(क) कानून की भाषा (Language of the
Law)
कानून की भाषा प्रायः जटिल, तकनीकी और सामान्य नागरिकों के लिए कठिन होती है। फॉरेंसिक भाषाविज्ञान- कानूनी दस्तावेज़ों, अधिनियमों और अनुबंधों
आदि की भाषा का विश्लेषण करता है और यह दर्शाता है कि अस्पष्ट या जटिल भाषा किस
प्रकार गलत व्याख्या और न्यायिक भ्रम उत्पन्न कर सकती है।
(ख) न्यायिक प्रक्रिया में भाषा
न्यायालय में प्रयुक्त भाषा, जैसे- न्यायाधीशों के प्रश्न, वकीलों की
जिरह और गवाहों के बयान आदि न्याय के परिणाम को प्रभावित करते हैं। फॉरेंसिक
भाषाविज्ञान यह अध्ययन करता है कि प्रश्नों की संरचना, शब्द-चयन और वाक्य-विन्यास किस प्रकार गवाहों की प्रतिक्रियाओं को प्रभावित
करते हैं।
(ग) पुलिस पूछताछ और स्वीकारोक्ति
पुलिस पूछताछ में भाषा का प्रयोग
अत्यंत संवेदनशील होता है। कई बार कुछ चीजें, जैसे- दबावपूर्ण
प्रश्न, सुझावात्मक भाषा और अस्पष्ट कथन आदि झूठी
स्वीकारोक्ति (False
Confession) का कारण बन सकते हैं। फॉरेंसिक भाषाविज्ञान ऐसी भाषिक
रणनीतियों की पहचान कर न्यायिक त्रुटियों को रोकने में सहायता करता है।
(घ) लेखक-पहचान (Authorship
Identification)
‘लेखक-पहचान’ फॉरेंसिक
भाषाविज्ञान का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। इसमें ‘आत्महत्या पत्र,
धमकी-पत्र, फिरौती-नोट, ई-मेल
और
सोशल मीडिया संदेश’ आदि की
भाषा का विश्लेषण कर यह निर्धारित करने का प्रयास किया जाता है कि किसी पाठ का
संभावित लेखक कौन है। इसमें शब्दावली, शैली, वाक्य-रचना और भाषिक आदतों का अध्ययन किया जाता है।
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