पाठ का गठन से आशय उस प्रक्रिया और संरचना से है
जिसके द्वारा भाषा की अलग-अलग इकाइयाँ (ध्वनि, शब्द, वाक्य आदि) मिलकर एक सार्थक, संगठित और
उद्देश्यपूर्ण पाठ का निर्माण करती हैं। सरल शब्दों में, पाठ का गठन यह
बताता है कि कोई पाठ कैसे बनाया जाता है और उसे पाठ का रूप देने वाले कौन-कौन से
तत्व होते हैं।
किसी पाठ में अर्थ की स्पष्टता, प्रभावी संप्रेषण, पाठ को व्यवस्थित बनाने के लिए और लेखन कौशल के लिए उसके गठन का ध्यान रखना
अत्यंत आवश्यक होता है।
पाठ के गठन के मुख्य तत्त्व
1. विषय (Theme)
यह पाठ का मुख्य विचार होता है। पूरा पाठ इसी पर
आधारित होता है।
2. संरचना (Structure)
इसमें पाठ की रूपरेखा आती है, जैसे- सामान्यतः ‘प्रस्तावना → विस्तार → निष्कर्ष’ के क्रम में पाठ निर्मित होते हैं।
3. संयोजन/संसक्ति (Cohesion)
इसमें मुख्य रूप से वाक्यों को जोड़ने वाले साधन आते हैं, जैसे: और, लेकिन, वह, यह, इसलिए आदि।
4. सुसंगति (Coherence)
इसमें पाठ के अंतर्गत विचारों की तार्किक संगति देखी जाती
है। इससे पाठ की बोधगम्यता निर्धारित होती है।
5. संदर्भ (Context)
इसमें पाठ की सामाजिक और परिस्थितिजन्य पृष्ठभूमि आदि
को देखा जाता है। संदर्भ पाठ के अर्थ को स्पष्ट करने में सहायक होता है।
6. उद्देश्य (Intentionality)
इसमें हम देखते हैं कि लेखक की मंशा क्या है? जैसे- सूचना देना, समझाना, प्रभावित करना आदि। उद्देश्य के अनुसार ही भाषा का चयन किया जाता है, जैसे- लेखक सरल भाषा या औपचारिक भाषा में से किसका चयन करेगा, यह पाठ के प्रकार पर निर्भर करता है।
No comments:
Post a Comment