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Monday, December 29, 2025

भारतीय भाषा कोश (22 भाषाओं में)






 






Saturday, December 27, 2025

स्वर ध्वनियों का वर्गीकरण (Classification of Vowel Sounds)

 

हिंदी में स्वर ध्वनियों का वर्गीकरण मुख्य रूप से तीन आधारों पर किया गया है-

1.    जिह्वा की ऊँचाई (Tongue's Height)

2.    जिह्वा की स्थिति (Tongue's Position)

3.    होठों की आकृति (Lip's Rounding)

1.    जिह्वा की ऊँचाई (Tongue's Height) -  जिह्वा की ऊँचाई के आधार पर स्वरों को चार वर्गों में विभक्त किया गया है- संवृतअर्ध संवृतअर्ध विवृत और विवृत।

§  संवृत (Close) - जिन स्वरों के उच्चारण में जिह्वा सबसे अधिक ऊपर उठती हैऔर मुख में सबसे कम स्थान खुला रहता हैसंवृत स्वर कहलाते हैं। ईउ संवृत स्वर हैं।

§  अर्धसंवृत (Semi-close) - जिन स्वरों के उच्चारण में जिह्वा थोड़ा कम ऊपर उठती है और मुखविवर संवृत से थोड़ा कम खुला होता है, अर्ध संवृत स्वर कहलाते हैं। ए और ओ अर्ध संवृत स्वर हैं।

§  अर्धविवृत (Semi-open) - जिन स्वरों के उच्चारण में जिह्वा अर्धसंवृत से कम ऊपर उठती है और मुखविवर में वायु मार्ग खुला रहता है, अर्ध विवृत स्वर कहलाते हैं। अऐ और औ अर्धविवृत स्वर हैं।

§  विवृत (Open) - जिन स्वरों के उच्चारण में जिह्वा मध्य में स्थित होती है और मुखविवर पूरा खुला रहता है , ऐसे उच्चरित स्वर को विवृत कहते हैं। ‘’ विवृत स्वर है।

2.  जिह्वा की स्थिति (Tongue's Position) - किसी स्वर के उच्चारण में जिह्वा की स्थिति के आधार पर स्वरों के तीन भेद किए जाते हैं -

§  अग्रस्वर (Front Vowels) - जिन स्वरों के उच्चारण में जिह्वा का अग्रभाग सक्रिय होता हैअग्रस्वर कहलाते हैं। हिंदी में इअग्रस्वर हैं।

§  मध्य स्वर (Central Vowels) - जिन स्वरों के उच्चारण में जिह्वा का मध्य भाग सक्रिय होता हैमध्य स्वर कहलाते हैं। हिंदी में ‘’ मध्य स्वर है।

§  पश्चस्वर (Back Vowels) - जिन स्वरों के उच्चारण में जिह्वा का पश्च भाग सक्रिय होता हैपश्च स्वर कहलाते हैं। हिंदी में ऊ,,,एवं आ पश्च स्वर हैं।

3. होंठो की आकृति (Lip's Rounding) - किसी स्वर के उच्चारण में होठों की आकृति के आधार पर स्वरों को दो वर्गों में रख सकते हैं - 1. गोलीय 2. अगोलीय

§  गोलीय (Rounded) – इन स्वरों के उच्चारण में होंठ की स्थिति गोलाकार होती है,ऑ (अंग्रेजी से आगत) गोलीय स्वर हैं।

§  अगोलीय (Unrounded) – इन स्वरों के उच्चारण में होंठ की स्थिति गोलाकार नहीं होती। अए और ऐ अगोलीय स्वर हैं।

हिंदी के दस स्वरों का स्वानिक रूप चार्ट के माध्यम से इस प्रकार दिखाया जा सकता है -



(स्रोत : हिंदी की ध्वनि संरचना, डॉ. अनिल कुमार पाण्डेय)

व्यंजन ध्वनियों का वर्गीकरण (Classification of Consonant Sounds)

 

जिन ध्वनियों के उच्चारण में मुख विवर में अवरोध होता है, वे ध्वनियाँ व्यंजन कहलाती हैं।

3.1 व्यंजन ध्वनियों का वर्गीकरण

भारतीय भाषा परंपरा में आभ्यंतर प्रयत्न के आधार पर हिंदी व्यंजन ध्वनियों के मुख्यतः तीन वर्ग किए गए हैं-

(क) स्पर्श : सभी वर्गीय ध्वनियाँ => क वर्ग से प वर्ग तक  कुल पच्चीस ध्वनियाँ

(ख) अंतस्थ : य र ल व

(ग) ऊष्म : श ष स ह । यह वर्गीकरण किया गया है।

व्यंजन ध्वनियों का विस्तृत वर्गीकरण दो आधारों पर किया जाता है-

(क) उच्चारण स्थान (Place of Articulation)

(ख) उच्चारण प्रयत्न (Mannar of Articulation)

(क) उच्चारण स्थान (Place of Articulation)

उच्चारण स्थान के आधार पर यह देखते हैं कि कौन-सी ध्वनि कहाँ से उच्चरित होती है -

§  कंठ्य - उच्चारण कंठ स्थान से। => ङ ।

§  तालव्य - उच्चारण तालु स्थान से । =>   , य तथा श।

§  मूर्धन्य - उच्चारण मूर्धा से । => ढ णएवं ढ़ ।

§  दंत्य - उच्चारण में जिह्वा दांत को स्पर्श करती है। => ,,स।

§  द्वयोष्ठ्य - उच्चारण दोनों होठों के स्पर्श से । =>,व ।

§  काकल्य - का उच्चारण काकल स्थान से । => ‘’ 

3.1.2 उच्चारण प्रयत्न (Manner of Articulation)

 ध्वनि के उच्चारण अंग द्वारा किए जाने वाला प्रयत्न उच्चारण प्रयत्न कहलाता है। इसके आधार पर व्यंजन ध्वनियों को निम्नलिखित वर्गों में रखा गया है - 

§  स्पर्श (Stops) – इन व्यंजन ध्वनियों के उच्चारण में जिह्वा उच्चारण स्थान को स्पर्श करती है। इनके अंतर्गत कंठ्य, मूर्धन्य, दंत्य, वर्त्स्य और ओष्ठ्य ध्वनियाँ सम्मिलित हैं। क, , , , , , , , , , , , , , , भ स्पर्श ध्वनियाँ हैं।

§  स्पर्श संघर्षी (Africates) - इनके उच्चारण में जिह्वा उच्चारण स्थान को स्पर्श करती है, साथ ही मुखविवर से वायु हल्के घर्षण के साथ निकलती हैजैसे - च छ ज झ।

§  संघर्षी (Fricatives) - जिन व्यंजन ध्वनियों का उच्चारण करते समय मुखविवर में घर्षण होता है, जैसे - शह।

§  पार्श्विक (Laterals) - इनके उच्चारण में जिह्वा दंत अथवा वर्त्स स्थान को छूती हैऔर वायु जिह्वा के अगल-बगल से बाहर निकलती है । जैसे-

§  लुंठित (Trills) - इनके उच्चारण में जिह्वा बार-बार वर्त्स को स्पर्श करती हैजैसे- ‘

§  उत्क्षिप्त (Flapped) - इनके उच्चारण में जिह्वा मूर्धा स्थान को शीघ्रता से स्पर्श करती है, जैसे-  और

§  नासिक्य (Nasals) - जिन ध्वनियों के उच्चारण में वायु नासिका एवं मुख दोनों मार्ग से एक साथ निकलती है। नासिक्य कहलाती हैं। ङ , म नासिक्य ध्वनियाँ हैं।

§  अर्धस्वर (Semivowels) - इनके उच्चारण के समय जिह्वा एक स्थान से दूसरे स्थान की ओर सरकती है, जैसे- ’ और ‘

Wednesday, December 24, 2025

201 मौखिक अभिव्यक्ति

 मौखिक अभिव्यक्ति के प्रमुख बिंदु संबंधी नोट्स 


5 कहानियाँ

प्रश्नपत्र :


Wednesday, December 10, 2025

Station Leaving Central Government



 

Tuesday, December 9, 2025

201 PP 2023


 



Friday, December 5, 2025

Blog report : 14 लाख


 

Wednesday, December 3, 2025