चिह्न ‘ऽ’ को अवग्रह (Avagraha) कहा जाता है। इसका मुख्य उपयोग संस्कृत और हिंदी व्याकरण में संधि के कारण विलुप्त हुए ‘अ’ स्वर को दर्शाने, शब्दों में स्वर को लंबा खींचने, तथा छंदशास्त्र में गुरु मात्रा को दिखाने के लिए किया जाता है।इस चिह्न के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया अवग्रह लेख देख सकते हैं।
मुख्य उपयोग :
पूर्वरूप संधि: जब पद के अंत में 'ए' या 'ओ' हो और उसके बाद 'अ' आए, तो 'अ' छिप जाता है और उसकी जगह 'ऽ' लगता है। जैसे: सो + अहम् = सोऽहम्।
स्वर को खींचना: आधुनिक भाषाओं या बोलियों में किसी को पुकारते समय स्वर को दीर्घ (लंबा) करने के लिए इसका प्रयोग होता है। जैसे: माँ ऽऽऽ।
छंदशास्त्र: कविता या छंद में गुरु (भारी/दीर्घ) मात्रा को दर्शाने के लिए भी इस चिह्न का उपयोग किया जाता है।
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