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Wednesday, July 31, 2024

व्यतिरेकी विश्लेषण (Contrastive Analysis) और त्रुटि विश्लेषण (Error Analysis)

व्यतिरेकी विश्लेषण वह कार्य है जिसमें दो भाषाओं की तुलना करते हुए उनके बीच प्राप्त होने वाली संरचनागत असमानताओं और समानताओं का विश्लेषण किया जाता है। इसका उद्देश्य भाषा शिक्षण अथवा अनुवाद संबंधी अनुप्रयोग होता है। दूसरे शब्दों में कहा जाए तो एक भाषा का द्वितीय भाषा के रूप में अथवा विदेशी भाषा के रूप में शिक्षण करने के लिए उस भाषा (L1) और शिक्षार्थी की मातृभाषा (L2) की संरचना में पाई जाने वाली भिन्नता और समानता को खोजने की प्रक्रिया व्यतिरेकी विश्लेषण कहलाती है।

इसे हिंदी भाषी द्वारा अंग्रेजी अर्जन के एक उदाहरण से समझते हैं-

हिंदी में Articles नहीं होते, जबकि अंग्रेज़ी में a, an, the का प्रयोग आवश्यक है।

·       Hindi: राम विद्यालय गया।

·       English: Ram went to the school. / Ram went to school.

हिंदीभाषी शिक्षार्थी अंग्रेज़ी में Articles के प्रयोग में त्रुटियाँ कर सकते हैं। व्यतिरेकी विश्लेषण इस कठिनाई का पूर्वानुमान करता है।

 

व्यतिरेकी विश्लेषण भाषा शिक्षण के लिए आवश्यक नियम और टूल्स प्रदान करता है किंतु अनेक विद्वानों द्वारा इस पद्धति की इस रूप में भी आलोचना की जाती है कि द्वितीय भाषा अर्जन अथवा विदेशी भाषा अर्जन में केवल दोनों भाषाओं के बीच प्राप्त होने वाली संरचनागत समानता और असमानता ही भाषा अधिगम में समस्या नहीं पैदा करती है बल्कि उसमें अन्य दूसरे भी अनेक कारण होते हैं। उन कारणों की खोज त्रुटि विश्लेषण के माध्यम से की जाती है। Stephen Pit Corder ने 1967 में त्रुटि विश्लेषण को व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत किया और यह बताया कि शिक्षार्थियों की त्रुटियाँ भाषा-अधिगम की प्रक्रिया को समझने का महत्वपूर्ण स्रोत हैं।

त्रुटि विश्लेषण की आवश्यकता को हिंदी भाषी द्वारा अंग्रेजी अर्जन के एक उदाहरण से समझते हैं-

एक हिंदीभाषी विद्यार्थी अंग्रेज़ी में लिखता है—

He go to school every day.

यहाँ त्रुटि go के स्थान पर goes के प्रयोग से संबंधित है। यह त्रुटि केवल मातृभाषा के प्रभाव से नहीं, बल्कि अंग्रेज़ी के नियमों के अपूर्ण अधिगम के कारण भी हो सकती है। त्रुटि विश्लेषण ऐसी वास्तविक त्रुटियों का अध्ययन करता है।

इस प्रकार स्पष्ट है कि 'व्यतिरेकी विश्लेषण' त्रुटि विश्लेषण से भी अपने आप को जोड़ता है। भाषा शिक्षण में हो रही कठिनाइयों को खोजने के लिए प्रयुक्त होने वाली ये दो प्रमुख विधियां है। दोनों की प्रविधि अलग है, किंतु लक्ष्य एक है। दोनों में अंतर को बिंदुवार निम्नलिखित प्रकार से दर्शा सकते हैं-

आधार

व्यतिरेकी विश्लेषण (Contrastive Analysis)

त्रुटि विश्लेषण (Error Analysis)

अध्ययन का आधार

दो भाषाओं की तुलना

शिक्षार्थी की वास्तविक त्रुटियाँ

उद्देश्य

संभावित कठिनाइयों का पूर्वानुमान

वास्तविक त्रुटियों के कारणों की पहचान

दृष्टिकोण

पूर्वानुमानात्मक (Predictive)

निदानात्मक (Diagnostic)

केंद्र

भाषा-प्रणालियाँ

शिक्षार्थी का प्रदर्शन

प्रमुख प्रश्न

कहाँ त्रुटि हो सकती है?

त्रुटि क्यों हुई?

प्रमुख विद्वान

Robert Lado

Stephen Pit Corder

प्रकृति

तुलनात्मक

अनुभवजन्य (Empirical)

 


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