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Monday, March 23, 2026

अर्जन नियोजन (Acquisition planning)

 अर्जन नियोजन (Acquisition planning)- मानव शिशु जन्म के पश्चात अपने परिवार और परिवेश में प्राप्त भाषा को सीखता हैजिसे उसकी मातृभाषा कहते हैंकिंतु जब उस समाज में एक से अधिक भाषाओं का प्रयोग होता है या हो रहा होता हैतो ऐसी स्थिति में उसके प्राथमिक शिक्षण के दौरान कौन-सी भाषा का किस रूप में शिक्षण किया जाए तथा किस भाषा के माध्यम से शिक्षण प्रक्रिया संपन्न की जाएआदि इसके अंतर्गत आते हैं।

 अतः इसमें प्रथम भाषा का शिक्षणद्वितीय भाषा का शिक्षणशिक्षण की माध्यम भाषा का निर्धारण आदि संबंधी बिंदु आते हैं। उदाहरण के लिए भारतीय समाज में अंग्रेजी का प्रभुत्व धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है। इस कारण अब माता-पिता प्रारंभ से ही बच्चों को अंग्रेजी माध्यम के विद्यालयों में प्रवेश दिलाते हैंकिंतु विभिन्न शोधों द्वारा स्पष्ट हुआ है कि कोई भी बच्चा अपनी मातृभाषा में ही अपना सर्वोत्तम विकास कर सकता है।

 इसे ध्यान में रखते हुए भारत सरकार द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 जारी की गई हैजिसमें बच्चों को प्राथमिक शिक्षा उनकी मातृभाषा में ही दिए जाने पर बल दिया गया है। यह भाषा अर्जन संबंधी नियोजन का एक उपयुक्त उदाहरण है ।

भाषा नियोजन के लक्ष्य

भाषा नियोजन के निम्नलिखित लक्ष्य हैं-

§  भाषा शुद्धि 

§  भाषा पुनरुद्धार के भीतर से विचलन

§  भाषा सुधार

§  भाषा एकीकरण

§  भाषा के बोलने वालों की संख्या बढ़ाने का प्रयास

§  शब्दकोशीय समृद्धि

§  शब्दावली एकीकरण

§  लेखन शैली सरलीकरण

§  अंतरभाषायी संप्रेषण

§  भाषा संरक्षण

§  सहायक-कोड विकास (मूक बधिरों आदि के लिए)

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