राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NPE) 1986, जिसे तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नेतृत्व में
लागू किया गया, का
उद्देश्य भारत में शिक्षा प्रणाली से असमानताओं को दूर करना, महिलाओं, अनुसूचित जातियों (SC) और जनजातियों (ST) के लिए शैक्षिक अवसर समान करना था। इसने प्राथमिक शिक्षा
में सुधार के लिए 'ऑपरेशन ब्लैकबोर्ड' और 'नवोदय विद्यालय' जैसी पहल शुरू कीं, साथ ही 14 वर्ष की आयु तक अनिवार्य शिक्षा और शिक्षा पर जीडीपी का 6% खर्च करने का लक्ष्य रखा।
1986 की राष्ट्रीय शिक्षा नीति की मुख्य विशेषताएं:
§ समानता पर
जोर: शिक्षा में व्याप्त लैंगिक और सामाजिक असमानताओं को दूर करने के लिए विशेष
प्रयास करना।
§ ऑपरेशन
ब्लैकबोर्ड: प्राथमिक विद्यालयों में न्यूनतम आवश्यक सुविधाएं (जैसे- दो कक्षाएं, शौचालय, शिक्षक)
सुनिश्चित करने के लिए यह योजना शुरू की गई।
§ नवोदय
विद्यालय (पेस-सेटिंग स्कूल): ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाशाली बच्चों को मुफ्त
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए प्रत्येक जिले में नवोदय विद्यालय स्थापित किए
गए।
§ तकनीकी और
व्यावसायिक शिक्षा: कंप्यूटर साक्षरता और तकनीकी शिक्षा पर जोर दिया गया।
§ दूरस्थ
शिक्षा: मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) प्रणाली का
विस्तार किया गया।
§ शिक्षक
प्रशिक्षण: जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET) की
स्थापना का प्रस्ताव रखा गया।
§ पाठ्यचर्या:
एक राष्ट्रीय शिक्षा संरचना (10+2+3) को अपनाने
पर जोर दिया गया।
1992 में संशोधन:
1986 की नीति को 1992 में संशोधित किया गया था, जिसे 'कार्ययोजना 1992' के रूप में जाना जाता है, जिसमें नीति के कार्यान्वयन को और अधिक प्रभावी बनाने के
लिए कुछ बदलाव किए गए थे। इस नीति को बाद में नई शिक्षा नीति 2020 द्वारा प्रतिस्थापित कर दिया गया।
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