Total Pageviews

Wednesday, December 9, 2020

शैलीविज्ञान क्या है? (What is Stylistics)

शैलीविज्ञान क्या है? (What is Stylistics)

शैलीविज्ञान वह ज्ञानानुशासन है जिसके अंतर्गत साहित्यिक रचनाओं का विश्लेषण इस दृष्टि से किया जाता है कि उनमें सामान्य भाषा के अतिरिक्त कौन-सा तत्व जुड़ जाता है, जो उन्हें सामान्य भाषा से अलग साहित्य बना देता है। साहित्यिक रचनाओं में भी शब्दों और वाक्यों का प्रयोग वैसे ही दिखाई पड़ता है, जैसे हम अपने व्यवहार में या समाचार पत्रों आदि में करते हैं, किंतु अपनी संपूर्णता में साहित्यिक रचनाएँ इस प्रकार से कलात्मक या आनंददायक होती हैं कि हमें एक विशेष अनुभूति दे जाती हैं। शैलीविज्ञान उसी कलात्मक तत्व की खोज शैली’ (Style) के रूप में करता है।

एक शैलीवैज्ञानिक के लिए साहित्य भी भाषा ही है, किंतु वह भाषा विशेष प्रकार के कलात्मक तत्वों से युक्त होती है। शैलीवैज्ञानिक अपने अध्ययन में साहित्य की भाषा में प्रयुक्त कलात्मकता का विश्लेषण करता है। इसे एक वेन आरेख के माध्यम से इस प्रकार से समझ सकते हैं-


इसे समझने के लिए एक समाचार पत्र और एक साहित्यिक कृति से एक-एक पैराग्राफ लेकर देखते हैं-

समाचार पत्र

 

नए कृषि कानूनों के विरोध में किसानों के आंदोलन का आज 15वां दिन है। किसानों को मनाने के लिए 6 राउंड बातचीत के बाद सरकार की लिखित कोशिश भी बुधवार को नाकाम हो गई। सरकार ने कृषि कानूनों में बदलाव करने समेत 22 पेज का प्रपोजल किसानों को भेजा था, लेकिन बात बनने की बजाय ज्यादा बिगड़ गई। किसानों ने सरकारी कागज को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि अब आंदोलन तेज होगा। अब जयपुर-दिल्ली और आगरा-दिल्ली हाईवे समेत तमाम नेशनल हाईवे जाम किए जाएंगे। इस बीच सरकार के दूसरे प्रस्ताव का भी इंतजार रहेगा।

...

प्रस्ताव में भी राजनीति, हुड्डा और बादल पर डाली बात

किसानों ने सरकार से पूछा था कि किसकी सिफारिश पर कानून आए। सरकार ने लिखित में दिया है कि 2010 में हरियाणा के उस वक्त के मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा की लीडरशिप में कमेटी बनी थी। सरकार ने हुड्डा और पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के नामों का ही जिक्र किया है, जबकि कमेटी में बंगाल, बिहार और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री भी शामिल थे।

केंद्रीय मंत्री बोले- किसान आंदोलन में चीन-पाकिस्तान का हाथ

सरकार कानून वापस नहीं लेने की जिद पर अड़ी है, तो किसान भी अपनी बात पर डटे हैं। बयानबाजी भी हो रही है। केंद्रीय खाद्य आपूर्ति राज्य मंत्री रावसाहेब दानवे ने का कहना है कि किसानों के आंदोलन में पाकिस्तान का चीन का हाथ है। दानवे ने कहा कि पहले CAA और NRC को लेकर मुसलमानों को भड़काया गया। ये कोशिशें नाकाम रही तो, अब किसानों को उकसाया जा रहा है। केंद्रीय मंत्री ने यह बात बुधवार को औरंगाबाद में हेल्थ सेंटर के इनॉगरेशन प्रोग्राम में कही।

साहित्य-

राष्ट्र के सेवक ने कहा - देश की मुक्ति का एक ही उपाय है और वह है नीचों के साथ भाईचारे का सलूक, पतितों के साथ बराबरी का बर्ताव। दुनिया में सभी भाई हैं, कोई नीच नहीं, कोई ऊँच नहीं।

दुनिया ने जय-जयकार की - कितनी विशाल दृष्टि है, कितना भावुक हृदय!

उसकी सुंदर लड़की इंदिरा ने सुना और चिंता के सागर में डूब गई।

राष्ट्र के सेवक ने नीची जाति के नौजवान को गले लगाया।

दुनिया ने कहा - यह फरिश्ता है, पैगंबर है, राष्ट्र की नैया का खेवैया है।

इंदिरा ने देखा और उसका चेहरा चमकने लगा।

राष्ट्र का सेवक नीची जाति के नौजवान को मंदिर में ले गया, देवता के दर्शन कराए और कहा - हमारा देवता गरीबी में है, जिल्लत में है, पस्ती में है।

दुनिया ने कहा - कैसे शुद्ध अंतःकरण का आदमी है! कैसा ज्ञानी!

इंदिरा ने देखा और मुसकराई।

इंदिरा राष्ट्र के सेवक के पास जाकर बोली - श्रद्धेय पिताजी, मैं मोहन से ब्याह करना चाहती हूँ।

राष्ट्र के सेवक ने प्यार की नजरों से देखकर पूछा - मोहन कौन है?

इंदिरा ने उत्साह भरे स्वर में कहा - मोहन वही नौजवान है, जिसे आपने गले लगाया, जिसे आप मंदिर में ले गए, जो सच्चा, बहादुर और नेक है।

राष्ट्र के सेवक ने प्रलय की आँखों से उसकी ओर देखा और मुँह फेर लिया।

 

(संदर्भ- https://www.bhaskar.com/national/news/farmers-protest-kisan-andolan-delhi-burari-live-updates-haryana-punjab-delhi-chalo-march-latest-news-today-10-december-127998351.html)

(संदर्भ- राष्ट्र का सेवक, प्रेमचंद। लिंक- http://www.hindisamay.com/content/3834/1/प्रेमचंद--लोककथा-राष्ट्र-का-सेवक.cspx)

उक्त दोनों खंडों में देख सकते हैं कि शब्दों और वाक्यों का प्रयोग एक जैसा सामान्य ही है। ऐसा नहीं कि समाचार वाले में किसी एक प्रकार की हिंदी और साहित्य वाले में दूसरे प्रकार की हिंदी हो। दोनों में शब्द या वाक्य रचनाएँ भिन्न-भिन्न हों, किंतु फिर भी एक सामान्य भाषा व्यवहार (सूचनाओं का आदान-प्रदान) है, जबकि दूसरा साहित्य। शैलीविज्ञान यही जानने की कोशिश करता है कि दूसरे में वे कौन-से तत्व हैं, जो उसे साहित्य बना देते हैं।


Monday, December 7, 2020

वाक्य में अन्य संबंध (कारकेतर संबंध)

 वाक्य में अन्य संबंध (कारकेतर संबंध)

वाक्य में कारक संबंधों से इतर संबंधों को अन्य संबंध कहते हैं। इसके अंतर्गत मुख्यतः पूरक संबंध और संबंधवाची आते हैं, जिन्हें विस्तार में इस प्रकार से देख सकते हैं-

1. पूरक पदबंध

कोप्यूला वाक्यों में तीन प्रकार के पद या पदबंध होते हैं- मुख्य पदबंध, पूरक पदबंध और कोप्यूला क्रिया। इन्हें सूत्र रूप में इस प्रकार से प्रदर्शित कर सकते हैं-

कोप्यूला वाक्य = मुख्य पदबंध +       पूरक पदबंध   +       कोप्यूला क्रिया

उदाहरण

                   मोहन             +       शिक्षक          +       है

इस प्रकार पूरक पदबंध की परिभाषा देते हुए कहा जा सकता है कि-

“वे पदबंध जो कोप्यूला वाक्यों में मुख्य पदबंध से संबंधित सूचना देते हैं, पूरक पदबंध का कार्य करते हैं।”

पूरक पदबंध तीन प्रकार के होते हैं-

(1) संज्ञा पूरक पदबंध- जिन कोप्यूला वाक्यों में पूरक पदबंध के स्थान पर संज्ञा पद शीर्ष के रूप में आते हैं, संज्ञा पूरक पदबंध कहलाते हैं, जैसे-

·       मोहन शिक्षक है।

·       रमेश बहुत बड़ा खिलाड़ी है।

·       वह मोहिनी है।

(2) विशेषण पूरक पदबंध- जिन कोप्यूला वाक्यों में पूरक पदबंध के स्थान पर विशेषण पद शीर्ष के रूप में आते हैं, विशेषण पूरक पदबंध कहलाते हैं, जैसे-

·       मोहन सुंदर है।

·       रमेश बहुत लंबा है।

·       वह चित्र मनमोहक है।

(3) क्रियाविशेषण पूरक पदबंध- जिन कोप्यूला वाक्यों में पूरक पदबंध के स्थान पर क्रियाविशेषण पद शीर्ष के रूप में आते हैं, क्रियाविशेषण पूरक पदबंध कहलाते हैं। प्रो. सूरजभान सिंह (2000) द्वारा हिंदी का वाक्यात्मक व्याकरण में परसर्गीय पदबंध के रूप में आने वाले संज्ञा पदबंधों को ही क्रियाविशेषण पूरक पदबंध कहा गया है, जैसे-

·       मोहन घर में है।

·       शीला छत पर है।

अपने मूल स्वरूप में ये पदबंध अधिकरण को दर्शाते हैं। अतः इन पर पुनर्विचार किया जा सकता है।

 2. संबंधवाची

किसी वाक्य में आए हुए दो या दो से अधिक संज्ञा पदों या पदबंधों को आपस में जोड़ने के लिए जिसका प्रयोग होता है, उसे संबंधवाची कहते हैं। हिंदी में इसके लिए का/के/की (रा/रे/री) का प्रयोग किया जाता है। संस्कृत में इसके लिए षष्ठी विभक्ति का प्रयोग किया जाता है। इस कारण कुछ विद्वानों इसे संबंध कारक भी कहा गया है। किंतु चूँकि यह संज्ञा पदबंध को वाक्य की मुख्य क्रिया से नहीं जोड़ता, इसलिए अधिकांश विद्वानों द्वारा इसे कारक से इतर अन्य संबंध के अंतर्गत रखा गया है।

उदाहरण-

·       राम की पुस्तक

·       मेरी कलम

·       उसके भाई का बेटा

·       तुम्हारे काम का आदमी

 

Thursday, December 3, 2020

सुनिति कुमार चटर्जी

 

सुनिति कुमार चटर्जी

सुनिति कुमार चटर्जी एक सुप्रसिद्ध आधुनिक भारतीय भाषाविद हैं। इन्होंने भारतीय आर्यभाषाओं पर विस्तृत कार्य किया है। भारतीय आर्यभाषाओं के संदर्भ में भारतीय आर्यभाषाएँ और हिंदी इनकी महत्वपूर्ण कृति है। इसमें चटर्जी ने जार्ज ग्रियर्सन द्वारा भारत का भाषा सर्वेक्षण में किए गए भारतीय भाषाओं के वर्गीकरण से असहमति व्यक्त की है और अधिक तार्किक रूप से वर्ग-उपवर्ग बनाए हैं। इनके द्वारा बनाए गए भाषाओं के वर्ग-उपवर्ग इस प्रकार हैं-



इसके अलावा डॉ. चटर्जी द्वारा बंगाली भाषा पर भी गहन कार्य किया गया है। इस संबंध में उनकी कृति ‘The Origin and Development of Bengali Language’ (1926) देखी जा सकती है। डॉ. चटर्जी की एक और रचना राजस्थानी भाषाभी प्राप्त होती है।

Tuesday, December 1, 2020

शब्द-निर्माण की प्रक्रिया और संधि (The process of Word Formation and Sandhi)

शब्द-निर्माण की प्रक्रिया और संधि

भाषा सतत् प्रवाहशील है। समय के साथ इसमें निरंतर नए शब्द जुड़ते रहते हैं। भाषायी समाज की प्रगति के साथ नई-नई संकल्पनाएँ भाषा में आती हैं और उनके लिए नए-नए शब्दों की आवश्यकता पड़ती है। विश्व की लगभग सभी भाषाओं में नए शब्द निर्मित करने के लिए मूलतः दो प्रक्रियाओं का प्रयोग किया जाता है-

(क)             बद्ध रूपिमों (उपसर्ग, प्रत्ययों) का योग

(ख)             एकाधिक शब्दों का योग

जब हम एक से अधिक शब्दों को जोड़कर कोई नया शब्द बनाते हैं, तो इस प्रक्रिया को समास कहते हैं। चूँकि इसमें दो शब्दों को जोड़ा जाता है इसलिए यह एक रूपवैज्ञानिक (Morphological) प्रक्रिया है, क्योंकि रूपविज्ञान (Morphology) का विस्तार रूपिम से शब्द/पद तक है। हम जानते हैं कि रूपविज्ञान में दो प्रकार की रूपिमिक प्रक्रियाओं का अध्ययन किया जाता है-

·      व्युत्पादन

·      रूपसाधन

एक से अधिक शब्दों को जोड़कर नया शब्द बनाने की प्रक्रिया (समास) व्युत्पादन (Derivation) के अंतर्गत आता है। समास को अंग्रेजी में ‘Compounding’ कहते हैं और सामासिक शब्द को ‘Compound Word’ कहते हैं।

संधि व्युत्पादन या रूपसाधन की प्रक्रिया नहीं है। अतः हम कह सकते हैं कि संधि नए शब्द बनाने की प्रक्रिया नहीं है। एक से अधिक शब्दों को जोड़ने में दो प्रकार की प्रक्रियाएँ एक साथ कार्य करती हैं-

प्रक्रिया-01 => शब्द + शब्द = (संकल्पना + संकल्पना)

प्रक्रिया-02 => शब्द + शब्द = (ध्वनि समूह+ ध्वनि समूह)

                       जारी (Continue) ............