फॉरेंसिक भाषाविज्ञान का एक
महत्वपूर्ण उद्देश्य मानवाधिकारों की रक्षा भी है। यह ‘अभियुक्तों के भाषिक अधिकार, समझ में आने
वाली कानूनी भाषा और निष्पक्ष सुनवाई’ को सुनिश्चित करने में
सहायक होता है। विशेष रूप से अल्पशिक्षित, भाषाई अल्पसंख्यक और बच्चों के मामलों में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो
जाती है।
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