· फिलहाल हम अभी इसी मशीनी
इंटेलिजेंस का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसकी क्षमताएं सीमित हैं, किसी एक खास टास्क को
अंजाम दे सकती हैं।
· नैरो इंटेलिजेंस ढेर सारे डेटा का
एनालिसिस करती है, उसमें कोई पैटर्न खोजती है, फिर उसके आधार पर आगे का
अंदाजा लगाकर काम करती है।
· अभी यह इंजीनियर्स की
प्रोग्रामिंग और एल्गोरिदम के मुताबिक काम करती है। इंजीनियर्स की ओर से उसमें फीड
किए गए नियमों को मानती है।
· हमारे स्मार्टफोन, टीवी, सेल्फ ड्राइविंग कार, सीरी व एलेक्सा जैसे चैटबॉट,
फोटो व चेहरे को पहचानने वाला सिस्टम इसी नैरो इंटेलिजेंस की देन
है।
· ईमेल से स्पैम छांटने, आवाज पहचानने में मोबाइल
की मदद करने व कैंसर के लिए एक्सरे की स्कैनिंग करने जैसे काम नैरो इंटेलिजेंस ही
कर रही है।
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