(क)
रूपात्मक व्याकरण (Formal Grammars)
गणितीय भाषाविज्ञान में भाषा को रूपात्मक व्याकरणों के माध्यम से समझा जाता है।
इसके अंतर्गत वे व्याकरण आते हैं, जिनमें भाषा के
नियमों को गणित के नियमों की तरह प्रस्तुत किया जाता है।इनके मुख्यतः तीन प्रकार
किए जाते हैं -
§ नियमित व्याकरण (Regular
Grammar)
§ संदर्भ-मुक्त व्याकरण (Context-Free Grammar)
§ संदर्भ-संवेदी व्याकरण (Context-Sensitive Grammar)
ये व्याकरण भाषा की संरचना को गणितीय नियमों के रूप में प्रस्तुत करते हैं।
इसी प्रकार चॉम्स्की का श्रेणीक्रम (Chomsky Hierarchy) भी देखा जा सकता है। चॉम्स्की ने भाषाओं और व्याकरणों को चार श्रेणियों में
विभाजित किया-
§ Type-0
(Unrestricted)
§ Type-1 (Context-Sensitive)
§ Type-2 (Context-Free)
§ Type-3 (Regular)
यह वर्गीकरण गणितीय भाषाविज्ञान का एक केंद्रीय सिद्धांत है।
(ख)
ऑटोमेटा सिद्धांत (Automata Theory)
ऑटोमेटा सिद्धांत भाषा-संसाधन के लिए गणितीय मशीनों का अध्ययन करता है, जैसे-
§ फाइनाइट ऑटोमेटा
§ पुशडाउन ऑटोमेटा
§ ट्यूरिंग मशीन
ये मशीनें भाषा-संसाधन की सैद्धांतिक नींव प्रदान करती हैं।
(ग)
गणितीय मॉडल और
प्रायिकता
आधुनिक गणितीय भाषाविज्ञान में प्रायिकता और सांख्यिकी का व्यापक प्रयोग होता
है, जैसे-
§ प्रायिक व्याकरण (Probabilistic
Grammars)
§ मार्कोव मॉडल
§ भाषा मॉडल (Language
Models) आदि।
ये मॉडल भाषा की अनिश्चितता और विविधता को समझने में सहायक होते हैं।
(घ) गणितीय अर्थविज्ञान (Mathematical Semantics)
गणितीय भाषाविज्ञान में केवल भाषा की संरचनात्मक पक्ष को ही नहीं, बल्कि आर्थी पक्ष को भी गणितीय रूप से प्रस्तुत करने का
प्रयास किया जाता है। इसे हम सामान्यतः गणितीय अर्थविज्ञान के नाम से जानते हैं।
इसके अंतर्गत आने वाले प्रमुख सिद्धांत इस प्रकार हैं-
§ सत्यता-शर्तपरक अर्थविज्ञान (Truth-Conditional
Semantics)
§ मॉडल-सैद्धांतिक अर्थविज्ञान (Model-Theoretic
Semantics)
§ संयोजकता का सिद्धांत (Principle of Compositionality)
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