1.
बहुविषयक स्वरूप: इसमें गणित, सांख्यिकी, कंप्यूटर विज्ञान
और संबंधित विषयों का समन्वय होता है।
2.
डेटा संग्रह एवं प्रबंधन: विभिन्न स्रोतों से प्राप्त आँकड़ों को एकत्रित, व्यवस्थित और सुरक्षित किया
जाता है।
3.
डेटा की सफाई: त्रुटिपूर्ण, अपूर्ण, दोहराए गए या असंगत आँकड़ों
की पहचान करके उन्हें उपयुक्त रूप में तैयार किया जाता है।
4.
सांख्यिकीय विश्लेषण: डेटा में मौजूद प्रवृत्तियों, संबंधों और वितरणों का अध्ययन
किया जाता है।
5.
प्रतिरूपों की पहचान: डेटा में छिपे हुए पैटर्न और नियमितताओं का पता
लगाया जाता है।
6.
पूर्वानुमान: उपयुक्त मॉडल की सहायता से संभावित भविष्यगत परिणामों
का अनुमान लगाया जाता है।
7.
दृश्यांकन: चार्ट,
ग्राफ, मानचित्र और डैशबोर्ड के माध्यम से निष्कर्षों
को स्पष्ट किया जाता है।
8.
निर्णय में सहायता: विश्लेषण के निष्कर्षों का उपयोग नीतियों, योजनाओं और व्यावहारिक समस्याओं
के समाधान में किया जाता है।
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