Total Pageviews

Thursday, October 10, 2019

हिंदी में संयुक्त तथा यौगिक क्रियाएं


हिंदी में संयुक्त तथा यौगिक क्रियाएं
श्री गिरीश चंद्र पाण्डेय
प्रभारी लीला, शोधार्थी, भाषाविज्ञान एवं भाषा प्रौद्योगिकी

 संयुक्त क्रिया के संबंध में हम पढ़ते आए हैं कि संयुक्त क्रिया में क्रिया1 (संयुक्त क्रिया का प्रथम घटक) का ही कोशीय अर्थ होता है, द्वितीय क्रिया अर्थात  क्रिया2(संयुक्त क्रिया का द्वितीय घटक) में काल, वृत्त तथा पक्ष रूपी प्रत्यय जुड़ते हैं तथा क्रिया के प्रथम घटक के अर्थ को सीमित, विकसित या रंजित करते हैं।
 जैसे-
उसने सामान फेंक दिया
            मोहन आ गया
उसने सारा दूध पी लिया
   वह रो पड़ा
            वह भाग निकला  आदि
 यौगिक क्रियाएं भी दो क्रियाओं के योग से बनती हैं, परंतु यौगिक क्रिया के दोनों घटक अर्थात क्रिया1 तथा क्रिया2  का अपना स्वतंत्र कोशीय अर्थ होता है।
उदाहरण के लिए-
              अंततः वह कुएं में डूब मरा
              पतंग बहुत दूर जा गिरी
              वह सामान ले गया
              तुम मुझे पुस्तक दे जाना
              तुम बाजार से जूस पी आना
                             रोहित ने कर दिखाया
                             अपने कपड़े ले आना
 इसके अलावा संयुक्त क्रिया तथा यौगिक क्रिया में पर्याप्त अंतर है। सामान्यतया  यौगिक क्रिया में करका लोप होता है अर्थात करछुपा रहता है तथा करलगाने के बाद भी क्रिया का अर्थ वही रहता है जो बिना करके रहता है।
 जैसे-
ले उड़ना अर्थात ले कर उड़ना।
आ फसना अर्थात आ कर फसना।
लिख भेजना  अर्थात लिख कर भेजना।
आ बैठा अर्थात आ कर बैठा।
 जबकि संयुक्त क्रिया में यदि करलगा दिया जाए तो क्रिया पदबंध का अर्थ पूरी तरह से बदल जाता है। जैसे-
 आ जाना।                          आ कर जाना
 सो जाना                           सो कर जाना
 पी जाना                            पी कर जाना आदि
 उक्त वाक्यों का अर्थ के आधार पर  विश्लेषण करने पर पता चलता है कि पहले वाक्य  आ जाना।का अर्थ आनेके संबंध में है जबकि आ कर जानाका अर्थ पहले आने तथा फिर  चले जाने के अर्थ में । इसी तरह दूसरे वाक्य सो जानाको देखने पर पता चलता है कि सो जाना।  क्रिया का अर्थ सोनेके संबंध में है ना कि जानेके संबंध में जबकि सोकर जाना।का अर्थ है सोते हुए जाना अर्थात लेटे हुए जाना। इसी तरह तीसरे वाक्य में पी जाना।का मतलब है पी लेने के अर्थ में ना कि जानेके अर्थ में जबकि पी कर जाना।का अर्थ है पीने की क्रिया पूर्ण कर फिर जाना।
 उपरोक्त के अतिरिक्त कुछ ऐसी क्रियाएं हैं जिनकी विशेष रचनाएं यौगिक तथा संयुक्त क्रिया दोनों रूपों में आ सकती है जिसका अंतर उनके  संदर्भ से ही स्पष्ट हो सकता है।
 जैसे-
वह दूध पी गया


दूध पीकर चला गया के अर्थ में                                             उसने  दूध पिया के अर्थ में
( यौगिक क्रिया है )( संयुक्त क्रिया है )
 इसी तरह
वह खा गया


वह खाना खाकर चला गया के अर्थ में                                     उसने खाना खाया के अर्थ में
( यौगिक क्रिया है )( संयुक्त क्रिया है )

यौगिक क्रियाएं नकारात्मक परिवेश में प्रयुक्त हो सकती हैं।
 जैसे-
सोहन मोहन को नहीं ले डूबा बल्कि मोहन ही सोहन  को ले डूबा।
बार-बार कहने के बाद भी वह सामान नहीं ले गया
जबकि संयुक्त क्रियाओं में नकारात्मकता का आभाव है । यद्यपि संयुक्त क्रिया के दोनों घटकों के मध्य नकारात्मक परिवेश हो सकता है।
जैसे-
तुम ना आ जाना।  (अस्वाभाविक वाक्य है)
तुम आ मत जाना! (स्वाभाविक वाक्य है)
इस तरह से हम देख सकते हैं कि संयुक्त तथा यौगिक क्रियाओं में पर्याप्त अंतर है।
संदर्भ सूची:
§  सिंह, सूरजभान (2000). हिंदी का वाक्यात्मक व्याकरण. दिल्ली : साहित्य सहकार.
§  पाण्डेय, अनिल कुमार (2010). हिंदी संरचना के विविध पक्ष. नई दिल्ली:  प्रकाशन संस्थान.
§  सिंह, काशीनाथ,  हिंदी में संयुक्त क्रियाएँ, इलाहाबाद , रचना प्रकाशन,
  गिरीश चन्द्र पाण्डेय
       शोधार्थी 
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा


No comments:

Post a Comment