क्षेत्र भाषाविज्ञान (Field
Linguistics) में व्याकरण निर्माण एक
महत्वपूर्ण कार्य है। इसका उद्देश्य किसी भाषा की संरचना का वैज्ञानिक और
व्यवस्थित वर्णन प्रस्तुत करना होता है। चूँकि इसमें अध्ययन की भाषा का लिखित
रिकार्ड न के बराबर होता है, इसलिए यह कार्य मुख्यतः क्षेत्रीय अध्ययन (fieldwork) के दौरान
भाषा-भाषियों से प्राप्त भाषाई आँकड़ों के आधार पर किया जाता है। इसे लिए
निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझ सकते हैं-
1. भाषाई
सामग्री का संकलन (Collection
of Linguistic Data)
व्याकरण तैयार करने का पहला चरण भाषा-भाषियों से शब्दों, वाक्यों, वार्तालापों, लोककथाओं
और अन्य भाषाई सामग्री का संकलन करना है। यह सामग्री रिकॉर्डिंग, साक्षात्कार
और प्रत्यक्ष अवलोकन द्वारा प्राप्त की जाती है।
2. ध्वन्यात्मक
विश्लेषण (Phonetic
and Phonological Analysis)
संकलित सामग्री के आधार पर भाषा की ध्वनियों का अध्ययन किया जाता है। इसमें
स्वरों, व्यंजनों, बलाघात (stress), स्वराघात (intonation) तथा ध्वनि-परिवर्तनों का विश्लेषण किया जाता है। इसके आधार पर भाषा की
ध्वनि-प्रणाली (sound
system) का वर्णन किया जाता है।
3. रूपावैज्ञानिक
विश्लेषण (Morphological
Analysis)
इस चरण में शब्दों की आंतरिक संरचना का अध्ययन किया जाता है। मूल शब्द (root), उपसर्ग (prefix), प्रत्यय (suffix), समास, शब्द-निर्माण
तथा रूप-परिवर्तन की प्रक्रियाओं का विश्लेषण किया जाता है।
4. वाक्य-विन्यास
का अध्ययन (Syntactic
Analysis)
भाषा में वाक्य कैसे बनते हैं, शब्दों का
क्रम क्या है तथा विभिन्न प्रकार के वाक्यों की संरचना कैसी है—इनका अध्ययन किया
जाता है। इससे भाषा के व्याकरणिक नियमों की पहचान होती है।
5. अर्थवैज्ञानिक
विश्लेषण (Semantic
Analysis)
शब्दों, पदों और वाक्यों के अर्थ तथा उनके पारस्परिक संबंधों का अध्ययन किया जाता है।
इससे भाषा की आर्थी-व्यवस्था को समझने में सहायता मिलती है।
6. व्याकरणिक
नियमों का निर्धारण (Formulation
of Grammatical Rules)
विश्लेषण के बाद भाषा के ध्वनि, रूप और
वाक्य संबंधी नियमों को व्यवस्थित रूप से निर्धारित किया जाता है। ये नियम भाषा की
संरचना को स्पष्ट करते हैं।
7. व्याकरण
का लेखन (Writing
the Grammar)
अंतिम चरण में सभी निष्कर्षों को एक व्यवस्थित व्याकरण के रूप में प्रस्तुत
किया जाता है। सामान्यतः इसमें निम्नलिखित अध्याय होते हैं:
- ध्वनि-व्यवस्था
(Phonology)
- रूप-रचना
(Morphology)
- वाक्य-विन्यास
(Syntax)
- अर्थ-विज्ञान
(Semantics)
- उदाहरण
एवं पाठ-सामग्री (Texts and Examples)
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