संकटापन्न भाषाएँ (Endangered Languages) वे भाषाएँ हैं जिनके बोलने वालों की संख्या लगातार घट रही
है और जिनके भविष्य में लुप्त होने का खतरा है। जब किसी भाषा का प्रयोग नई पीढ़ी
द्वारा नहीं किया जाता और वह केवल वृद्ध पीढ़ी तक सीमित रह जाती है, तब वह भाषा संकटापन्न मानी जाती है। भाषाओं का लोप केवल
भाषाई हानि नहीं है, बल्कि इसके साथ किसी समुदाय का सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पारंपरिक ज्ञान भी नष्ट हो जाता है।
परिभाषा (Definition)
संकटापन्न भाषा वह भाषा है जिसके अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा हो क्योंकि उसके वक्ताओं की
संख्या कम हो रही है और उसका पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरण (Intergenerational
Transmission) बाधित हो गया है।
English Definition:
An endangered language is a language that is at risk of falling out of use
because its speakers are decreasing in number and the language is no longer
being transmitted effectively to younger generations.
भाषाओं के संकटापन्न होने के कारण (Causes of Language
Endangerment)
1. प्रमुख भाषाओं का प्रभाव (Dominance of Major Languages)
लोग शिक्षा, रोजगार और सामाजिक प्रतिष्ठा के लिए बड़ी भाषाओं को अपनाने लगते हैं।
2. शहरीकरण एवं प्रवासन (Urbanization and Migration)
गाँवों से शहरों की ओर पलायन के कारण स्थानीय भाषाओं का
प्रयोग कम हो जाता है।
3. शिक्षा की भाषा (Language of Education)
विद्यालयों में स्थानीय भाषा के स्थान पर किसी अन्य भाषा का
प्रयोग होने से मातृभाषा का उपयोग घटता है।
4. सामाजिक एवं आर्थिक दबाव (Socio-economic Pressure)
रोजगार और आर्थिक अवसरों के लिए लोग अपनी पारंपरिक भाषा
छोड़ सकते हैं।
5. वैश्वीकरण (Globalization)
वैश्विक संचार और मीडिया के कारण कुछ प्रमुख भाषाओं का
प्रभाव बढ़ता है।
संकटापन्न भाषाओं के स्तर (Levels of Language
Endangerment)
1. असुरक्षित भाषा (Vulnerable Language)
बच्चे भाषा बोलते हैं, लेकिन उसका प्रयोग सीमित क्षेत्रों में होता है।
2. निश्चित रूप से संकटापन्न (Definitely Endangered)
बच्चे भाषा को मातृभाषा के रूप में नहीं सीखते।
3. गंभीर रूप से संकटापन्न (Severely Endangered)
भाषा मुख्यतः वृद्ध पीढ़ी द्वारा बोली जाती है।
4. अत्यंत संकटापन्न (Critically Endangered)
बहुत कम वृद्ध वक्ता ही भाषा का प्रयोग करते हैं।
5. लुप्त भाषा (Extinct Language)
जब भाषा का कोई भी जीवित वक्ता नहीं बचता।
संकटापन्न भाषाओं के संरक्षण का महत्त्व (Importance of Preserving
Endangered Languages)
1. भाषाई विविधता का संरक्षण (Preservation of Linguistic
Diversity)
प्रत्येक भाषा मानव भाषिक विरासत का एक अनूठा भाग है।
2. सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण (Preservation of Cultural
Heritage)
भाषा में समुदाय की संस्कृति, परंपराएँ और लोकज्ञान निहित होते हैं।
3. पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण (Preservation of Indigenous
Knowledge)
स्थानीय चिकित्सा, कृषि, पर्यावरण और जीवन-शैली संबंधी ज्ञान भाषा में सुरक्षित रहता
है।
4. भाषावैज्ञानिक अनुसंधान (Linguistic Research)
संकटापन्न भाषाएँ भाषाविज्ञान के लिए महत्त्वपूर्ण अध्ययन
सामग्री प्रदान करती हैं।
संरक्षण के उपाय (Measures for Preservation)
1. भाषा प्रलेखन (Language Documentation)
भाषा की ध्वनियों, शब्दावली, व्याकरण और मौखिक साहित्य का रिकॉर्ड तैयार करना।
2. शब्दकोश एवं व्याकरण निर्माण (Preparation of Dictionaries
and Grammars)
भाषा की संरचना का लिखित विवरण तैयार करना।
3. मातृभाषा आधारित शिक्षा (Mother Tongue-based Education)
विद्यालयों में स्थानीय भाषाओं को स्थान देना।
4. डिजिटल अभिलेखीकरण (Digital Archiving)
ऑडियो, वीडियो और पाठ्य सामग्री को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखना।
5. समुदाय की भागीदारी (Community Participation)
भाषा संरक्षण में स्थानीय समुदाय को सक्रिय रूप से शामिल
करना।
भारत की कुछ संकटापन्न भाषाएँ (Some Endangered Languages of
India)
- टोतो
(Toto)
- बिरहोर
(Birhor)
- कोरकू
की कुछ बोलियाँ
- ग्रेट
अंडमानीज़ (Great Andamanese)
- शोम्पेन
(Shompen)
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