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Tuesday, November 24, 2020

भोजपुरी भाषा और साहित्य : डॉ. उदयनारायण तिवारी

 

भोजपुरी भाषा और साहित्य : डॉ. उदयनारायण तिवारी

भोजपुरी भाषा और साहित्य डॉ. उदयनारायण तिवारी एक महत्वपूर्ण कृति है, जो बिहार राष्ट्रभाषा परिषद से प्रकाशित है। यह पुस्तक लगभग 700 पृष्ठों में लिखी गई है। इसमें सर्वप्रथम उपोद्धात नाम से विषय-प्रवेश दिया गया है, जिसमें संसार की भाषाओं का वर्गीकरण से चर्चा आरंभ करते हुए भारोपीय परिवार और इस क्रम में भारतीय आर्यभाषाओं का परिचय देते हुए हिंदी की बात की गई है। इसके पश्चात हिंदी के विविध रूपों और बोलियों की चर्चा करते हुए डॉ. तिवारी भोजपुरी तक अपनी बात पहुँचाते हैं।

पुस्तक के प्रथम खंड में भोजपुरी संबंधी विविध पक्षों और भोजपुरी साहित्य की बात की गई है। इसी प्रकार द्वितीय खंड में भोजपुरी व्याकरण के प्रमुख पक्षों की बात की गई है। भोजपुरी भाषा, साहित्य और व्याकरण संबंधी चर्चा के बाद डॉ. तिवारी ने भोजपुरी भाषा संरचना के प्रमुख तत्वों को- ध्वनि-तत्व और रूप-तत्व के अंतर्गत विस्तार से समझाया है। पुस्तक के अंत में परिशिष्ट दिया गया है।

पुस्तक का लिंक-

भोजपुरी भाषा और साहित्य : उदय नारायण तिवारी


Monday, November 23, 2020

रविंद्रनाथ श्रीवास्तव : ‘अनुप्रयुक्त भाषविज्ञान : सिद्धांत एवं प्रयोग’

 

रविंद्रनाथ श्रीवास्तव के अनुप्रयुक्त भाषविज्ञान : सिद्धांत एवं प्रयोग (2000) पुस्तक में पाँच खंड हैं-

1.                  भाषा संदर्भ

2.                  अनुवाद

3.                  भाषा-शिक्षण

4.                  शैलीविज्ञान

5.                  कंप्यूटेशनल भाषाविज्ञान

इनमें से पहला खंड सैद्धांतिक चर्चा का है और शेष चार भाषाविज्ञान के अनुप्रयोग क्षेत्र हैं।

पुस्तक विवरण का लिंक-

अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान : सिद्धांत एवं प्रयोग : रवींद्रनाथ श्रीवस्तव

कामताप्रसाद गुरु और किशोरीदास वाजपेयी के लेखन में अंतर

 

कामता प्रसाद गुरु का व्याकरण पश्चिमी व्याकरण परंपरा से प्रभावित है। उदाहरण के लिए उन्होंने शब्दभेद (Parts of Speech) के वर्णन में पश्चिमी व्याकरण या अंग्रेजी व्याकरण में प्रचलित शब्दभेदों- संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया, क्रियाविशेषण, संबंधबोधक, समुच्चयबोधक और विस्मयादिबोधक (Noun, Pronoun, Adjective, Verb, Adverb, Preposition, Conjunction and Interjection) को लिया है।

किशोरीदास वाजपेयी का लेखन संस्कृत व्याकरण परंपरा पर आधारित है। उन्होंने संस्कृत व्याकरण आधारित शब्द/पद, उसके रूपों आदि की चर्चा की है। उन्होंने परसर्गों- ने, को, से, के लिए, का/की/के, में, पर आदि को विभक्ति ही कहा है। वर्तमान भाषावैज्ञानिक और व्याकरणिक चिंतन से स्पष्ट है कि इन्हें विभक्ति के बजाए परसर्ग’ (postposition) कहना ही अधिक उचित होगा।

Thursday, November 19, 2020

भास्कर डेटा स्टोरी:भारत में 75 करोड़ हुए इंटरनेट यूजर; 12 GB के साथ मंथली डेटा यूज में दुनिया में सबसे आगे

 

भास्कर डेटा स्टोरी:भारत में 75 करोड़ हुए इंटरनेट यूजर; 12 GB के साथ मंथली डेटा यूज में दुनिया में सबसे आगे

2 घंटे पहलेलेखक: रवींद्र भजनी


भारत में इंटरनेट ने 15 अगस्त 2020 को 25 साल पूरे किए। इसी महीने देश में 75 करोड़ यूजर का आंकड़ा भी पार हो चुका है। खास बात यह है कि पिछले चार साल में इंटरनेट यूजर दोगुने हुए हैं। यानी शुरुआती 21 साल में जितने यूजर जुड़े, उतने ही 2017 से अब तक जुड़ चुके हैं। यह बढ़ोतरी अकेले नहीं हुई, डेटा की खपत भी बढ़ी है। अब हर व्यक्ति हर महीने एवरेज 12 GB डेटा का इस्तेमाल कर रहा है, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है। 5 इंडिकेटर्स से समझते हैं देश में इंटरनेट के इस्तेमाल का स्टेटस...

1. पांच राज्यों में देश का 35% इंटरनेट यूजर बेस, बचे 23 राज्यों और 9 UTs में 65%

भारत में इंटरनेट यूजर बेस को रफ्तार मिली पिछले चार साल में। आंकड़ों में देखें तो 2016 में जहां 34 करोड़ लोग इंटरनेट से जुड़ गए थे, वहीं 2020 में अब 76 करोड़ लोग इंटरनेट यूज कर रहे हैं। खास बात यह है कि पिछले साल जून से अगस्त 2020 तक ही 10 करोड़ यूजर बढ़े हैं। यानी हर महीने करीब 71 लाख यूजर जुड़े हैं।

जब हम इन आंकड़ों का ब्रेकअप देखते हैं तो पता चलता है कि उन्हीं राज्यों में यूजर बढ़े हैं, जहां डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर था। टॉप 5 राज्यों में महाराष्ट्र (6.4 करोड़), आंध्रप्रदेश (5.9 करोड़), तमिलनाडु (5.1 करोड़), गुजरात (4.5 करोड़) और कर्नाटक (4.6 करोड़) शामिल हैं, जहां देश का 35% यूजर बेस रहता है। अब आप ही सोचिए कि बाकी 23 राज्यों और 9 केंद्रशासित प्रदेशों (UTs) में 65% इंटरनेट यूजर हैं और इनमें उत्तरप्रदेश, बिहार, राजस्थान, पश्चिम बंगाल जैसे बड़ी आबादी वाले राज्य शामिल हैं।

2. अभी दुनिया में सबसे आगे; अगले 5 साल में दोगुना हो जाएगा डेटा का इस्तेमाल
जियो के 2016 में लॉन्च और फ्री डेटा की पेशकश ने इंटरनेट यूजर भी बढ़ाए और डेटा का इस्तेमाल भी। असर यह हुआ कि अन्य कंपनियों को भी डेटा सस्ता करना पड़ा। डेटा इस्तेमाल की बात करें तो 2017 में हर महीने प्रतिव्यक्ति डेटा खपत 1.2 GB थी, जो जून-2020 में 10 गुना बढ़कर 12 GB तक पहुंच चुकी है। खास बात यह है कि यह रफ्तार और बढ़ने वाली है। एरिक्सन मोबिलिटी रिपोर्ट की जून में आई रिपोर्ट कहती है कि भारत में 2025 तक हर यूजर की डेटा खपत बढ़कर 25 GB तक पहुंच जाएगी।

3. मोबाइल इंटरनेट के यूजर सबसे ज्यादा और जरूरी नेटवर्क न होने से पिछड़ गए गांव

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