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Wednesday, November 19, 2025

ब्राह्मण और बकरी


एक गाँव में एक सीधा-सादा ब्राह्मण रहता था। एक दिन उसे पूजा के लिए एक बकरी उपहार में मिली। वह बकरी को कंधे पर रखकर घर की ओर चल पड़ा। रास्ते में तीन धोखेबाज़ ठगों ने उसे देखा। वे ब्राह्मण की सरलता का फायदा उठाना चाहते थे। उन्होंने योजना बनाई कि बारी-बारी से झूठ बोलकर उसे भ्रमित करेंगे। पहला ठग आगे आया और बोला— “हे ब्राह्मण! अपने कंधे पर कुत्ता लेकर कहाँ जा रहे हैं?"

ब्राह्मण चौंका, लेकिन उसने देखाबकरी ही थी। वह आगे बढ़ गया। थोड़ी दूरी पर दूसरा ठग बोला

अरे! आपके कंधे पर कुत्ता है, आप इसे क्यों ढो रहे हैं?”

ब्राह्मण फिर हिला, मगर उसने अपना विश्वास बनाए रखा। कुछ दूरी पर तीसरा ठग चिल्लाया

ब्राह्मण जी! आप पागल हो गए हैं क्या? कंधे पर कुत्ता उठाए जा रहे हैं!अब ब्राह्मण का मन पूरी तरह विचलित हो गया।

उसे लगा—“तीन-तीन लोग एक ही बात कह रहे हैं। शायद यह बकरी नहीं बल्कि कुत्ता ही है! उसने बकरी को नीचे उतारा और वहीं छोड़कर चला गया। तीनों ठग हँसते हुए बकरी को लेकर चलते बने।



कहानी की सीख : बार-बार बोले गए झूठ पर लोग सच का भ्रम कर बैठते हैं। सच्चाई को स्वयं परखना चाहिए, दूसरों के प्रभाव में नहीं आना चाहिए। अति-भोलेपन से हमेशा नुकसान होता है।

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