Total Pageviews

Thursday, October 29, 2026

कंप्यूटर दृष्टि में प्रयुक्त प्रमुख तकनीकें (Major Techniques used in Computer vision)

 


तकनीक

विवरण

डिजिटल इमेज प्रोसेसिंग

चित्र की गुणवत्ता, आकार, रंग और शोर का प्रसंस्करण

मशीन लर्निंग (ML)

उदाहरणों और डेटा से दृश्य पैटर्न सीखना

डीप लर्निंग (DL)

बहुस्तरीय न्यूरल नेटवर्क द्वारा जटिल दृश्य विशेषताओं को सीखना

कन्वोल्यूशनल न्यूरल नेटवर्क (CNN)

चित्रों में स्थानीय पैटर्न, आकृतियों और विशेषताओं की पहचान

Vision Transformer (ViT)

Transformer आर्किटेक्चर से चित्रों के पैच और उनके संबंधों का विश्लेषण

ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR)

छवि में उपस्थित पाठ की पहचान

त्रिविमीय कंप्यूटर दृष्टि (3D Vision)

गहराई, आकार और त्रिविमीय संरचना का अनुमान

बहुमाध्यमी AI (Multimodal AI)

चित्र, पाठ और कभी-कभी ध्वनि जैसी विभिन्न प्रकार की सूचनाओं का संयुक्त विश्लेषण

 

Thursday, October 22, 2026

शोध-निर्देशक के लिए आठ व्यावहारिक नियम

डॉ. हरदीप सिंह

पूर्व अध्यक्ष एवं प्रोफ़ेसर, हिंदी विभाग, सिक्किम विश्वविद्यालय

द्वारा  शोध-निर्देशक के लिए आठ व्यावहारिक नियम सुझाए गए हैं। इन पर विचार किया जा सकता है ----

 इन नियमों का उद्देश्य ai मशीन को रोकना नहीं, उसे उसके उचित स्थान पर रखना है।

1. शोध-प्रश्न और विषय की दृष्टि शोधार्थी स्वयं बनाए। मशीन से आपत्तियाँ बाद में पूछी जाएँ, पहले नहीं, क्योंकि दृष्टि विषय में से ही आती है, उपकरण से नहीं।

2. अन्वेषण में मशीन की सहायता ली जा सकती है, पर हर संदर्भ मूल ग्रंथ या मूल पृष्ठ से मिलाया जाए। जो संदर्भ मूल में न मिले, वह प्रबंध में न रहे।

3. उद्धरण केवल मूल पृष्ठ देखकर, ज्यों के त्यों लिए जाएँ। मशीन से उद्धरण माँगना या उसके दिए उद्धरण को सीधे रख लेना वर्जित हो।

4. पाठ-संपादन और पाठभेदों में मशीन का मिलान एक प्रस्ताव माना जाए। कौन-सा पाठ शुद्ध है, यह निर्णय पांडुलिपि देखकर विद्वान ही करे।

5. आख्यान वाले अध्याय का पहला प्रारूप शोधार्थी अपने हाथ से लिखे। मशीन का उपयोग भाषा सुधारने या विरोधी तर्क खोजने के लिए बाद में हो।

6. उपयोग की घोषणा हो। भूमिका में या अध्याय के अंत में बताया जाए कि किस काम में, किस उपकरण से, कितनी सहायता ली गई। यह नियमावली की उसी भावना का विस्तार है जो अपने प्रयत्न का अंश स्पष्ट करने को कहती है।

7. अप्रकाशित पांडुलिपि, साक्षात्कार और किसी और का गोपनीय शोध-कार्य बिना अनुमति किसी ऑनलाइन उपकरण में न डाला जाए। इस विषय में अपने संस्थान और प्रकाशक की नीति देखी जाए, क्योंकि ये नियम बदल रहे हैं।

8. मौखिकी में शोधार्थी से अध्याय का तर्क अपने शब्दों में समझाने को कहा जाए। नियमावली जिस "सम्यक् निर्णय करने की क्षमता" की बात करती है, वह वहीं सबसे साफ़ परखी जा सकती है।

एक उदाहरण से यह क्रम समझा जा सकता है। मान लीजिए कोई शोधार्थी सूरसागर के पदों की प्रतियों पर काम कर रहा है। शोध-प्रश्न वह स्वयं बनाता है: विभिन्न प्रतियों के पाठभेद से परंपरा-भेद का क्या संकेत मिलता है। प्रतियों के डिजिटल पाठ का मिलान मशीन से कराता है और भिन्नताओं की सूची पाता है। फिर प्रत्येक भिन्नता को पांडुलिपि के पन्ने से देखकर स्वयं निर्णय लेता है कि कौन-सा पाठ मान्य है। विश्लेषण वाला अध्याय अपने हाथ से लिखता है, और अंत में बताता है कि सूची बनाने और मिलान में किस उपकरण की सहायता ली गई। इस क्रम में मशीन ने दूध जुटाया और मथने का काम शोधार्थी ने किया।

कुछ विद्वान इन नियमों को कठोर मानेंगे। उनका तर्क हो सकता है कि जैसे लेखनी, पुस्तकालय-सूची और छपाई ने शोध को सरल किया, वैसे ही यह उपकरण भी है, और इस पर इतनी रोक अनावश्यक है। इस लेख का उत्तर यह है कि कसौटी उपकरण पर नहीं, उसके उपयोग पर है। जहाँ उपकरण दूध जुटाता है, वहाँ वह स्वागत योग्य है। जहाँ वह मथने का स्थान लेने लगता है, वहाँ अनुसंधान रुक जाता है।


हरदीप दोराहा

Wednesday, October 21, 2026

Thursday, October 15, 2026

Multimedia Crash Course in Hindi designed by Prof. Surendra Gambhir

 Tired of boring textbooks? Dive into the Multimedia Crash Course in Hindi and learn the language the natural way through immersive media, Bollywood hits, real-life dialogues, and day-to-day dialogues on the street.

The Multimedia Crash Course in Hindi is designed to take you from the basics of grammar and writing to fluent, natural spoken Hindi using rich multimedia content.
Ready to transform your Hindi learning journey?
Click below to explore the course and register now! https://www.learnhindiedutainment.in/multimedia-crash-course-in-hindi

Vijay K Malhotra
Editor
https://www.learnhindiedutainment.in