Total Pageviews

Thursday, August 6, 2026

ईपीजी पाठशाला (e-PG Pathshala)

 

ई-पीजी पाठशाला (e-PG Pathshala) भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) के अंतर्गत उच्च शिक्षा विभाग (Department of Higher Education) की एक प्रमुख ई-शिक्षण (E-learning) पहल है। इसका विकास UGC (University Grants Commission) के मार्गदर्शन में INFLIBNET Centre (Information and Library Network Centre) द्वारा किया गया है। इसका उद्देश्य स्नातकोत्तर (Postgraduate) स्तर के विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए उच्च गुणवत्ता की डिजिटल अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराना है।

ई-पीजी पाठशाला की सामग्री (Contents of e-PG Pathshala)

ई-पीजी पाठशाला (e-PG Pathshala) में स्नातकोत्तर स्तर के विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा शिक्षकों के लिए उच्च गुणवत्ता वाली डिजिटल शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। इसकी सामग्री को इस प्रकार वर्गीकृत किया जा सकता है—

1. ई-पाठ (E-Text)

  • प्रत्येक विषय के पाठ्यक्रमानुसार विस्तृत अध्ययन सामग्री।
  • सरल, व्यवस्थित एवं अध्यायवार प्रस्तुति।
  • विषय विशेषज्ञों द्वारा तैयार एवं समीक्षित सामग्री।
  • PDF एवं वेब प्रारूप में उपलब्ध।

2. वीडियो व्याख्यान (Video Lectures)

  • प्रत्येक मॉड्यूल से संबंधित वीडियो लेक्चर।
  • विशेषज्ञ शिक्षकों द्वारा विषय की व्याख्या।
  • जटिल अवधारणाओं को दृश्य-श्रव्य माध्यम से समझाया जाता है।
  • स्व-अध्ययन (Self-learning) के लिए उपयोगी।

3. संदर्भ सामग्री (Reference Materials)

  • अनुशंसित पुस्तकें।
  • शोध-पत्र एवं जर्नल लेख।
  • अतिरिक्त पठन सामग्री।
  • वेब संसाधनों के संदर्भ।

4. स्व-मूल्यांकन (Self-Assessment)

  • प्रत्येक मॉड्यूल के अंत में प्रश्नोत्तरी (Quiz)।
  • बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs)।
  • अभ्यास प्रश्न एवं उत्तर।
  • विद्यार्थियों की सीखने की प्रगति का मूल्यांकन।

 

लिंक :

Uploaded Course / Subjects (22000+ Modules[e-text/Video])

-----------------------------

Wednesday, August 5, 2026

अनुशीलन पत्रिका अनुवाद

 विनम्र निवेदन है कि केंद्रीय अनुवाद ब्यूरो, राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय द्वारा पत्रिका अनुशीलन के आगामी अंक का प्रकाशन किया जाना प्रस्तावित है | इस अंक के लिए निम्नलिखित विषयों पर सरल और सहज हिंदी में उत्कृष्ट लेख आमंत्रित किये जाते हैं | 


1. केन्द्रीय अनुवाद ब्यूरो, एक परिचय I

2. अनुवाद कार्य की चुनौतियाँ और समाधान I

3. वर्तमान में अनुवाद की प्रासंगिकता और महत्व I 

4. अनुवाद का इतिहास I 

5. अनुवाद में सूचना प्रोद्योगिकी का प्रयोग I 

6. अनुवाद में व्यतिरेकी विश्लेषण I

7. विदेशी साहित्य के हिंदी में अनुवाद की समस्याएं I

8. अनुवाद कैसे करें ?

9. अनुवाद में भाषा व्यवहार I 

10. असांविधिक साहित्य का अनुवाद I

11. भाषा सम्प्रेषण में अनुवाद की भूमिका I

12. अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद की चुनौतियां और समाधान I 

13. अनुवाद में पुनरीक्षण का महत्व I 

14. राजभाषा नीति और इसके कार्यान्वयन में अनुवाद की भूमिका I

15. कार्यालयीन हिंदी का बदलता स्वरूप, समस्याएं और समाधान I

16. अनुवाद का सरलीकरण I

17. अनुवाद कार्य में प्रोद्योगिकी टूल्स I

18. क्षेत्रीय भाषाओँ और राजभाषा हिंदी के बीच अनुवाद के संदर्भ में परस्पर समन्वय I

19. सांस्कृतिक सेतु के रूप में अनुवाद की भूमिका I

20. अनुवाद प्रशिक्षण की आवश्यकता एवं महत्व I


 इस अंक में प्रकाशन के लिए लेखों के चयन के संबंध में अंतिम निर्णय केन्द्रीय अनुवाद ब्यूरो का होगा। लेख मंगल फॉन्ट (वर्ड फाइल) में टाइप किए हुए, व्याकरणिक एवं तथ्यात्मक दृष्टि से सही तथा अधिकतम 2000 शब्दों तक हो सकते हैं। शोध से संबंधित लेखों में शब्द सीमा 3000 तक हो सकती है। लेखक अपने नाम, पता, ईमेल एवं संपर्क नंबर सहित इस आशय का एक स्व हस्ताक्षरित प्रमाण पत्र भी अनिवार्य रूप से संलग्न करें कि लेख मौलिक एवं अप्रकाशित है और इसे अन्यत्र प्रकाशनार्थ नहीं भेजा गया है। कृपया लेख (फोटो सहित) दिनांक 10.08.2026 सांय 5.30 बजे तक ई मेल आई डी lekhandrafting123@gmail.com पर भिजवाना सुनिश्चित करें।


सादर

https://ctb.rajbhasha.gov.in/

तुतलाना

 तुतलाने वाले बच्चे की भाषा कैसे सुधारें?

बच्चों की भाषा धीरे-धीरे विकसित होती है। ऐसे में माता-पिता बच्चे पर हमेशा सही बोलने का दबाव बनाने की बजाय धैर्य रखें। भाषा सुधार के लिए कुछ बातों का ध्यान रखें-

  • बच्चे से नियमित बातचीत करें और उसे अपनी बात कहने का मौका दें।
  • बच्चे की बात ध्यान से सुनें, उसकी बात पूरी होने दें।
  • साफ और सरल भाषा में बोलें, ताकि बच्चा सही शब्द और उच्चारण सीख सके।
  • गलत बोलने पर डांटें या बार-बार टोकें नहीं, बल्कि सही शब्द दोहराकर सिखाएं।
  • कहानियां सुनाएं और चित्रों वाली किताबें पढ़ाएं। इससे शब्दावली बढ़ती है।
  • गाने, कविताएं और राइम्स सुनाएं। इससे भाषा और उच्चारण बेहतर होता है।
  • स्क्रीन टाइम सीमित रखें, क्योंकि ज्यादा स्क्रीन देखने से बातचीत के अवसर कम होते हैं।
  • रोजमर्रा की बातचीत में नए शब्द शामिल करें और उनका अर्थ भी समझाएं।
  • खेल-खेल में भाषा सिखाएं, जैसे चित्र पहचानना, रंगों और चीजों के नाम बताना।
  • दूसरे बच्चों के साथ खेलने का मौका दें। कम्युनिकेशन से आत्मविश्वास बढ़ता है।
  • हर बच्चे की ग्रोथ अलग होती है। इसलिए दूसरे बच्चों से तुलना न करें।
  • अगर उम्र के अनुसार भाषा में स्पष्टता न हो तो पीडियाट्रिशियन या स्पीच-लैंग्वेज थेरेपिस्ट से सलाह लें।



पूरा पढ़ें -

Monday, August 3, 2026

Blog report 18 lakhs