इसे निम्नलिखित शीर्षकों के माध्यम से समझ सकते हैं-
1. स्वाभाविक भाषा-प्रयोग का अध्ययन (Study of Natural Language Use)
इस विधि से भाषा का वास्तविक और दैनिक प्रयोग देखने को मिलता है, जो
औपचारिक साक्षात्कारों में संभव नहीं होता।
2. सांस्कृतिक
संदर्भ की समझ (Understanding
Cultural Context)
भाषा और संस्कृति के घनिष्ठ संबंध को समझने में सहायता मिलती है।
3. विश्वसनीय
डेटा प्राप्ति (Collection
of Reliable Data)
समुदाय के बीच रहकर शोधकर्ता अधिक प्रामाणिक और विश्वसनीय भाषाई सामग्री
प्राप्त कर सकता है।
4. भाषिक
विविधता का अध्ययन (Study
of Linguistic Variation)
विभिन्न आयु, लिंग, व्यवसाय और सामाजिक समूहों के भाषा-प्रयोग का अध्ययन किया जा सकता है।
5. विश्वास
निर्माण (Building
Rapport and Trust)
समुदाय के साथ निकट संबंध स्थापित होने से भाषा-भाषी अधिक सहजता से जानकारी
प्रदान करते हैं।
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