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Monday, January 26, 2026

साथी हाथ बढ़ाना: साहिर लुधियानवी

साथी हाथ बढ़ाना, साथी हाथ बढ़ाना

एक अकेला थक जाएगा मिल कर बोझ उठाना

साथी हाथ बढ़ाना

हम मेहनतवालों ने, जब भी मिलकर कदम बढ़ाया

सागर ने रस्ता छोड़ा, पर्वत ने शीश झुकाया

फौलादी हैं सीने अपने, फौलादी हैं बाँहें

हम चाहें तो चट्टानों में, पैदा कर दें राहें

साथी हाथ बढ़ाना


मेहनत अपनी लेख की रेखा मेहनत से क्या डरना

कल ग़ैरों की ख़ातिर की अब अपनी ख़ातिर करना

अपना दुख भी एक है साथी अपना सुख भी एक

अपनी मंज़िल सच की मंज़िल अपना रस्ता नेक,

साथी हाथ बढ़ाना


एक से एक मिले तो कतरा बन जाता है दरिया

एक से एक मिले तो ज़र्रा बन जाता है सेहरा

एक से एक मिले तो राई बन सकता है पर्वत

एक से एक मिले तो इन्सान बस में कर ले क़िस्मत,

साथी हाथ बढ़ाना

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