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Tuesday, February 18, 2025

अन्विति : गृहकार्य (Homework)

गृहकार्य (Homework) : इस कहानी के सभी वाक्यों वाक्य स्तर की अन्विति को रेखांकित करें-

कछुआ और खरगोश की कहानी (1):

§  किसी जंगल में तालाब के किनारे एक खरगोश और एक कछुआ रहते थे।

§  दोनों में अच्छी मित्रता थी।

§  खरगोश को अपनी तेज चाल का घमंड था , इसलिए वह कछुआ की धीमी चाल का मजाक उड़ाता था।

§  एक दिन कछुए ने खरगोश से कहा की तुम मेरा मजाक उड़ाते हो , क्यों न हम दोनों में दौड़ हो जाए ?

§  खरगोश दौड़ने के लिए राजी हो गया।

§  दौड़ प्रारंभ हुई तो खरगोश दौड़कर बहुत आगे निकल गया।

§  उसने देखा कि कछुआ अभी बहुत पीछे रह गया है , तो क्यों न विश्राम कर लिया जाए।

§  तब वह एक पेड़ के नीचे सुस्ताने लगा और वहीं पर सो गया।

§  कछुआ अपनी धीमी चाल से लगातार चलता रहा।

§  वह खरगोश से आगे पहुँच गया।

§  जब खरगोश सोकर उठा तो उसे कछुआ कहीं नजर नहीं आया।

§  वह तेजी से दौड़ा तो उसने देखा कि कछुआ तय स्थान पर पहले ही पहुँच गया था।

§  इससे खरगोश ने अपनी हार मान ली।

कछुआ और खरगोश की कहानी (2):

§  खरगोश और कछुआ दो अच्छे दोस्त थे।

§  एक बार जंगल में सूखा पड़ गया, तो सभी जानवर नदी के पानी की तलाश में चले गए।

§  खरगोश तेज़ी से दौड़ा, लेकिन कछुआ धीरे-धीरे चला।

§  खरगोश को यह देखकर समझ आया कि उसे कछुए की मदद करनी चाहिए।

§  खरगोश नदी तक पहुंचा और कछुए को नदी में ले जाने में उसकी मदद की।

§  इस तरह, दोनों की मित्रता मज़बूत हुई।

 

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उत्तर :

कछुआ और खरगोश की कहानी (1):

§  किसी जंगल में तालाब के किनारे एक खरगोश और एक कछुआ रहते थे

§   दोनों में अच्छी मित्रता थी

§  खरगोश को अपनी तेज चाल का घमण्ड था, इसलिए वह कछुआ की धीमी चाल का मजाक उड़ाता था

§  एक दिन कछुए ने खरगोश से कहा [free] कि तुम मेरा मजाक उड़ाते हो, क्यों न हम दोनों में दौड़ हो जाए ?[passive]

§  खरगोश दौड़ने के लिए राजी हो गया

§  दौड़ प्रारम्भ हुई तो खरगोश दौड़कर बहुत आगे निकल गया

§  उसने देखा [free] कि कछुआ अभी बहुत पीछे रह गया है , तो क्यों न विश्राम कर लिया जाए[passive]

§  तब वह एक पेड़ के नीचे सुस्ताने लगा और वही पर सो गया

§  कछुआ अपनी धीमी चाल से लगातार चलता रहा

§  वह खरगोश से आगे पहुँच गया

§  जब खरगोश सोकर उठा तो उसे कछुआ कहीं नजर नहीं आया

§  वह तेजी से दौड़ा तो उसने देखा [free] कि कछुआ तय स्थान पर पहले ही पहुँच गया था

§  इससे खरगोश ने अपनी हार मान ली

कछुआ और खरगोश की कहानी (2):

§  खरगोश और कछुआ दो अच्छे दोस्त थे.

§  एक बार जंगल में सूखा पड़ गया, तो सभी जानवर नदी के पानी की तलाश में चले गए.

§  खरगोश तेज़ी से दौड़ा, लेकिन कछुआ धीरे-धीरे चला.

§  खरगोश को यह देखकर समझ आया [free] कि उसे कछुए की मदद करनी चाहिए.

§  खरगोश नदी तक पहुंचा और कछुए को नदी में ले जाने में उसकी मदद की.

§  इस तरह, दोनों की मित्रता मज़बूत हुई.

 

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Thursday, February 13, 2025

ब्लॉग रिपोर्ट : 11 लाख (Blog report)



 

Wednesday, February 12, 2025

वाक्य स्तर पर अन्विति (Agreement on Sentence Level)

वाक्य स्तर पर अन्विति (Agreement on Sentence Level)

हिंदी में वाक्य स्तर पर कर्ता और कर्म के साथ ‘क्रिया पदबंध’ की अन्विति होती है। इन्हें निम्नलिखित प्रकार से देख सकते हैं-

2.1 कर्ता और क्रिया की अन्विति

कर्ता के बाद किसी परसर्ग (ने, को, से, द्वारा) आदि का प्रयोग न होने पर क्रिया की अन्विति कर्ता के साथ होती हैजैसे-

§    मोहन आम खाता है

§    सीता आम खाती है

§    तुम अपने घर में आम खाते हो

§    मैं बाजार से खरीदकर पके हुए आम खाता हूँ।

अभ्यास :

कर्ता के साथ अन्विति के अनुसार कोष्ठक में दिए गए शब्दों के उचित रूप से खाली स्थान भरें-

§    दिनेश बाजार से बहुत सारी सब्जी .... .... । (लाना + है)

§    सरिता बाजार से बहुत सारी सब्जी .... .... । (लाना + है)

§    राम और मोहन बाजार से बहुत सारी सब्जी .... .... । (लाना + है)

§    मैं बाजार से बहुत सारी सब्जी .... .... । (लाना + है)

§    तुम बाजार से बहुत सारी सब्जी .... .... । (लाना + है)

§    वे बाजार से बहुत सारी सब्जी .... .... । (लाना + है)

§    वह बाजार से बहुत सारी सब्जी .... .... । (लाना + है)

उत्तर :

§    दिनेश बाजार से बहुत सारी सब्जी .... लाता है .... । (लाना + है)

§    सरिता बाजार से बहुत सारी सब्जी .... लाती है .... । (लाना + है)

§    राम और मोहन बाजार से बहुत सारी सब्जी ....  लाते हैं.... । (लाना + है)

§    मैं बाजार से बहुत सारी सब्जी .... लाता हूँ/लाती हूँ.... । (लाना + है)

§    तुम बाजार से बहुत सारी सब्जी .... लाते हो/लाती हो.... । (लाना + है)

§    वे बाजार से बहुत सारी सब्जी .... लाते हैं/लाती हैं .... । (लाना + है)

§    वह बाजार से बहुत सारी सब्जी .... लाता है/लाती है .... । (लाना + है)

 

2.2 कर्म और क्रिया की अन्विति

कर्ता + परसर्गहोने पर क्रिया की अन्विति कर्म के साथ होती हैजैसे-

§  मोहन ने आम खाया

§  सीता ने आम खाया

§  मोहन ने मिठाई खाई

§  सीता ने मिठाई खाई

§  तुमने अपने घर में आम खाया

§  तुमने अपने घर में मिठाई खाई

§  मैंने बाजार से खरीदकर पके हुए 10 आम खाए।

§  मैंने बाजार से खरीदकर स्वादिष्ट मिठाई खाई।

अभ्यास : कर्म के साथ अन्विति के अनुसार कोष्ठक में दिए गए शब्दों के उचित रूप से खाली स्थान भरें-

§    दिनेश  ने बाजार से बहुत सारी सब्जी .... .... । (लाना + है)

§    सरिता ने बाजार से बहुत सारी सब्जी .... .... । (लाना + है)

§    दिनेश  ने बाजार से एक आम .... .... । (लाना + था)

§    सरिता ने बाजार से एक आम .... .... । (लाना +था)

§    दिनेश  ने बाजार से एक जलेबी .... .... । (लाना)

§    सरिता ने बाजार से एक जलेबी .... .... । (लाना)

§    दिनेश  ने बाजार से दस आम .... .... । (खरीदना)

§    सरिता ने बाजार से दस आम .... .... । (खरीदना )

उत्तर :

§    दिनेश  ने बाजार से बहुत सारी सब्जी .... लाई है.... । (लाना + है)

§    सरिता ने बाजार से बहुत सारी सब्जी ....लाई है .... । (लाना + है)

§    दिनेश  ने बाजार से एक आम .... लाया था .... । (लाना + था)

§    सरिता ने बाजार से एक आम .... लाया .... । (लाना +था)

§    दिनेश  ने बाजार से एक जलेबी .... लाई .... । (लाना)

§    सरिता ने बाजार से एक जलेबी .... लाई .... । (लाना)

§    दिनेश  ने बाजार से दस आम .... खरीदे .... । (खरीदना)

§    सरिता ने बाजार से दस आम .... खरीदे.... । (खरीदना )

गृहकार्य : कर्ता और कर्म से अन्विति वाले 05-05 वाक्य बनाकर लाएँ। (14-02-25)

2.3 स्वतंत्र क्रिया (अन्वितिहीनता)

जब कर्ता और कर्म दोनों के बाद परसर्ग आता है तो क्रिया स्वतंत्र (एकवचनपुल्लिंग) रहती हैजैसे-

कर्ता क्रिया अन्विति के साथ दो वाक्य : 

§  मोहन सीता को मारता है

§  सीता  मोहन को मारती है

अन्वितिहीनता के साथ वही दो वाक्य : 

§  मोहन ने सीता को मारा

§  सीता ने मोहन को मारा

 

2.4 कर्ता + कर्मपूरक अन्विति

कर्ता + कर्मपूरक पदबंधवाले वाक्यों में कर्ता के साथ कर्मपूरक की भी अन्विति होती है। जैसे-

§  यह आम बहुत अच्छा है।

§  यह जलेबी बहुत अच्छी है।