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Monday, March 23, 2026

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Policy on Education) 1968

 


राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NPE) 1968 स्वतंत्र भारत की पहली शिक्षा नीति थी। इसकी घोषणा 24 जुलाई 1968 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में की गई थी। यह नीति मुख्य रूप से कोठारी आयोग (1964-66) की सिफारिशों पर आधारित थी।

इस नीति की प्रमुख विशेषताएं और उद्देश्य निम्नलिखित थे:

1. अनिवार्य और निःशुल्क शिक्षा

इसका मुख्य लक्ष्य 14 वर्ष तक की आयु के सभी बच्चों के लिए निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करना था।

इसका उद्देश्य संविधान के अनुच्छेद 45 के तहत राज्य के नीति निर्देशक सिद्धांतों को पूरा करना था।

2. शिक्षा का ढांचा (10+2+3)

इस नीति ने पूरे देश में शिक्षा के एक समान ढांचे को अपनाने का सुझाव दिया, जिसे 10+2+3 प्रणाली के रूप में जाना जाता है (10 वर्ष की स्कूली शिक्षा, 2 वर्ष की इंटरमीडिएट/हायर सेकेंडरी और 3 वर्ष का स्नातक पाठ्यक्रम)।

3. त्रि-भाषा सूत्र (Three-Language Formula)

माध्यमिक स्तर पर त्रि-भाषा सूत्र को लागू करने पर जोर दिया गया।

इसमें क्षेत्रीय भाषा, हिंदी और अंग्रेजी (या कोई अन्य आधुनिक भारतीय/विदेशी भाषा) का समावेश शामिल था।

शिक्षा के माध्यम के रूप में क्षेत्रीय भाषाओं के विकास को प्राथमिकता दी गई।

4. शिक्षकों की स्थिति और प्रशिक्षण

शिक्षकों को समाज का निर्माता मानते हुए उनके सम्मान, वेतन और सेवा शर्तों में सुधार पर बल दिया गया।

शिक्षक प्रशिक्षण (Teacher Training) को बेहतर बनाने के लिए विशेष प्रावधान किए गए।

5. अन्य महत्वपूर्ण बिंदु

§  समान अवसर: शैक्षिक अवसरों की समानता पर जोर दिया गया ताकि पिछड़े वर्गों और विकलांग बच्चों को भी शिक्षा मिल सके।

§  विज्ञान और अनुसंधान: विज्ञान और गणित की शिक्षा को अनिवार्य बनाने और अनुसंधान (Research) को बढ़ावा देने की बात कही गई।

§  जीडीपी का निवेश: शिक्षा पर राष्ट्रीय आय (GDP) का 6% खर्च करने का लक्ष्य रखा गया था।

§  कृषि और औद्योगिक शिक्षा: देश के आर्थिक विकास के लिए कृषि और व्यावसायिक शिक्षा के विस्तार पर ध्यान दिया गया।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Policy on Education) 1986 (1992 संशोधन सहित)

 


राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NPE) 1986, जिसे तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नेतृत्व में लागू किया गया, का उद्देश्य भारत में शिक्षा प्रणाली से असमानताओं को दूर करना, महिलाओं, अनुसूचित जातियों (SC) और जनजातियों (ST) के लिए शैक्षिक अवसर समान करना था। इसने प्राथमिक शिक्षा में सुधार के लिए 'ऑपरेशन ब्लैकबोर्ड' और 'नवोदय विद्यालय' जैसी पहल शुरू कीं, साथ ही 14 वर्ष की आयु तक अनिवार्य शिक्षा और शिक्षा पर जीडीपी का 6% खर्च करने का लक्ष्य रखा।

1986 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति की मुख्य विशेषताएं:

§  समानता पर जोर: शिक्षा में व्याप्त लैंगिक और सामाजिक असमानताओं को दूर करने के लिए विशेष प्रयास करना।

§  ऑपरेशन ब्लैकबोर्ड: प्राथमिक विद्यालयों में न्यूनतम आवश्यक सुविधाएं (जैसे- दो कक्षाएं, शौचालय, शिक्षक) सुनिश्चित करने के लिए यह योजना शुरू की गई।

§  नवोदय विद्यालय (पेस-सेटिंग स्कूल): ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाशाली बच्चों को मुफ्त गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए प्रत्येक जिले में नवोदय विद्यालय स्थापित किए गए।

§  तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा: कंप्यूटर साक्षरता और तकनीकी शिक्षा पर जोर दिया गया।

§  दूरस्थ शिक्षा: मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) प्रणाली का विस्तार किया गया।

§  शिक्षक प्रशिक्षण: जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) की स्थापना का प्रस्ताव रखा गया।

§  पाठ्यचर्या: एक राष्ट्रीय शिक्षा संरचना (10+2+3) को अपनाने पर जोर दिया गया।

1992 में संशोधन:

1986 की नीति को 1992 में संशोधित किया गया था, जिसे 'कार्ययोजना 1992' के रूप में जाना जाता है, जिसमें नीति के कार्यान्वयन को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए कुछ बदलाव किए गए थे। इस नीति को बाद में नई शिक्षा नीति 2020 द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया गया।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy) 2020

 


यह नवीनतम शिक्षा नीति है, जो 21वीं सदी की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020, 29 जुलाई 2020 को भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक ऐतिहासिक नीति है, जो 1986 की नीति को प्रतिस्थापित करती है। इसका लक्ष्य 2030 तक स्कूली शिक्षा में 100% GER और 2035 तक उच्च शिक्षा में 50% GER प्राप्त करना, साथ ही मातृभाषा में शिक्षा, 5+3+3+4 संरचना और कौशल विकास पर जोर देना है।

नई शिक्षा नीति 2020 की मुख्य विशेषताएं :

§  नया शैक्षणिक ढांचा (5+3+3+4): 10+2 प्रणाली को 5+3+3+4 में बदलता है, जो 3 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए है (फाउंडेशन, प्रिपरेटरी, मिडिल, सेकेंडरी स्टेज)

§  मातृभाषा में शिक्षा: कक्षा 5 (और अधिमानतः 8) तक मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा में शिक्षा देने पर जोर।

§  उच्च शिक्षा में बहु-विषयक दृष्टिकोण: विषयों के लचीले चयन, एकाधिक प्रवेश/निकास (Multiple Entry/Exit) और अकादमिक क्रेडिट बैंक की स्थापना।

§  शिक्षा मंत्रालय: मानव संसाधन विकास मंत्रालय (MHRD) का नाम बदलकर अब 'शिक्षा मंत्रालय' कर दिया गया है

§  व्यावसायिक शिक्षा: छठी कक्षा से ही कोडिंग और व्यावसायिक कौशल सीखने की शुरुआत।

§  मूल्यांकन में सुधार: रटने की प्रणाली के बजाय योग्यता-आधारित मूल्यांकन पर जोर, साथ ही 'PARAKH' (परख) नामक नया मूल्यांकन केंद्र।

§  डिजिटल शिक्षा: ऑनलाइन और डिजिटल शिक्षा (ICT) को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी मंच (NETF) की स्थापना

§  व्यय: शिक्षा क्षेत्र में जीडीपी के 6% हिस्से का सार्वजनिक निवेश का लक्ष्य

§  बहुविषयक (Multidisciplinary) शिक्षा

§  डिजिटल शिक्षा और कौशल विकास

§  लचीली डिग्री प्रणाली (Multiple Entry-Exit)

Thursday, March 12, 2026