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Thursday, February 12, 2026

गणितीय भाषाविज्ञान (Mathematical Linguistics)

 गणितीय भाषाविज्ञान (Mathematical Linguistics)

भाषाविज्ञान अपने आप को केवल मानविकी के विषयों से ही नहीं जोड़ता है, बल्कि गणित आदि विशुद्ध विज्ञान और तर्क के विषयों से भी जोड़ता है। जब हम भाषा को गणितीय दृष्टि से देखने का प्रयास करते हैं और भाषा के नियमों को गणित के नियमों की तरह समझने का प्रयास करते हैं तो गणितीय भाषाविज्ञानजैसा एक अंतरानुशासनिक क्षेत्र उभरकर सामने आता है। आधुनिक भाषाविज्ञान में भाषा का अध्ययन केवल वर्णनात्मक या संरचनात्मक स्तर तक सीमित नहीं रहा है। भाषा की जटिल संरचना, नियमबद्धता और औपचारिक प्रकृति ने विद्वानों को इसे गणितीय मॉडल के माध्यम से समझने के लिए प्रेरित किया। इसी प्रवृत्ति से गणितीय भाषाविज्ञान का विकास हुआ। गणितीय भाषाविज्ञान भाषा की संरचना, नियमों और प्रक्रियाओं को औपचारिक (formal) गणितीय ढाँचों में व्यक्त करने का प्रयास करता है। यह अंतरानुशासनिक क्षेत्र भाषाविज्ञान, गणित, तर्कशास्त्र, कंप्यूटर विज्ञान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बीच सेतु का कार्य करता है।

गणितीय भाषाविज्ञान : अर्थ और परिभाषा

गणितीय भाषाविज्ञान को हम निम्नलिखित प्रकार से परिभाषित कर सकते हैं-

“गणितीय भाषाविज्ञान वह अध्ययन-क्षेत्र है जिसमें प्राकृतिक भाषाओं की संरचना और कार्यप्रणाली का विश्लेषण गणितीय प्रतीकों, औपचारिक प्रणालियों और मॉडल्स के माध्यम से किया जाता है।”

इस ओर चिंतकों का ध्यान तब गया, जब चॉम्स्की ने कहा-

Language can be described as a finite set of rules capable of generating an infinite number of sentences.

(Chomsky, Syntactic Structures, 1957)

(भाषा को एक औपचारिक प्रणाली के रूप में देखा जा सकता है, जिसे नियमों के सीमित समूह द्वारा अनंत वाक्य उत्पन्न करने की क्षमता प्राप्त है।)

गणितीय भाषाविज्ञान के प्रमुख क्षेत्र (Major Areas of Mathematical Semantics)

(क)   रूपात्मक व्याकरण (Formal Grammars)

गणितीय भाषाविज्ञान में भाषा को रूपात्मक व्याकरणों के माध्यम से समझा जाता है। इसके अंतर्गत वे व्याकरण आते हैं, जिनमें भाषा के नियमों को गणित के नियमों की तरह प्रस्तुत किया जाता है।इनके मुख्यतः तीन प्रकार किए जाते हैं -

§   नियमित व्याकरण (Regular Grammar)

§   संदर्भ-मुक्त व्याकरण (Context-Free Grammar)

§   संदर्भ-संवेदी व्याकरण (Context-Sensitive Grammar)

ये व्याकरण भाषा की संरचना को गणितीय नियमों के रूप में प्रस्तुत करते हैं।

इसी प्रकार चॉम्स्की का श्रेणीक्रम (Chomsky Hierarchy) भी देखा जा सकता है। चॉम्स्की ने भाषाओं और व्याकरणों को चार श्रेणियों में विभाजित किया-

§   Type-0 (Unrestricted)

§   Type-1 (Context-Sensitive)

§   Type-2 (Context-Free)

§   Type-3 (Regular)

यह वर्गीकरण गणितीय भाषाविज्ञान का एक केंद्रीय सिद्धांत है।

(ख)  ऑटोमेटा सिद्धांत (Automata Theory)

ऑटोमेटा सिद्धांत भाषा-संसाधन के लिए गणितीय मशीनों का अध्ययन करता है, जैसे-

§   फाइनाइट ऑटोमेटा

§   पुशडाउन ऑटोमेटा

§   ट्यूरिंग मशीन

ये मशीनें भाषा-संसाधन की सैद्धांतिक नींव प्रदान करती हैं।

(ग)   गणितीय मॉडल और प्रायिकता

आधुनिक गणितीय भाषाविज्ञान में प्रायिकता और सांख्यिकी का व्यापक प्रयोग होता है, जैसे-

§   प्रायिक व्याकरण (Probabilistic Grammars)

§   मार्कोव मॉडल

§   भाषा मॉडल (Language Models) आदि।

ये मॉडल भाषा की अनिश्चितता और विविधता को समझने में सहायक होते हैं।

(घ)   गणितीय अर्थविज्ञान (Mathematical Semantics)

गणितीय भाषाविज्ञान में केवल भाषा की संरचनात्मक पक्ष को ही नहीं, बल्कि आर्थी पक्ष को भी गणितीय रूप से प्रस्तुत करने का प्रयास किया जाता है। इसे हम सामान्यतः गणितीय अर्थविज्ञान के नाम से जानते हैं। इसके अंतर्गत आने वाले प्रमुख सिद्धांत इस प्रकार हैं-

§   सत्यता-शर्तपरक अर्थविज्ञान (Truth-Conditional Semantics)

§   मॉडल-सैद्धांतिक अर्थविज्ञान (Model-Theoretic Semantics)

§   संयोजकता का सिद्धांत (Principle of Compositionality)

इस प्रकार स्पष्ट है कि गणितीय भाषाविज्ञान अंतरानुशासनिक भाषाविज्ञान का एक प्रमुख उपक्षेत्र है।

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