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Wednesday, July 14, 2021

भाषा शिक्षण में परीक्षण के प्रकार

भाषा शिक्षण में परीक्षण  के प्रकार

प्रवेश परीक्षण (Entrance test)

अभिक्षमता परीक्षण   (Aptitude test)

वर्ग निर्धारण परीक्षण   (Placement test)

निदानात्मक परीक्षण   (Diagnostic test)

उपलब्धि परीक्षण   (Achievement test)

दक्षता परीक्षण   (Proficiency test)


इन्हें संक्षेप में इस प्रकार के देख सकते हैं -

प्रवेश परीक्षण (Entrance test)

जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है यह परीक्षण विद्यार्थी को पाठ्यक्रम में प्रवेश देने से पहले किया जाता है और इसका उद्देश्य विद्यार्थी के वर्तमान स्तर को समझना होता है ताकि उसी के अनुरूप शिक्षण प्रशिक्षण किया जा सके, अथवा यह भी जा ना जा सके कि विद्यार्थी प्रवेश देने के योग्य है या नहीं है ।

अभिक्षमता परीक्षण (Aptitude test)

यह परीक्षण विद्यार्थी के भाषा सीख सकने की क्षमता के सांख्यिकीय विश्लेषण से संबंधित है ।

वर्ग निर्धारण परीक्षण  (Placement test)

इस परीक्षण के माध्यम से शिक्षण प्रक्रिया में विद्यार्थी के स्तर और वर्ग का निर्धारण किया जाता है ताकि उसी के अनुरूप उसे शिक्षण दिया जा सके ।

निदानात्मक परीक्षण  (Diagnostic test)

इस परीक्षण का उद्देश्य यह जानना होता है कि विद्यार्थी को भाषा का कौन सा पक्ष सीखने में कठिनाई आ रही है इसके पश्चात उस कठिनाई के निदान संबंधी कदम उठाए जाते हैं ताकि विद्यार्थी सफलतापूर्वक भाषा सीखने की ओर अग्रसर हो सके ।

उपलब्धि परीक्षण  (Achievement test)

इस परीक्षण में हम यह देखते हैं कि विद्यार्थी भाषा को किस स्तर तक और किस रूप में सीख सका है। यह मूल्यांकन मूलतः इस बात पर आधारित है कि शिक्षण प्रक्रिया या पाठ्यचर्या में जो बातें सम्मिलित की गई हैं, उनमें से किन-किन पक्षों को विद्यार्थी ठीक से सीख पाया है और कौन-सी रह गई हैं।

दक्षता परीक्षण (Proficiency test)

दक्षता परीक्षण का संबंध इस बात से है कि जिस भाषा को विद्यार्थी सीख रहा है उसके कौन-कौन से कौशलों में विद्यार्थी कितनी दक्षता प्राप्त कर चुका है।


मूल्यांकन की पद्धति के आधार पर उसके प्रकार 

पद्धति के आधार पर मूल्यांकन के मूलतः दो प्रकार के जाते हैं -

एकलबद्ध मूल्यांकन (Discrete Point Evaluation)

समग्रताबद्ध मूल्यांकन (Integrative Evaluation)


एकलबद्ध मूल्यांकन (Discrete Point Evaluation)

भाषा की संरचना की दृष्टि से विभिन्न कौशलों का एक रूप में किया जाने वाला मूल्यांकन एकलबद्ध मूल्यांकन कहलाता है। इसके तीन प्रकार किए जा सकते हैं -

अभिव्यक्ति के स्तर पर- इस स्तर पर हम यह देखते हैं कि विद्यार्थी उच्चारण और लेखन में कितनी क्षमता प्राप्त कर चुका है। इसमें दो बातें आती हैं -

उच्चारण और लेखन 

व्याकरण के स्तर पर- इस स्तर पर हम यह देखते हैं कि विद्यार्थी लक्ष्य भाषा के शब्दों के स्वरूप और उनकी रूपरचना तथा वाक्य रचना के संबंध में कितनी क्षमता अर्जित कर चुका है। अतः इसमें दो बातें आती हैं -

रूप रचना और वाक्य विन्यास 

कथ्य के स्तर पर- इस स्तर पर विद्यार्थी के शाब्दिक और वाक्यात्मक अर्थ के बोधन की क्षमता का मूल्यांकन किया जाता है । अतः इसमें भी दो बातें आती हैं -

शब्दार्थ बोधन और वाक्यार्थ बोधन

एकलबद्ध मूल्यांकन भाषा के विभिन्न स्तरों के संदर्भ में छात्रों के कौशलों का परीक्षण करता है। इसमें केवल एक निश्चित पक्ष पर ही फोकस किया जाता है।


एकलबद्ध मूल्यांकन में प्रश्नों का स्वरूप 

एकलबद्ध मूल्यांकन में दो प्रकार से परीक्षण किया जा सकता है- मौखिक और लिखित। इन दोनों ही प्रकार के परीक्षणों में विविध प्रकार के प्रश्नों का समावेश किया जा सकता है, जिन्हें रवींद्रनाथ श्रीवास्तव ने भाषा शिक्षण (2005) पुस्तक में इस प्रकार से दर्शाया है - 

समग्रताबद्ध मूल्यांकन (Integrative Evaluation)

समग्रताबद्ध मूल्यांकन मूलतः भाषा को संप्रेषण की दृष्टि से देखता है और संप्रेषण के उपकरण के रूप में ही भाषा को एक इकाई मानता है। ऐसी स्थिति में उसका लक्ष्य भाषा के संप्रेषणात्मक प्रकार्य की क्षमता विद्यार्थी में उत्पन्न करना होता है न की भाषा के संरचनात्मक पक्षों का ज्ञान कराना । 

समग्रताबद्ध मूल्यांकन में प्रश्नों का स्वरूप

समग्रताबद्ध मूल्यांकन भिन्न प्रकार के प्रश्नों की आवश्यकता पड़ती है यह परीक्षण मुख्यतः दो रूपों में किया जाता है श्रुतलेख और क्लोज परीक्षण 

श्रुतलेख से हम परिचित हैं कि इसमें विद्यार्थी को सुनकर लिखने के कौशल का परीक्षण करते हैं। 

क्लोज परीक्षण में हम विद्यार्थी के भाषा सीखने की क्षमता का मूल्यांकन करते हैं। इसमें कई विधियाँ होती हैं, जैसे- खाली स्थान भरने की विधि जिसमें 'वाक्य में किसी विशेष स्थान पर किसी शब्द का लोप  कर दिया जाता है और विद्यार्थी को उसे भरना होता है'।




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