नहीं की जा सकी है। अतः प्रोक्ति संरचना जैसी बात अभी नहीं की जा सकती।

इस प्रकार स्पष्ट है कि उपर्युक्त तीनों की संरचना संबंधी पक्ष भाषा संरचना संबंधी विवेचन का अंग नहीं है, फिर भी व्यवस्था के संदर्भ में इन तीनों की संरचना संबंधी वर्णन भी कहीं-कहीं देखने को मिल जाता है। अतः इन तीनों को भी जोड़ दिया जाए तो भाषा संरचना की बात निम्नलिखित स्तरों पर की जा सकती है-

संरचना के मूलभूत स्तर

 शब्द संरचना

 पद संरचना

 पदबंध संरचना

 वाक्य संरचना 

 संरचना के अतिरिक्त स्तर 

ध्वनि संरचना

अर्थ संरचना

प्रोक्ति संरचना

हिंदी की शब्द संरचना (Structure of Word in Hindi)

हिंदी की शब्द संरचना (Lexical Word Structure of Hindi)

हिंदी की शब्द संरचना के अंतर्गत निम्नलिखित शीर्षक आ सकते हैं-

रचना की दृष्टि से शब्द के प्रकार 

उपसर्ग

प्रत्यय

संधि

समास 

पुनरुक्ति

शब्द निर्माण की विधियाँ

स्त्रीलिंग और पुल्लिंग (संज्ञा) शब्दों की संरचना 

क्रिया संरचना (अकर्मकसकर्मकव्युत्पन्न अकर्मक तथा प्रेरणार्थक)

शब्द निर्माण और शब्दभेद (POS) परिवर्तन 

कोशिम और शब्द (Lexeme and Word)

इनमें से किसी के भी बारे में जानने के लिए उपर्युक्त सूची में से उसे क्लिक करें।


रचना की दृष्टि से शब्द के प्रकार

 रचना की दृष्टि से शब्द के प्रकार 

शब्द संरचना से तात्पर्य है- किसी शब्द में लगे हुए घटकों तथा उनके परस्पर संयोजन संबंधी नियमों तथा स्थितियों का ज्ञान। इस दृष्टि से विचार किया जाए तो किसी भी भाषा में पाए जाने वाले शब्दों के मूलतः दो भेद किए जा सकते हैं-

§  मूल शब्द

§  निर्मित शब्द

आगे हिंदी के संदर्भ में इन्हें संक्षेप में देखते हैं- 

(क) मूल शब्द (Root word)

वे शब्द जिनके और अधिक सार्थक खंड नहीं किए जा सकते, मूल शब्द कहलाते हैं। अर्थात ऐसे शब्दों का विश्लेषण शब्द रचना की दृष्टि से नहीं किया जा सकता, उनमें आई हुई ध्वनियों के विश्लेषण की दृष्टि से किया जा सकता है। इस प्रकार के शब्द केवल ध्वनियों के संयोजन से बने होते हैं। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो ऐसे शब्दों में उपसर्ग, प्रत्यय आदि किसी भी प्रकार के सार्थक खंड का योग नहीं होता, जैसे- घर, राष्ट्र, देश, लड़का, आम, अच्छा, खेल, जा, बैठ, दूर, पास आदि।

पारंपरिक शब्द भेदों के वर्गीकरण की दृष्टि से विचार किया जाए तो मूल शब्द के अंतर्गत निम्नलिखित दो प्रकार के शब्द आते हैं-

 धातु =  क्रियाओं के मूल रूप

 प्रातिपदिक =  अन्य शब्द वर्गों के शब्दों के मूल रूप 

(ख) निर्मित शब्द (Derived/Generated Word)

वे शब्द जो मूल शब्दों में उपसर्ग, प्रत्यय आदि जोड़कर, एक से अधिक मूल शब्दों के योग से अथवा किसी भी शब्द निर्माण विधि से बने होते हैं, निर्मित शब्द कहलाते हैं, जैसे-

घर से घरेलू

राष्ट्र से राष्ट्रीय

लड़का से लड़कपन

अच्छा से अच्छाई

दूर से दूरी                              आदि

अतः उपर्युक्त दोनों प्रकार के शब्दों की संरचना को सूत्र रूप में इस प्रकार से दर्शा सकते हैं- 

मूल शब्द = स्वनिम + स्वनिम + ....

                (निरर्थक) + (निरर्थक) + ....

'मूल शब्दों' में सार्थक घटक नहीं होते, अतः उनकी संरचना की बात नहीं की जाती। उनकी स्वनिमिक संरचना देखी जा सकती है, जो स्वनिमविज्ञान से जुड़ा पक्ष है। शब्द संरचना की बात तभी आती है, जब उसमें एक से अधिक सार्थक खंडों का योग हो।

निर्मित शब्द = शब्द + उपसर्ग/प्रत्यय/शब्द + .....

               (सार्थक) + सार्थक + .....

इन शब्दों का रचना की दृष्टि से विश्लेषण किया जा सकता है तथा इनमें आए हुए मूल शब्द और उपसर्ग/ प्रत्यय अथवा एक से अधिक मूल शब्दों को अलग-अलग किया जा सकता है।

अतः शब्द संरचना या विश्लेषण की दृष्टि से देखा जाए तो मूल शब्दों का विश्लेषण नहीं किया जाता, बल्कि किसी भाषा को सीखने की दृष्टि से केवल उन्हें याद किया जाता है। शब्द संरचना विश्लेषण की दृष्टि से निर्मित शब्दों का विश्लेषण किया जा सकता है, जिसके लिए हमें शब्द निर्माण की विधियों का ज्ञान होना आवश्यक है।

शब्द निर्माण की विधियों के बारे में निम्नलिखित लिंक पर पढ़ें-

रचना की दृष्टि से शब्द के प्रकार

पुनरुक्ति (Reduplication)

 पुनरुक्ति

एक ही शब्द का एक से अधिक बार (सामान्यतः दो बार) प्रयोग करके उससे दूसरे प्रकार का शब्द बनाना पुनरुक्ति कहलाता हैजैसे -

 वह घर-घर गया। (घर-घर)

 जो भी अच्छा-बुरा होगादेखा जाएगा। (अच्छा-बुरा)

  पुनरुक्ति के दो प्रकार किए जाते हैं-

(क) पूर्ण पुनरुक्ति :  

जब पूरा शब्द दो बार प्रयुक्त होता है तो उसे पूर्ण पुनरुक्ति कहते हैंजैसे- घर-घरबार-बारथोड़ा-थोड़ादेखते-देखते आदि।

पूर्ण पुनरुक्ति का एक प्रकार समान अर्थ रखने वाले सार्थक शब्दों का प्रयोग करके पुनरुक्त शब्द बनाना भी हैजैसे- घर-बारसाथ-संगतबाग-बगीचा आदि।

इसका दूसरा प्रकार विलोम शब्दों का प्रयोग करके पुनरुक्त शब्द बनाना हैजैसे- दिन-रातइधर-उधरऊपर-नीचे आदि।

(नोट- जब किसी शब्द की पूर्ण पुनरुक्ति होती है तो दोनों के बीच में डैश का प्रयोग किया जाता है।)

(ख) आंशिक पुनरुक्ति :  

जब पहला शब्द सार्थक होता है और दूसरा शब्द उसी शब्द की पहली ध्वनि के स्थान पर 'या 'आदि का प्रयोग करते हुए निर्मित निरर्थक शब्द होता हैतो ऐसी पुनरुक्ति को आंशिक पुनरुक्ति कहते हैंजैसे- चाय-वायघर-वरकमरा-समराचाय-साय आदि।

पुनरुक्त शब्दों के अंतर्गत प्रतिध्वन्यात्मक शब्द (Onomatopoeic words) भी आते हैं, जिनकी परिभाषा इस प्रकार से दी जा सकती है-

बाह्य संसार में होने वाली ध्वनियों का अनुकरण करते हुए निर्मित किए जाने वाले शब्द प्रतिध्वन्यात्मक शब्द (Onomatopoeic words) कहलाते हैं। उदाहरण :

हिंदी :

 धाँयभौं-भौंठक-ठक, चट-चट, म्याऊँ-म्याऊँ, सी-सी, पों-पों आदि। 

अंग्रेजी :

Boom, Buzz, Clang, Click,  Fizz, Hiccup/Hiccough.        आदि।

स्त्रीलिंग और पुल्लिंग शब्दों की संरचना (Structure of Masculine and Feminine Words)

 स्त्रीलिंग और पुल्लिंग शब्दों की संरचना 

हिंदी में केवल दो लिंग पाए जाते हैं- पुल्लिंग और स्त्रीलिंग। हिंदी में प्रयुक्त सभी संज्ञा शब्दों का इन्हीं 02 लिंगों में वर्गीकरण किया जाता है। ऐसी स्थिति में एक नए भाषाभाषी के लिए शब्दों के लिंग को पहचानना कठिन कार्य होता है। वैसे तो शब्दों के लिंग निर्धारण का कोई सुस्पष्ट नियम नहीं है, किंतु फिर भी व्यवहार से और कुछ भाषिक नियमों की सहायता से सरलतापूर्वक  हिंदी में शब्दों के लिंग की पहचान की जा सकती है। 

 हिंदी में  प्रयुक्त होने वाले अधिकांश शब्दों के लिंग को समझने के लिए हमें सबसे पहले रचना की दृष्टि से शब्द के प्रकारों को देखना होगा। रचना की दृष्टि से शब्द दो प्रकार के होते हैं-

 मूल तथा निर्मित

 इनमें से मूल शब्दों की के लिंग का निर्धारण मुख्यतः व्यवहार केंद्रित होता है, किंतु निर्मित शब्दों का लिंग उनमें लगे हुए प्रत्ययों के आधार पर समझा जा सकता है। इसे विस्तार से पढ़ने के लिए निम्नलिखित लिंक पर जाएं-

हिंदी में लिंग निर्धारण : एक व्यावहारिक दृष्टि

शब्द निर्माण और शब्दभेद परिवर्तन (Derivation and PoS Change)

 शब्द निर्माण और शब्दभेद (POS) परिवर्तन 

हिंदी में शब्द निर्माण के मुख्यतः तीन विधियां हैं-

 उपसर्ग योग

  प्रत्यय योग

 उपसर्ग एवं प्रत्यय योग

 समास एक से अधिक शब्दों का योग

 इनमें से किसी भी विधि (मुख्यतः उपसर्ग और प्रत्यय योग) के माध्यम से जब नए शब्दों का निर्माण किया जाता है, तो सामान्यतः उनके शब्दभेद में परिवर्तन हो जाता है। इसे हम निम्नलिखित  प्रकार से उपशीर्षकों में बाँटकर कुछ उदाहरणों के साथ प्रस्तुत कर सकते हैं-

संज्ञा से विशेषण

शेष से विशेष

प्यार से प्यारा

घर से घरेलू 

बात से बातूनी

संज्ञा से क्रिया

लात से लतियाना

बात से बतियाना

संज्ञा से क्रियाविशेषण

 घर से घर घर

 विशेषण से संज्ञा

 अच्छा से अच्छाई

 सुंदर से सुंदरता

 विशेषण से क्रिया

 नरम से नरमाना

 गर्म से गरमाना

 विशेषण से क्रिया विशेषण

कम से कमतर

अधिक से अधिकाधिक 

क्रिया से संज्ञा

 पूजना से पूजा

 खेलना से खेल

 चलना से चाल

उठाना और पटकना से उठा पटक

क्रिया से विशेषण

पूजना से पूजनीय

मोहना से मोहक

क्रिया से क्रिया विशेषण

 ....

क्रियाविशेषण से संज्ञा

 दूर से दूरी

 नजदीक से नजदीकी

क्रियाविशेषण से विशेषण ....

हिंदी की पद (रूप) संरचना (Pad (Morph) Structure of Hindi)

 हिंदी की पद (रूप) संरचना (Pad (Morph) Structure of Hindi)

किसी भी भाषा की पद संरचना या रूप संरचना से तात्पर्य है- उस भाषा में मूल शब्दों को व्यवस्थित रूप से जानना तथा यह भी जानना कि उन शब्दों से उनके शब्द रूपों का निर्माण कैसे होता है? साथ ही पद संरचना के अंतर्गत हम यह भी देख सकते हैं कि उन शब्दों और शब्द रूपों का वाक्य में व्यवहार किस प्रकार से होता है? अतः पद संरचना या रूप संरचना के अंतर्गत निम्नलिखित बिंदुओं का समावेश किया जाता है-

पद क्या है

शब्द और पद

शब्द और शब्दरूप

पद संरचना और रूप संरचना

व्याकरणिक कोटियाँ

विकारी और अविकारी शब्दवर्ग या शब्दभेद

 संज्ञा शब्दों की  पद (रूप) संरचना

 सर्वनाम शब्दों की पद (रूप) संरचना

 क्रिया शब्दों की पद (रूप) संरचना

 विशेषण शब्दों की पद (रूप) संरचना 

 अन्य शब्दों की पद (रूप) संरचना 

उपर्युक्त सभी  शीर्षकों में से किसी को भी के बारे में पढ़ने के लिए उनमें से किसी को भी क्लिक करें।

पद संरचना और रूप संरचना (Morph. Structure)

पद क्या है ? (What is Syntactic Word?)

 पद क्या है ?

पद की सबसे सरल परिभाषा इस प्रकार से दी जाती है-

वाक्य में प्रयुक्त होने वाले शब्द और शब्दरूप पद कहलाते हैं।

शब्द को किसी भाषा की कोशीय इकाई कहा गया है। अर्थात शब्द किसी भी भाषा की वह इकाई है, जो स्वतंत्र रूप से अर्थ को धारण करती है, तथा जिसका संकलन कोश में किया जाता है। ये शब्द जब वाक्य में प्रयुक्त होते हैं, तो पद बन जाते हैं अथवा पद कहलाने लगते हैं। शब्दों के वाक्य में प्रयोग होने की स्थितियों को देखा जाए, तो शब्द दो प्रकार से वाक्य में प्रयुक्त होते हैं-

(क) अपने मूल/कोशीय (lexical) रूप में

(ख)‌ अपने रूपसाधित (inflected) रूप में

अतः इन दोनों ही रूपों में शब्दों का वाक्य में किया जाने वाला प्रयोग पद कहलाता है। पद को चित्र रूप में इस प्रकार से दर्शा सकते हैं -

इन दोनों स्थितियों को सूत्र रूप में इस प्रकार से दर्शा सकते हैं -

(क) पद = मूल/कोशीय शब्द (lexical word) 

इसके अंतर्गत  वे शब्द आते हैं, अपने मूल/कोशीय (lexical) रूप में ही वाक्य में प्रयुक्त हो जाते हैं।

उदाहरण :

राम घर जा ।

 इस वाक्य में हम देख सकते हैं कि इसमें 03 शब्दों 'राम, घर, जा' का प्रयोग हुआ है ये तीनों ही मूल या कोशीय शब्द हैं। चूँकि इनका प्रयोग वाक्य में हुआ है, अतः ये पद भी हैं।

(ख) पद = शब्द रूप (inflected word)

इसके अंतर्गत शब्दों के वे रूपसाधित रूप आते हैं जिनका निर्माण विविध प्रकार की व्याकरणिक कोठियों से संबंधित सूचनाओं में परिवर्तन हेतु किया जाता है।

उदाहरण:

लड़कों की बातें मानी गईं।

इस वाक्य में आए हुए पदों का विश्लेषण इस प्रकार से कर सकते हैं-

शब्द रूप       मूल शब्द           शब्द में किया गया परिवर्तन (रूपसाधन/पदसाधन)

लड़कों          लड़का              बहुवचन, परसर्गीय रूप निर्माण     

की                 का                   स्त्रीलिंग रूप निर्माण

बातें               बात                   बहुवचन रुप निर्माण 

मानी                मानना             स्त्रीलिंग पूर्णकालिक रूप निर्माण

 गई                 जाना              बहुवचन स्त्रीलिंग पूर्णकालिक रूप निर्माण

 अतः ऊपर खंड '' के अंतर्गत बताए गए 'मूल शब्द' भी पद हैं, तथा खंड '' के अंतर्गत बताए गए शब्दरूप भी पद हैं। इस प्रकार स्पष्ट है कि वाक्य में प्रयुक्त होने वाले शब्द 'पद' कहलाते हैं चाहे वे अपने मूल या कोशीय रूप में हों अथवा अपने रूपसाधित रूप में।

शब्द और शब्दरूप (Word and Wordform/ Inflected Word)

शब्द और शब्दरूप

शब्द (word)

शब्द के अंतर्गत किसी भी भाषा के वे सभी शब्द आते हैं, जिनका उस भाषा के भाषाभाषियों द्वारा व्यवहार किया जाता है। इन शब्दों का संकलन हम उस भाषा के शब्दकोश में करते हैं। वाक्य में इन शब्दों का प्रयोग तो होता ही है, इनके शब्दरूपों का भी प्रयोग होता है। शब्दरूपों की चर्चा आगे की गई है। बिना किसी रूप परिवर्तन के प्रयुक्त होने वाले शब्द कोशीय शब्द कहलाते हैं। उदाहरण:

 लड़का, कपड़ा, तुम, बोतल, आदमी, लड़की, धीरू, कलम, कंप्यूटर, खाना, उठना, चलना, अच्छा, सुंदर, दूर, पास, क्या, कौन आदि।

किसी भी भाषा में इनकी संख्या हजारों/ लाखों में होती है।

किंतु आधुनिक भाषाविज्ञान के अनुसार ध्यान रखने वाली बात है कि शब्द के अंतर्गत 'मूल शब्द' और 'शब्दरूप' दोनों आ जाते हैं। वे शब्द जो अपने मूल रूप में होते हैं तथा शब्दकोश में संकलित किए जाते हैं कोशिम (Lexeme) कहलाते हैं। इन्हें समझने के लिए निम्नलिखित लिंक पर जाएं -

कोशिम और शब्द (Lexeme and Word)

शब्द रूप (inflected word)

इसके अंतर्गत शब्दों के वे रूपसाधित रूप आते हैं जिनका निर्माण विविध प्रकार की व्याकरणिक कोठियों से संबंधित सूचनाओं में परिवर्तन हेतु किया जाता है।

उदाहरण:

लड़कों की बातें मानी गईं।

इस वाक्य में आए हुए पदों का विश्लेषण इस प्रकार से कर सकते हैं-

शब्द रूप       मूल शब्द           शब्द में किया गया परिवर्तन (रूपसाधन/पदसाधन)

लड़कों          लड़का              बहुवचन, परसर्गीय रूप निर्माण     

की                 का                   स्त्रीलिंग रूप निर्माण

बातें               बात                   बहुवचन रुप निर्माण 

मानी                मानना             स्त्रीलिंग पूर्णकालिक रूप निर्माण

 गई                 जाना              बहुवचन स्त्रीलिंग पूर्णकालिक रूप निर्माण

 अतः ऊपर खंड '' के अंतर्गत बताए गए 'मूल शब्द' भी पद हैं, तथा खंड '' के अंतर्गत बताए गए शब्दरूप भी पद हैं। इस प्रकार स्पष्ट है कि वाक्य में प्रयुक्त होने वाले शब्द 'पद' कहलाते हैं चाहे वे अपने मूल या कोशीय रूप में हों अथवा अपने रूपसाधित रूप में।

कोशिम और शब्द (Lexeme and Word)

 आधुनिक भाषाविज्ञान में शब्द की संकल्पना के साथ-साथ कोशिम की संकल्पना भी आई है जिसे अंग्रेजी में ‘Lexeme’ कहते हैं।आधुनिक भाषाविज्ञान के अनुसार शब्द के अंतर्गत 'मूल शब्द' और 'शब्दरूप' दोनों आ जाते हैं। वे शब्द जो अपने मूल रूप में होते हैं तथा शब्दकोश में संकलित किए जाते हैं कोशिम (Lexeme) कहलाते हैं। शब्द (word) के अंतर्गत किसी भी भाषा के वे सभी शब्द आते हैं, जिनका उस भाषा के भाषाभाषियों द्वारा व्यवहार किया जाता है। इसमें कोशिम और शब्द रूप दोनों आ जाते हैं। अतः इस दृष्टि के अनुसार शब्द को निम्नलिखित सूत्र के माध्यम से बता सकते हैं -

शब्द (word) = कोशिम (Lexeme) & शब्द रूप (inflected word)

यहां पर प्रयुक्त 'शब्द' की अवधारणा भारतीय परंपरा के अनुसार 'पद' का प्रतिनिधित्व करती है। इस पद या शब्दशब्द के अंतर्गत आने वाले वाली इन दोनों इकाइयों को इस प्रकार से परिभाषित कर सकते हैं-

कोशिम (Lexeme)

बिना किसी रूप परिवर्तन के प्रयुक्त होने वाले शब्द कोशीय शब्द कहलाते हैं। इनका संकलन उस भाषा के शब्दकोश में किया जाता है। ये शब्द अपने भाषा भाषियों के मस्तिष्क में अमूर्त रूप में होते हैं। उदाहरण:

 लड़का, कपड़ा, तुम, बोतल, आदमी, लड़की, धीरू, कलम, कंप्यूटर, खाना, उठना, चलना, अच्छा, सुंदर, दूर, पास, क्या, कौन आदि।

किसी भी भाषा में इनकी संख्या हजारों/ लाखों में होती है।

शब्द रूप (inflected word)

इसके अंतर्गत शब्दों के वे रूपसाधित रूप आते हैं जिनका निर्माण विविध प्रकार की व्याकरणिक कोठियों से संबंधित सूचनाओं में परिवर्तन हेतु किया जाता है।

उदाहरण:

लड़कों की बातें मानी गईं।

इस वाक्य में आए हुए पदों का विश्लेषण इस प्रकार से कर सकते हैं-

शब्द रूप       मूल शब्द           शब्द में किया गया परिवर्तन (रूपसाधन/पदसाधन)

लड़कों          लड़का              बहुवचन, परसर्गीय रूप निर्माण     

की                 का                   स्त्रीलिंग रूप निर्माण

बातें               बात                   बहुवचन रुप निर्माण 

मानी                मानना             स्त्रीलिंग पूर्णकालिक रूप निर्माण

 गई                 जाना              बहुवचन स्त्रीलिंग पूर्णकालिक रूप निर्माण

 अतः ऊपर खंड '' के अंतर्गत बताए गए 'मूल शब्द' भी पद हैं, तथा खंड '' के अंतर्गत बताए गए शब्दरूप भी पद हैं। इस प्रकार स्पष्ट है कि वाक्य में प्रयुक्त होने वाले शब्द 'पद' कहलाते हैं चाहे वे अपने मूल या कोशीय रूप में हों अथवा अपने रूपसाधित रूप में।