क्षेत्र भाषाविज्ञान (Field
Linguistics) में सूचनादाता
(Consultant/Informant) वह
व्यक्ति होता है जो अपनी मातृभाषा या बोली के बारे में जानकारी प्रदान करता है। सूचनादाताओं
का साक्षात्कार (Interviewing
the Consultants) भाषाई डेटा संकलन की एक महत्वपूर्ण विधि है, जिसके
माध्यम से शोधकर्ता भाषा की ध्वनियों, शब्दावली, व्याकरण, अर्थ तथा
भाषा-प्रयोग संबंधी जानकारी प्राप्त करता है।
परिभाषा (Definition)
सूचनादाताओं का साक्षात्कार वह प्रक्रिया है जिसमें
शोधकर्ता भाषा-भाषियों से प्रत्यक्ष संवाद करके भाषाई एवं सांस्कृतिक जानकारी
एकत्रित करता है।
English Definition:
Interviewing the consultants is a method of data collection in which a field
linguist directly interacts with native speakers to obtain linguistic and
cultural information about a language.
साक्षात्कार के उद्देश्य (Objectives
of Interviewing the Consultants)
क्षेत्र भाषाविज्ञान
में साक्षात्कार के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं-
1. भाषाई
डेटा का संकलन (Collection
of Linguistic Data)
भाषा की ध्वनियों, शब्दों, वाक्यों और व्याकरणिक संरचनाओं की जानकारी प्राप्त करना।
2. भाषिक
प्रयोग की जानकारी (Understanding
Language Use)
भाषा के वास्तविक और दैनिक प्रयोग को समझना।
3. सांस्कृतिक
जानकारी प्राप्त करना (Gathering
Cultural Information)
भाषा से संबंधित सांस्कृतिक परंपराओं, लोककथाओं
और सामाजिक व्यवहारों की जानकारी एकत्रित करना।
4. डेटा का
सत्यापन (Verification
of Data)
पूर्व में संकलित भाषाई सामग्री की पुष्टि और सुधार करना।
साक्षात्कार की प्रक्रिया (Process
of Interviewing Consultants)
क्षेत्र भाषाविज्ञान
में भाषायी डेटा के संकलन में साक्षात्कार की भूमिका आधारभूत है। अतः इसकी संगठित तैयारी
आवश्यक है। इस प्रक्रिया के प्रमुख चरण निम्नलिखित हैं-
1. उपयुक्त
सूचनादाता का चयन (Selection
of Suitable Consultants)
ऐसे भाषा-भाषियों का चयन किया जाता है जो भाषा के अच्छे जानकार हों और स्पष्ट
रूप से संवाद कर सकें।
2. विश्वास
एवं सौहार्द स्थापित करना (Building Rapport and Trust)
साक्षात्कार से पहले सूचनादाता के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध स्थापित करना आवश्यक
है, ताकि वह सहजता से जानकारी प्रदान कर सके।
3. प्रश्नों
की तैयारी (Preparation
of Questions)
अनुसंधान के उद्देश्यों के अनुसार प्रश्नों की सूची तैयार की जाती है।
4. साक्षात्कार
का संचालन (Conducting
the Interview)
शोधकर्ता प्रश्न पूछता है और सूचनादाता उत्तर देता है। आवश्यक होने पर
अतिरिक्त प्रश्न भी पूछे जाते हैं।
5. डेटा का
अभिलेखन (Recording
the Data)
उत्तरों को लिखित रूप में दर्ज किया जाता है या ऑडियो/वीडियो रिकॉर्डिंग की
जाती है।
6. सत्यापन
और पुनर्पुष्टि (Verification
and Cross-checking)
प्राप्त जानकारी की शुद्धता की पुष्टि अन्य सूचनादाताओं या अतिरिक्त
साक्षात्कारों के माध्यम से की जाती है।
साक्षात्कार के प्रकार (Types of Interviews)
क्षेत्र भाषाविज्ञान
में डेटा संकलन में साक्षात्कार की भूमिका आधारभूत है। यह साक्षात्कार कई प्रकार से
किया जा सकता है। स्वरूप के आधार पर इसके तीन प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं-
1. संरचित
साक्षात्कार (Structured
Interview)
पूर्वनिर्धारित प्रश्नों के आधार पर किया जाने वाला साक्षात्कार।
2. अर्ध-संरचित
साक्षात्कार (Semi-structured
Interview)
कुछ प्रश्न पूर्वनिर्धारित होते हैं, जबकि कुछ
प्रश्न परिस्थिति के अनुसार पूछे जाते हैं।
3. असंरचित
साक्षात्कार (Unstructured
Interview)
मुक्त वार्तालाप के रूप में किया जाने वाला साक्षात्कार, जिसमें
प्रश्न पहले से निश्चित नहीं होते।
एक अच्छे साक्षात्कारकर्ता के
गुण (Qualities of a Good Interviewer)
cfefegegb
- धैर्य
(Patience)
- विनम्रता
(Politeness)
- निष्पक्षता
(Objectivity)
- अच्छा
श्रवण कौशल (Good Listening Skills)
- भाषा
और संस्कृति के प्रति संवेदनशीलता (Cultural Sensitivity)
- स्पष्ट
संप्रेषण क्षमता (Clear Communication Skills)
साक्षात्कार पद्धति के लाभ और सीमाएँ (Advantages and
limitations of the interview method)
क्षेत्र भाषाविज्ञान (Field Linguistics) में भाषाई डेटा संग्रह के लिए साक्षात्कार पद्धति आधारभूत विधि है। इसके
प्रमुख लाभ और सीमाएँ इस प्रकार हैं-
लाभ (Advantages)
- प्रत्यक्ष और
प्रामाणिक जानकारी प्राप्त होती है।
- अस्पष्ट उत्तरों को
तुरंत स्पष्ट किया जा सकता है।
- भाषा के सांस्कृतिक और
सामाजिक संदर्भों को समझने में सहायता मिलती है।
- विश्वसनीय भाषाई डेटा
प्राप्त होता है।
सीमाएँ (Limitations)
- समय और श्रम अधिक लगता
है।
- सूचनादाता कभी-कभी
अपूर्ण या पक्षपातपूर्ण जानकारी दे सकता है।
- शोधकर्ता की उपस्थिति
उत्तरों को प्रभावित कर सकती है।
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