मान लीजिए
कि हिंदी की दस लाख शब्द-इकाइयों वाला एक डिजिटल कॉर्पस उपलब्ध है। डेटा विज्ञान की
सहायता से निम्नलिखित अध्ययन किया जा सकता है:
1.
डेटा संग्रह: समाचारपत्रों, पुस्तकों या अन्य स्रोतों से पाठ एकत्र करना।
2.
डेटा सफाई: अनावश्यक चिह्नों, दोहराव और तकनीकी त्रुटियों को ठीक करना।
3.
शब्द-आवृत्ति विश्लेषण: सर्वाधिक और न्यूनतम प्रयुक्त शब्दों की सूची
तैयार करना।
4.
सहप्रयोग विश्लेषण: यह पता लगाना कि कौन-से शब्द प्रायः एक साथ आते
हैं।
5.
कालगत तुलना: अलग-अलग वर्षों के पाठों में शब्दों के प्रयोग की तुलना
करना।
6.
विधागत तुलना: साहित्य, समाचार और अकादमिक लेखन की शब्दावली में अंतर का अध्ययन
करना।
7.
दृश्यांकन: निष्कर्षों को तालिका, ग्राफ और रिपोर्ट में प्रस्तुत करना।
8.
मॉडल निर्माण: आवश्यकता होने पर पाठ वर्गीकरण या अन्य पूर्वानुमानात्मक
मॉडल विकसित करना।
इस प्रक्रिया
से हिंदी के शब्द-भंडार, भाषिक व्यवहार, शैलीगत विशेषताओं और भाषा-परिवर्तन के
बारे में प्रमाण-आधारित निष्कर्ष प्राप्त किए जा सकते हैं।
(चैटजेपीटी के सहयोग से तैयार किया गया।)
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