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Sunday, July 4, 2021

बंधिमविज्ञान (Tagmemics)

 

बंधिमविज्ञान (Tagmemics)

बंधिमविज्ञान (Tagmemics) का विकास के. एल. पाइक (Kenneth Lee Pike : 1912-2000) द्वारा किया गया है।

इस व्याकरण का प्रतिपादन उन्होंने ‘Language in Relation to Unified Theory of the Structure of Human Behaviour’ नामक रचना में किया।

यह रचना तीन खंडों में 1954, 1955 तथा 1960 ई. में प्रकाशित हुई।

बाद में उन्होंने 1967 ई. इसे संशोधित करते हुए एक ही खंड में भी प्रकाशित किया।

बंधिमविज्ञान में पाइक द्वारा विश्लेषण की मूल इकाई को ‘Tagmeme’ (बंधिम) नाम दिया गया।

‘Tagmeme’ मूलतः रूप (form) तथा अर्थ (meaning) का संयोग है। इसे पाइक ने संदर्भ-में-इकाई (unit-in-context) के रूप परिभाषित किया।

अपने व्याकरण की मूलभूत इकाई ‘Tagmeme’ को पाइक ने चार लक्षणों (features) या प्रकोष्ठों (cells) के माध्यम से व्याख्यायित किया-

(क)      खाँचा (slot)- वह स्थान जहाँ कोई इकाई आ सकती है।

(ख)     वर्ग (class)- इसमें यह देखते हैं कि वह इकाई किस प्रकार की है।

(ग)       भूमिका (role)- उस इकाई का प्रकार्य क्या है?

(घ)       संसक्ति (cohesion)- एक इकाई अन्य इकाइयों से किस प्रकार संबद्ध है।

पाइक ने कहा कि वाक्योपरि अर्थ या प्रोक्ति के बोधन की समस्या भाषा के समाज-सांस्कृतिक संदर्भ में है। पाइक ने भाषा पर मानव व्यवहार की संरचना के परिप्रेक्ष्य में विचार किया। उन्होंने मानव व्यवहार के तीन पक्षों की बात की-

(क)  व्यवहार का अन्य व्यवहारों से भेदक लक्षण (feature)

(ख)  उस व्यवहार का प्रकट होना (manifestation)

(ग)    व्यवहार के घटित होने का परिवेश या मानव जीवन में उसका वितरण (distribution)

पाइक के अनुसार मानव व्यवहार में ये तीनों चीजें पाई जाती हैं। चूँकि भाषा मानव व्यवहार से ही संबद्ध है इसलिए भाषा में इन तीनों चीजों का होना स्वाभाविक है। बंधिमविज्ञान में भाषा के संदर्भ में उन्होंने इन तीनों स्थितियों को इस प्रकार से प्रदर्शित किया-

बाह्य जगत à कोशीय चयन à व्याकरणिक व्यवस्था à स्वनप्रक्रियात्मक/लिपि चिह्नात्मक अभिव्यक्ति à बाह्य जगत

बंधिमविज्ञान में भाषा को एक संरचना के रूप में देखा जाता है और इसका विश्लेषण करते हुए संरचक इकाइयों के साथ-साथ उनके परस्पर संबंधों की बात की जाती है।

बंधिमविज्ञान में अधिक्रम व्यवस्था

बंधिमविज्ञान के अनुसार विन्यासक्रमिक (syntagmeme) में व्यवस्था एक विविध स्तरों की भाषिक इकाइयों के अधिक्रम (hierarchy) में होती है, जिसे निम्नलिखित प्रकार से देखा जा सकता है

संरचना का स्तर संरचित विन्यासक्रमिक        नाभिकीय

प्रोक्ति स्तर                    प्रोक्ति                        वाक्य

वाक्य स्तर                    वाक्य                        उपवाक्य

उपवाक्य स्तर                उपवाक्य                    पदबंध

पदबंध स्तर                  पदबंध                      पद

पद स्तर                       पद                           शब्द

शब्द स्तर                               शब्द              मूल (रूपिम)

 

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