कृत्रिम बुद्धि (Artificial Intelligence—AI) के स्तरों का अध्ययन करते समय यह समझना आवश्यक है कि AI को उसकी क्षमता, कार्यक्षेत्र, सीखने की योग्यता और मानव-बुद्धि के समान कार्य करने की क्षमता के आधार पर
वर्गीकृत किया जा सकता है। सामान्यतः इसके तीन प्रमुख स्तर बताए जाते हैं—संकीर्ण कृत्रिम बुद्धि (ANI), सामान्य कृत्रिम बुद्धि
(AGI) और अतिबुद्धिमान कृत्रिम बुद्धि (ASI)।
इसके अतिरिक्त, AI का एक अन्य वर्गीकरण उसकी
कार्यप्रणाली के आधार पर किया जाता है, जिसमें प्रतिक्रियात्मक
मशीनें, सीमित स्मृति वाली मशीनें, मन के
सिद्धांत पर आधारित AI और आत्म-जागरूक AI शामिल हैं। ये दोनों वर्गीकरण अलग-अलग आधारों पर निर्मित हैं।
कृत्रिम बुद्धि के तीन प्रमुख स्तर
1. संकीर्ण कृत्रिम बुद्धि
(Artificial Narrow Intelligence—ANI)
यह किसी विशिष्ट कार्य या सीमित कार्यक्षेत्र
के लिए विकसित AI है। यह निर्धारित कार्य में अत्यंत प्रभावी हो सकती है, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि वह सभी क्षेत्रों में मानव जैसी सामान्य
बुद्धि रखती है।
उदाहरण: स्पैम फ़िल्टर, वाक्-पहचान, अनुवाद प्रणाली, अनुशंसा प्रणाली और चेहरे की पहचान।
2. सामान्य कृत्रिम बुद्धि
(Artificial General Intelligence—AGI)
यह ऐसी परिकल्पित AI है जो विभिन्न बौद्धिक कार्यों
को व्यापक रूप से सीख सके, नई परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को
ढाल सके और एक क्षेत्र में अर्जित ज्ञान का दूसरे क्षेत्र में उपयोग कर सके।
स्थिति: मानव जैसी व्यापक और सामान्य बौद्धिक
क्षमता वाली AGI को अभी प्राप्त लक्ष्य नहीं माना जाता है।
3. अतिबुद्धिमान कृत्रिम बुद्धि
(Artificial Superintelligence—ASI)
यह एक काल्पनिक अवस्था है जिसमें AI वैज्ञानिक अनुसंधान,
तर्क, योजना, रचनात्मकता
और अन्य अनेक क्षेत्रों में मानव की सर्वोच्च क्षमताओं से भी आगे निकल जाए।
स्थिति: यह सैद्धांतिक अवधारणा है; इसे वास्तविक रूप में प्राप्त
कर लेने का प्रमाण नहीं है।
यह तीन-स्तरीय वर्गीकरण आपके साझा किए गए लेख
में भी प्रस्तुत किया गया है।
2. तीनों स्तरों में अंतर
|
तुलना
का आधार |
ANI |
AGI |
ASI |
|
बुद्धि
का क्षेत्र |
विशिष्ट |
व्यापक
और सामान्य |
मानव
से भी अधिक व्यापक |
|
सीखने
की क्षमता |
कार्य-विशिष्ट |
विभिन्न
क्षेत्रों में सीखने की परिकल्पित क्षमता |
लगभग
सभी बौद्धिक क्षेत्रों में मानव से आगे होने की परिकल्पना |
|
नई परिस्थितियों
में अनुकूलन |
सीमित
या कार्य-निर्भर |
व्यापक |
अत्यधिक
उन्नत होने की कल्पना |
|
वर्तमान
स्थिति |
व्यावहारिक
रूप से उपलब्ध |
अभी प्राप्त
नहीं |
काल्पनिक |
|
प्रमुख
चुनौती |
विश्वसनीयता
और सीमाएँ |
सामान्य
तर्क एवं ज्ञान का हस्तांतरण |
सुरक्षा, नियंत्रण और नैतिकता |
3. कार्यप्रणाली के आधार पर
AI के चार स्तर
यह वर्गीकरण भी प्रचलित है, लेकिन यह ऊपर दिए गए
ANI–AGI–ASI वर्गीकरण से अलग है।
1. प्रतिक्रियात्मक मशीनें
(Reactive Machines)
ये वर्तमान इनपुट के आधार पर प्रतिक्रिया
देती हैं और इनके पास पिछले अनुभवों को उपयोगी स्मृति के रूप में बनाए रखने की
क्षमता नहीं होती। उदाहरण के रूप में IBM के Deep Blue शतरंज
कार्यक्रम का उल्लेख किया जाता है।
2. सीमित स्मृति
(Limited Memory)
ये प्रणालियाँ उपलब्ध ऐतिहासिक या हालिया
डेटा का उपयोग करके निर्णय ले सकती हैं। आधुनिक मशीन लर्निंग और कुछ स्वचालित वाहन
प्रणालियाँ इसके उदाहरण हैं।
3. मन का सिद्धांत
(Theory of Mind)
इस स्तर की परिकल्पित AI दूसरे व्यक्तियों की
मान्यताओं, इरादों, भावनाओं और मानसिक
अवस्थाओं को समझकर उनके अनुरूप व्यवहार कर सकेगी। यह अभी एक शोधपरक अवधारणा है।
4. आत्म-जागरूक AI
(Self-Aware AI)
इस काल्पनिक स्तर पर मशीन को अपनी मानसिक
अवस्था या अपने अस्तित्व का बोध होगा। ऐसी AI के वास्तविक रूप में विकसित होने का प्रमाण
उपलब्ध नहीं है।
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दैनिक भास्कर से प्राप्त कुछ ऐसी ही कुछ
प्रमुख जानकारी : AI के 3 स्तर à
(Note : पूरा पढ़ने के लिए इस लिंक पर जाएं
AI के 3 स्तर और उनमें अंतर भी जान लीजिए...
1- ANI यानी आर्टिफिशियल नैरो इंटेलिजेंस
- फिलहाल हम अभी इसी मशीनी इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसकी क्षमताएं सीमित हैं, किसी एक खास टास्क को अंजाम दे सकती हैं।
- नैरो इंटेलिजेंस ढेर सारे डेटा का एनालिसिस करती है, उसमें कोई पैटर्न खोजती है, फिर उसके आधार पर आगे का अंदाजा लगाकर काम करती है।
- अभी यह इंजीनियर्स की प्रोग्रामिंग और एल्गोरिदम के मुताबिक काम करती है। इंजीनियर्स की ओर से उसमें फीड किए गए नियमों को मानती है।
- हमारे स्मार्टफोन, टीवी, सेल्फ ड्राइविंग कार, सीरी व एलेक्सा जैसे चैटबॉट, फोटो व चेहरे को पहचानने वाला सिस्टम इसी नैरो इंटेलिजेंस की देन है।
- ईमेल से स्पैम छांटने, आवाज पहचानने में मोबाइल की मदद करने व कैंसर के लिए एक्सरे की स्कैनिंग करने जैसे काम नैरो इंटेलिजेंस ही कर रही है।
2- AGI यानी आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस
- AGI इंसान के दिमाग की तरह काम करेगी। इसके पास हमारी तरह सोचने, समझने और काम करने की क्षमता होगी। इसपर काम चल रहा है।
- जब बच्चा बहुत छोटा होता है, तो वह आसपास की चीजें देखता है, अनुभव करता है, उनसे सीखता है, फिर हर परिस्थिति में अलग-अलग फैसले लेता है।
- बच्चे की तरह यह ताकतवर AI भी अपने अनुभवों से लगातार सीखती रहेगी, जानकारी बढ़ाकर व स्किल्स तराशकर खुद को और एडवांस बनाएगी।
- AGI तर्क कर सकेगी। हालात का निरीक्षण कर उसके मुताबिक काम कर सकेगी, फिर भले ही उसे इंजीनियर्स की ओर से तय सीमाएं तोड़नी पड़ें।
- AGI में खुद की चेतना होगी, कॉमन सेंस होगा। वह इंसानों की भावनाओं, जरूरतों को पढ़ सकेगी यानी उसमें इंसानों को समझने की क्षमता होगी।
- हॉलीवुड की टर्मिनेटर फिल्म सीरीज में अर्नोल्ड श्वार्जनेगर जिस रोबोट का किरदार निभाते रहे हैं, उसकी इंटेलिजेंस AGI स्तर की ही है।
3- ASI यानी आर्टिफिशियल सुपर इंटेलिजेंस
- ASI में इंसानों के दिमाग से भी ज्यादा क्षमताएं होंगी, जिसके बूते मशीनें लगभग हर लिहाज से इंसानों से ज्यादा ताकतवर, काबिल बन सकेंगी।
- इस स्तर की इंटेलिजेंस फिलहाल साइंस फिक्शन में ही है। सुपरस्टार रजनीकांत की फिल्म ‘रोबोट’ में ‘चिट्टी’ की तरह तब मशीनें बहुत पावरफुल होंगी।
- इस स्तर पर मशीनों में भी भावनाएं होंगी, वह प्यार और दर्द महसूस कर सकेंगी। इंसानों की तरह उनके भीतर भी संवेदनाएं होंगी, सोचने की क्षमता होगी।
- ASI के बूते मशीनों में खुद के विश्वास और इच्छाएं भी हो सकती हैं। वह गणित से लेकर विज्ञान, आर्ट्स, खेल तक हर क्षेत्र में इंसानों से बेहतर होंगी।
- मशीनों की ऐसी क्षमताएं हासिल कर लेने के बाद उन्हें कंट्रोल करना मुश्किल हो जाएगा। इसी कारण उन्हें इंसानों के अस्तित्व पर खतरा माना जा रहा है।
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