1. अनुसंधान
के उद्देश्यों का निर्धारण (Determining the Research Objectives)
प्रश्नावली तैयार करने से पहले यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि अध्ययन का
उद्देश्य क्या है। उदाहरण के लिए, ध्वनियों, शब्दावली, व्याकरण, वाक्य-विन्यास या भाषा-प्रयोग का अध्ययन।
2. सूचना के
प्रकार का चयन (Selection
of the Type of Information)
यह निर्धारित किया जाता है कि किस प्रकार की भाषाई जानकारी एकत्रित करनी है, जैसे—
- ध्वन्यात्मक जानकारी (Phonetic Information)
- शब्दावली (Vocabulary)
- व्याकरणिक संरचनाएँ (Grammatical Structures)
- सामाजिक-भाषिक जानकारी
(Sociolinguistic Information)
3. प्रश्नों
का निर्माण (Framing
of Questions)
प्रश्न सरल, स्पष्ट और उद्देश्यपूर्ण होने चाहिए। जटिल तथा अस्पष्ट प्रश्नों से बचना चाहिए
ताकि भाषा-भाषी उन्हें आसानी से समझ सके।
4. प्रश्नों
का तार्किक क्रम (Logical
Arrangement of Questions)
प्रश्नों को सरल से कठिन तथा सामान्य से विशिष्ट क्रम में व्यवस्थित किया जाना
चाहिए। इससे उत्तरदाता सहज अनुभव करता है।
5. भाषाई
स्तरों का समावेश (Inclusion
of Different Linguistic Levels)
प्रश्नावली में भाषा के विभिन्न स्तरों से संबंधित प्रश्न शामिल किए जा सकते
हैं:
- ध्वनि (Phonology)
- रूप (Morphology)
- वाक्य (Syntax)
- अर्थ (Semantics)
- प्रयोग (Pragmatics)
6. परीक्षण
या पूर्व-परीक्षण (Pilot
Testing)
मुख्य सर्वेक्षण से पहले प्रश्नावली का सीमित स्तर पर परीक्षण किया जाता है।
इससे त्रुटियों और अस्पष्टताओं का पता चलता है तथा आवश्यक संशोधन किए जाते हैं।
7. उत्तरों
के अभिलेखन की व्यवस्था (Provision
for Recording Responses)
प्रश्नावली में उत्तरों को लिखने, रिकॉर्ड
करने या टिप्पणियाँ जोड़ने के लिए पर्याप्त स्थान होना चाहिए।
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