भाषा मानव जीवन का मूल आधार है। मानव अपने विचारों, भावनाओं, ज्ञान और संस्कृति का संप्रेषण भाषा के माध्यम से करता है। भाषा के वैज्ञानिक अध्ययन को भाषाविज्ञान कहा जाता है। भाषाविज्ञान का केंद्रीय उद्देश्य भाषा की आंतरिक संरचना- ‘ध्वनि, शब्द, वाक्य, प्रोक्ति और अर्थ’ का अध्ययन करना है। भाषा को केवल संरचनात्मक दृष्टि से पूर्णतः नहीं समझा जा सकता, क्योंकि यह मानव मस्तिष्क, समाज, संस्कृति, शिक्षा और प्रौद्योगिकी से गहराई से जुड़ी हुई है। इसी व्यापक दृष्टिकोण के परिणामस्वरूप भाषाविज्ञान के एक व्यापक पक्ष का विकास हुआ, जिसे अंतरानुशासनिक भाषाविज्ञान के नाम से जानते हैं। भाषाविज्ञान के माध्यम से किए जाने वाले समस्त अध्ययन का अनुप्रयोग जिन क्षेत्रों में किया जाता है, उन्हें सामूहिक रूप से ‘अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान’ कहा जाता है। ये दोनों क्षेत्र भाषाविज्ञान को अध्ययन और अनुप्रयोग की दृष्टि से पूर्णता प्रदान करने वाले दो अत्यंत महत्वपूर्ण और व्यावहारिक आयाम हैं।
अंतरानुशासनिक भाषाविज्ञान (Interdisciplinary Linguistics) वह अध्ययन-क्षेत्र है जिसमें भाषाविज्ञान का अन्य अनुशासनों, जैसे- मनोविज्ञान, समाजशास्त्र, मानवशास्त्र,
तंत्रिका-विज्ञान, दर्शन और
कंप्यूटर विज्ञान आदि के साथ समन्वय होता है। इसमें भाषा का अध्ययन केवल एक
स्वतंत्र प्रणाली के रूप में नहीं, बल्कि
मानव जीवन की समग्र प्रक्रिया के एक अंग के रूप में किया जाता है। इसकी मुख्य
शाखाएँ इस प्रकार हैं-
§ समाजभाषाविज्ञान (Sociolinguistics)
§ मनोभाषाविज्ञान (Psycholinguistics)
§ तंत्रिका-भाषाविज्ञान (Neurolinguistics)
§ गणनात्मक भाषाविज्ञान (Computational Linguistics)
§ नृभाषाविज्ञान (Anthropological
Linguistics) आदि।
अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान (Applied Linguistics) भाषाविज्ञान के सिद्धांतों और निष्कर्षों को वास्तविक जीवन के विविध क्षेत्रों
में प्रयोग करता है। इसका उद्देश्य भाषा-संबंधी व्यावहारिक समस्याओं का समाधान
करना है। डेविड क्रिस्टल के अनुसार, “अनुप्रयुक्त
भाषाविज्ञान भाषा से संबंधित वास्तविक समस्याओं के समाधान का क्षेत्र है।”
अतः कह सकते हैं कि अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान सिद्धांत और व्यवहार के बीच सेतु
का कार्य करता है। यह भाषाविज्ञान के सिद्धांतों और पद्धतियों के व्यवहारिक (practical) उपयोग का पक्ष है। इसके प्रमुख क्षेत्र निम्नलिखित हैं-
§ भाषा-शिक्षण और अधिगम (Language Teaching & Learning)
§ अनुवाद अध्ययन (Translation
Studies)
§ शब्दकोश-निर्माण (Lexicography)
§ भाषण चिकित्सा (Speech
Therapy)
§ भाषा-नीति और नियोजन (Language
Policy & Planning)
§ द्वितीय भाषा अर्जन (Second
Language Acquisition)
अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान का ध्यान “कैसे भाषा का
प्रयोग वास्तविक जीवन की समस्याओं को हल करने में किया जाए” पर रहता है। इस दोनों के बीच अंतर को निम्नलिखित प्रकार से संक्षेप में
प्रस्तुत कर सकते हैं-
|
पहलू |
अंतरानुशासनिक भाषाविज्ञान |
अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान |
|
भाषा का
अध्ययन अन्य विषयों के साथ मिलकर |
भाषावैज्ञानिक
सिद्धांतों का व्यावहारिक उपयोग |
|
|
केंद्रबिंदु |
शोध, सिद्धांत और ज्ञान का विस्तार |
व्यवहार, समाधान और अनुप्रयोग |
|
दृष्टिकोण |
अंतरविषयी (interdisciplinary) |
व्यावहारिक (practical) |
|
उदाहरण |
समाजभाषाविज्ञान, मनोभाषाविज्ञान |
भाषा-शिक्षण, अनुवाद, शब्दकोश-निर्माण, स्पीच थेरेपी |
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