प्रो. गिरीश नाथ झा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के संस्कृत एवं प्राच्यविद्या अध्ययन संस्थान में संगणकीय भाषाविज्ञान के प्रोफेसर हैं। वे जेएनयू के इंजीनियरिंग विद्यालय, भाषाविज्ञान केंद्र तथा स्पेशल सेंटर फॉर ई-लर्निंग केंद्र में भी समवर्ती संकाय के रूप में कार्यरत हैं। प्रो. झा भारत सरकार के वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग (https://cstt.education.gov.in/en) के अध्यक्ष रह चुके हैं, और उन्होंने इसके सर्च योग्य शब्दावली एप्लिकेशन (https://shabd.education.gov.in) को सफलतापूर्वक डिज़ाइन और विकसित किया है। जेएनयू में वे “संस्कृत एवं प्राच्यविद्या अध्ययन संस्थान” के संस्थापक डीन तथा उससे पूर्व “स्पेशल सेंटर फॉर संस्कृत स्टडीज” के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। उन्होंने जेएनयू में अंतरराष्ट्रीय सहयोग निदेशक और आयुर्वेद जीवविज्ञान में समन्वयक के पद भी कार्य किया हैं। उनके शोधक्षेत्रों में भारतीय भाषाएँ, कॉर्पस एवं मानक, संस्कृत/हिंदी भाषाविज्ञान, शब्दकोशविज्ञान, भारतीय ज्ञान परंपराएँ, मशीन अनुवाद, ई-लर्निंग, वेब/डेटाबेस तकनीकें, सॉफ्टवेयर डिज़ाइन तथा स्थानीयकरण शामिल हैं। वर्ष 2009-12 तक प्रो. झा ने अमेरिका के मैसाचुसेट्स डार्टमाउथ विश्वविद्यालय (University of Massachusetts Dartmouth) के भारतीय अध्ययन केंद्र द्वारा " मुकेश और प्रीति छत्तर प्रतिष्ठित विज्ञान के इतिहास के प्रोफेसर" (Mukesh and Priti Chatter Distinguished Professor of History of Science) के रूप में नियुक्त किया गया था। उन्हें 2014 और 2016 में जर्मनी के वुर्जबर्ग विश्वविद्यालय में डिजिटल ह्यूमैनिटीज़ एवं इंडोलॉजी पढ़ाने हेतु डीएएडी फेलोशिप प्राप्त हुई थी। वे फ्लोरेंस विश्वविद्यालय (इटली) और योग्याकार्ता स्टेट यूनिवर्सिटी (इंडोनेशिया) में विज़िटिंग प्रोफेसर भी रह चुके हैं। उन्हें संस्कृत के लिए दत्तपीठ आस्थान विद्वान पुरस्कार तथा शारदा लिपि के पुनरुद्धार हेतु केईसीएसएस पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
प्रो. झा ने जेएनयू से भाषाविज्ञान में स्नातकोत्तर, एम.फिल. तथा विद्यावारिधि (कम्प्यूटेशनल भाषाविज्ञान) की उपाधि प्राप्त की, और 1999 में अमेरिका के इलिनोइस अर्बाना-शैंपेन विश्वविद्यालय से भाषाविज्ञान ("प्राकृतिक भाषा इंटरफेस") में एक और स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। जेएनयू में आने से पूर्व वर्ष 2002 तक वे अमेरिका में सॉफ्टवेयर इंजीनियर और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट स्पेशलिस्ट के रूप में कार्यरत रहे। प्रो. झा की स्प्रिंगर, कैंब्रिज स्कॉलर पब्लिशिंग सहित अन्य प्रकाशकों से अनेक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, और उनके नाम 156 से अधिक शोधपत्र/लेख तथा 466 से अधिक आमंत्रित व्याख्यान दर्ज हैं। उन्होंने अब तक 52 पीएचडी और 46 एम.फिल. शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया है। प्रो. झा गूगल, न्यूअन्स, स्विफ्टकी, माइक्रोसॉफ्ट रिसर्च, माइक्रोसॉफ्ट कॉर्पोरेशन, लिंग्विस्टिक डेटा कंसोर्टियम (यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया), यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स डार्टमाउथ तथा ईजी (EZ) डेटा इंटेलिजेंस जैसी संस्थाओं में परामर्श विशेषज्ञ के रूप में कार्य कर चुके हैं। प्रो. झा भारतीय भाषा प्रौद्योगिकी हेतु कई प्रायोजित परियोजनाएँ पूर्ण कर चुके हैं, और उन्होंने भारतीय भाषाओं के लिए कॉर्पस एवं मानक विकसित करने हेतु 17 भारतीय विश्वविद्यालयों/संस्थानों के एक संघ का नेतृत्व किया है। उनके कार्य एवं पूर्ण जीवनवृत्त के बारे में अधिक जानकारी https://sanskrit.jnu.ac.in प्राप्त की जा सकती है।
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