विशेषण में संबंधित संज्ञा
के लिंग और वचन के अनुसार रूप परिवर्तन होता है। वैसे सभी विशेषण शब्दों के रूप
नहीं बनते। अतः इनके दो वर्ग किए जा सकते हैं- विकारी और अविकारी।
विकारी विशेषणों के
शब्दरूप बनते हैं, जबकि अविकारी विशेषण के नहीं। विशेषण शब्दों के रूप रचना
के संबंध में एक सामान्य नियम इस प्रकार से दिया जा सकता है-
नियम-01 : ‘आकारांत’ (आ से समाप्त होने
वाले) विशेषणों के ‘एकारांत’ और ‘ईकारांत’ रूप बनते हैं, जैसे- ‘अच्छा’ में अंत में ‘आ’ आया है तो ‘अच्छे’ और ‘अच्छी’ इसके दो रूप बनेंगे।
विशेषणों में यह विकार ‘लिंग’ और ‘वचन’ के आधार पर होता है।
रूप निर्माण की
प्रक्रिया को एक टेबल के माध्यम से निम्नलिखित प्रकार से समझ सकते हैं-
|
लिंग |
||
|
वचन |
पुल्लिंग
(Masculine) |
स्त्रिलिंग
(Feminine) |
|
एकवचन
(Singular) |
अच्छा |
अच्छी |
|
बहुवचन
(Plural) |
अच्छे |
अच्छी |
उदाहरण –
Ø अच्छा लड़का मीठे आम खा रहा
है।
Ø अच्छे लड़के मीठे आम खा रहे हैं।
Ø अच्छी लड़की मीठे आम खा रही है।
Ø अच्छी लड़कियाँ मीठे आम खा रही हैं।
इसी प्रकार एक दूसरा
नियम भी दे सकते हैं-
नियम-02 : ‘वाँ’ अंतिम अक्षर वाले
विशेषणों में भी संबंधित संज्ञा के लिंग और वचन के अनुसार परिवर्तन होता है। यह
स्थिति ‘संख्यावाची शब्द + वाँ’ में
स्पष्ट दिखाई पड़ती है, जैसे-
Ø रमेश का यहाँ सातवाँ स्थान
है।
Ø मोहन सातवीं कक्षा
में पढ़ता है।
Ø वह लड़का सातवें स्थान
पर आया।
अपवाद : आकारांत विशेषणों में वे विशेषण जिनका अंत 'या' से होता हो उनके रूप
नहीं बनते। उदाहरण के लि ‘घटिया’ शब्द का सदैव इसी रूप में प्रयोग होता है जैसे-
‘घटिया आदमी’ (एकवचन, पुल्लिंग), घटिया लोग (बहुवचन, पुल्लिंग), घटिया औरत (एकवचन, स्त्रीलिंग), घटिया औरतें (बहुवचन, स्त्रीलिंग)
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