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Tuesday, June 16, 2026

ऐतिहासिक भाषाविज्ञान (Historical Linguistics)

 


ऐतिहासिक भाषाविज्ञान में भाषा में होने वाले परिवर्तनों अध्ययन-विश्लेषण किया जाता है। भाषाविज्ञान के इतिहास की दृष्टि से देखा जाए तो 18वीं शताब्दी के अंत में सर विलियम जोंस के  विचारों के प्रभाव से ऐतिहासिक भाषाविज्ञान का ही सर्वप्रथम विकास हुआजिसे अंग्रेजी में ‘फिलोलॉजी’ (Philology) कहते हैं। इसका उद्देश्य विश्व की भाषाओं में हुए परिवर्तनों की खोज करना तथा भाषा-परिवारों के स्थापना करना रहा है।

 किसी  एक भाषा या एक से अधिक भाषाओं में हुए भाषा परिवर्तनों की खोज उसके विभिन्न स्तरों पर की जा सकती है,  जिन्हें इस प्रकार से नाम दिया जाता है-

§  ध्वनि परिवर्तन

§  रूप परिवर्तन

§  वाक्य परिवर्तन

§  अर्थ परिवर्तन

इनमें होने वाले परिवर्तनों की खोज भिन्न-भिन्न प्रकार से की जाती है तथा नियम दिए जाते हैं। इसके अलावा एक से अधिक भाषाओं की तुलना करते हुए उनके पुराने रूपों की खोज करना तथा भाषा परिवारों का निर्माण करना भी ऐतिहासिक भाषाविज्ञान का एक महत्वपूर्ण कार्य रहा है। इस दृष्टि से देखा जाए तो दुनिया की भाषाओं का वर्गीकरण दो प्रकार से किया जाता है-

§  आकृति मूलक वर्गीकरण

 इसमें वर्गीकरण का आधार भाषाओं के रूपरचना को बनाया जाता है।

§  पारिवारिक वर्गीकरण

इसमें भाषाओं की उत्पत्ति और समानताओं के आधार पर भिन्न-भिन्न भाषा-परिवारों का निर्माण किया जाता हैजैसे- भारोपीय भाषा परिवारआर्य भाषा परिवारचीनी तिब्बती भाषा परिवार आदि ।

भाषा परिवारों की स्थापना में ऐतिहासिक भाषाविज्ञान के साथ-साथ तुलनात्मक भाषाविज्ञान भी काम करता है ।

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