भाषा केवल संप्रेषण का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक,
कानूनी और संस्थागत प्रक्रियाओं का एक अनिवार्य घटक है।
न्यायिक व्यवस्था में भाषा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है- चाहे वह कानून की
भाषा हो,
गवाहों के बयान हों, पुलिस पूछताछ हो
या न्यायालय के निर्णय। कई बार भाषिक डेटा साक्ष्य का भी कार्य करता है तथा न्याय प्रक्रिया
में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसका एक विषय के रूप में विकसित पक्ष फॉरेंसिक
भाषाविज्ञान है। इसे निम्नलिखित प्रकार से परिभाषित कर सकते हैं-
“‘फॉरेंसिक भाषाविज्ञान’ भाषाविज्ञान की वह अनुप्रयुक्त शाखा है जो कानून, अपराध और न्यायिक प्रक्रियाओं में भाषा के प्रयोग का वैज्ञानिक अध्ययन करती
है।”
सरल शब्दों में कहा जाए तो फॉरेंसिक
भाषाविज्ञान भाषा और कानून के अंतर्संबंधों का विश्लेषण करता है और यह स्पष्ट करता
है कि भाषा किस प्रकार न्याय को प्रभावित कर सकती है।
इसकी एक परिभाषा देख सकते हैं-
>
*“Forensic linguistics is the application of linguistic knowledge, methods and
insights to the forensic context of law, crime and justice.”*
>
— Roger Shuy
अतः फॉरेंसिक भाषाविज्ञान वह
अनुशासन है जिसमें भाषावैज्ञानिक सिद्धांतों और विधियों का प्रयोग कानूनी समस्याओं
के समाधान के लिए किया जाता है। इसका स्वरूप मुख्यतः अंतरानुशासनिक है, क्योंकि इसे ‘भाषाविज्ञान, विधि (Law), अपराध विज्ञान (Criminology) और
मनोविज्ञान’ आदि विविध विषयों की आवश्यकता पड़ती है।
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