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Monday, March 23, 2026

माध्यमिक शिक्षा आयोग (1952–53)

 

भारत में माध्यमिक शिक्षा आयोग (1952-53), जिसे मुदलियार आयोग के नाम से जाना जाता है, का गठन 23 सितंबर 1952 को डॉ. ए. लक्ष्मणस्वामी मुदलियार की अध्यक्षता में किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य स्वतंत्रता के बाद देश की माध्यमिक शिक्षा प्रणाली का पुनर्गठन करना, उसे अधिक व्यावसायिक बनाना और छात्रों में लोकतांत्रिक नागरिकता का विकास करना था।

माध्यमिक शिक्षा आयोग (मुदलियार आयोग) की मुख्य बातें:

उद्देश्य: माध्यमिक शिक्षा को आत्मनिर्भर बनाना (केवल उच्च शिक्षा का माध्यम नहीं), व्यावसायिक कुशलता बढ़ाना, और चरित्र का विकास करना।

संगठनात्मक संरचना: आयोग ने 7 वर्ष की माध्यमिक शिक्षा (11-17 वर्ष आयु वर्ग) की सिफारिश की, जिसमें 3 वर्ष मिडिल (जूनियर) और 4 वर्ष हाई स्कूल/हायर सेकेंडरी शामिल हो।

पाठ्यक्रम में विविधता:

§  बहुउद्देशीय (Multipurpose) स्कूलों की स्थापना का सुझाव दिया गया ताकि छात्र अपनी क्षमता के अनुसार विषय चुन सकें।

§  शिक्षकों की स्थिति: शिक्षकों के लिए बेहतर प्रशिक्षण, उच्च वेतनमान और आवास सुविधाओं की सिफारिश की गई।

§  परीक्षा सुधार: मूल्यांकन में रटने की प्रवृत्ति कम करने और बोर्ड परीक्षाओं की संख्या कम करने का सुझाव।

§  इस आयोग ने भारत में 11+3 (11 वर्ष माध्यमिक + 3 वर्ष डिग्री) का शैक्षिक ढांचा तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

इन आयोगों ने शिक्षा की गुणवत्ता, संरचना और उद्देश्यों को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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