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Tuesday, June 16, 2026

नासिकीकरण (Nasalization)

 नासिकीकरण (Nasalization) वह ध्वन्यात्मक प्रक्रिया है जिसमें किसी स्वर (vowel) का उच्चारण करते समय वायु मुख के साथ-साथ नासिका (नाक) से भी निकलती है। परिणामस्वरूप स्वर में नासिक गुण (nasal quality) आ जाता है। ऐसे स्वरों को नासिक स्वर (nasal vowels) कहा जाता है।

परिभाषा

Victoria Fromkin आदि के अनुसार, नासिकीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें स्वर के उच्चारण के दौरान कोमल तालु (velum) नीचे झुक जाता है, जिससे वायु नासिका मार्ग से भी प्रवाहित होती है।

नासिकीकरण की प्रक्रिया

सामान्यतः स्वर के उच्चारण के समय कोमल तालु ऊपर उठा रहता है और वायु केवल मुख से निकलती है। किंतु नासिकीकरण में कोमल तालु नीचे आ जाता है, जिससे वायु का कुछ भाग नाक से भी बाहर निकलता है। फलस्वरूप स्वर नासिक बन जाता है।

उदाहरण

हिंदी

  • माँ [mãː]
  • चाँद [tʃãːd]
  • हाँ [hãː]
  • आँख [ãːkh]

इन शब्दों में स्वर नासिक रूप से उच्चरित होते हैं।

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