चिकित्सा (क्लिनिकल) भाषाविज्ञान एक
‘अंतरानुशासनिक क्षेत्र’ है,
जो भाषा-विकारों की जटिल प्रकृति को समझने के लिए विभिन्न
अनुशासनों से अंतर्दृष्टियाँ ग्रहण करता है। भाषा केवल भाषिक संरचना का परिणाम
नहीं, बल्कि मस्तिष्क,
संज्ञान, व्यवहार और सामाजिक
अंतःक्रिया से गहराई से जुड़ी हुई प्रक्रिया है। अतः भाषा-विकारों का समुचित
अध्ययन तभी संभव है जब भाषाविज्ञान के साथ-साथ अन्य संबंधित अनुशासनों का सहयोग
लिया जाए।
1. चिकित्सा (क्लिनिकल) भाषाविज्ञान
और न्यूरोभाषाविज्ञान
‘न्यूरोभाषाविज्ञान’
भाषा और मस्तिष्क के संबंध का अध्ययन करता है। यह यह स्पष्ट करता है कि मस्तिष्क
के कौन-से क्षेत्र भाषा के विभिन्न कार्यों से जुड़े होते हैं। न्यूरोभाषाविज्ञान ‘अफेज़िया के प्रकारों की पहचान, मस्तिष्क-क्षति और
भाषिक हानि के संबंध की व्याख्या और न्यूरोइमेजिंग (fMRI, PET) के निष्कर्षों का भाषिक विश्लेषण’ आदि में
भाषा-विकारों के तंत्रिकीय आधार को स्पष्ट करता है, जबकि चिकित्सा (क्लिनिकल) भाषाविज्ञान उनके भाषिक प्रतिरूपों का विश्लेषण करता
है।
2. चिकित्सा (क्लिनिकल) भाषाविज्ञान और
मनोभाषाविज्ञान
मनोभाषाविज्ञान भाषा-अधिगम, प्रसंस्करण और उत्पादन की मानसिक प्रक्रियाओं का अध्ययन करता है। इस अनुशासन
से चिकित्सा (क्लिनिकल) भाषाविज्ञान को यह समझने में सहायता मिलती है कि मस्तिष्क में
ध्यान (attention), स्मृति (memory) और सूचना-संसाधन (information processing) आदि भाषा-विकार
की समस्याओं से कैसे जुड़े होते हैं। उदाहरण के लिए Specific Language
Impairment (SLI) और डिस्लेक्सिया के अध्ययन में मनोभाषावैज्ञानिक मॉडल
अत्यंत उपयोगी सिद्ध हुए हैं।
3. चिकित्सा (क्लिनिकल) भाषाविज्ञान और वाक्-दोष चिकित्सा
वाक्-दोष चिकित्सा चिकित्सा (क्लिनिकल) भाषाविज्ञान का सबसे निकटवर्ती अनुशासन है। चिकित्सा
(क्लिनिकल) भाषाविज्ञान उपचार के लिए भाषिक आधार प्रदान करता है, और वाक्-दोष चिकित्सा उस आधार को चिकित्सीय अभ्यास में रूपांतरित करता है।
4. चिकित्सा (क्लिनिकल) भाषाविज्ञान और
संज्ञानात्मक विज्ञान
संज्ञानात्मक विज्ञान मानव मस्तिष्क
की कार्यप्रणालियों का बहुआयामी अध्ययन करता है। इस क्षेत्र से चिकित्सा
(क्लिनिकल) भाषाविज्ञान को ‘संकल्पना निर्माण,
श्रेणीकरण और अर्थ-निर्माण’ जैसी प्रक्रियाओं
को समझने में सहायता मिलती है।
5. शिक्षा और सामाजिक विज्ञानों से संबंध
भाषा-विकारों का प्रभाव शिक्षा और
समाज पर प्रत्यक्ष रूप से पड़ता है। अतः शिक्षा, समाजशास्त्र और मनोविज्ञान आदि भी चिकित्सा
(क्लिनिकल) भाषाविज्ञान के महत्वपूर्ण सहायक अनुशासन हैं।
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