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Thursday, February 12, 2026

प्रजातिभाषाविज्ञान के प्रमुख अध्ययन-क्षेत्र (Major areas of Ethno-Linguistics)

 

नृभाषाविज्ञान और प्रजातिभाषाविज्ञान अध्ययन क्षेत्र की दृष्टि से बहुत हद तक एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। दोनों का अध्ययन क्षेत्र एक जैसा है किंतु दृष्टि और उद्देश्य में भिन्नता है। इसके कुछ प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं-

(क) भाषा और प्रजातीय पहचान

प्रजातिभाषाविज्ञान का केंद्रीय विषय भाषा और प्रजातीय पहचान का संबंध है। किसी समुदाय की भाषा उसके इतिहास, सामूहिक स्मृति और सामाजिक एकता को दर्शाती है। भाषा के लुप्त होने का अर्थ प्रजातीय पहचान का क्षरण भी हो सकता है।

(ख) शब्दावली और सांस्कृतिक अर्थ

प्रत्येक मानव जाति या समुदाय की भाषा में रिश्तेदारी शब्द, प्रकृति-संबंधी शब्द, धार्मिक और अनुष्ठानिक शब्द आदि विशेष सांस्कृतिक अर्थ लिए होते हैं। इन शब्दों का अध्ययन प्रजातीय संस्कृति की गहरी समझ प्रदान करता है।

(ग) मौखिक परंपराएँ और लोकसाहित्य

प्रजातिभाषाविज्ञान में लोककथाएँ, लोकगीत, मिथक, कहावतें और मौखिक इतिहास अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ये भाषिक रूप प्रजातीय ज्ञान और परंपरा के संवाहक होते हैं।

(घ) संकटापन्न और आदिवासी भाषाएँ

प्रजातिभाषाविज्ञान विशेष रूप से आदिवासी भाषाओं और संकटापन्न भाषाओंके अध्ययन और संरक्षण पर केंद्रित रहता है।

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