कॉर्पस नियोजन (Corpus planning)- तकनीकी रूप से किसी भाषा के वास्तविक व्यवहार से संकलित पाठों का विशाल संग्रह
कार्पस कहलाता है। पाठों का यह संग्रह इतना विशाल और इतना वैविध्यपूर्ण होता है कि
उसमें उस भाषा के व्यवहार के सभी प्रयोग क्षेत्र, उनकी प्रयुक्तियाँ (registers), शब्दावली तथा विविध प्रकार की वाक्य रचनाएँ आदि सभी का समावेश हो जाता है।
किंतु हम जानते हैं कि भाषा निरंतर परिवर्तनशील एवं विकासशील इकाई है। अतः समय के
साथ नये शब्दों, अभिव्यक्तियों का सृजन आदि होता ही रहता है। अतः उसके लिए
आवश्यक शब्दावली, अभिव्यक्ति रूपों तथा भाषा के मानक रूप का निर्माण, जैसे- वर्तनी और व्याकरण, शब्दकोश निर्माण, भाषायी शुद्धता बनाए रखने संबंधी कार्य आदि कार्पस नियोजन के अंतर्गत आते हैं।
हिंदी के संदर्भ में देखा जाए तो भारत सरकार द्वारा
केंद्रीय हिंदी निदेशालय के अंतर्गत वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली निर्माण आयोग
को मानक हिंदी वर्तनी तथा शब्दावली के विकास का कार्य दिया गया है। आयोग द्वारा
समय-समय पर मानक हिंदी वर्तनी संबंधी पुस्तिका का प्रकाशन किया जाता है इनमें से
2016 में प्रकाशित मानक हिंदी वर्तनी संबंधी पुस्तिका को इस लिंक पर देख सकते हैं-
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