चिकित्सा (क्लिनिकल) भाषाविज्ञान
में भाषा-विकारों का वर्गीकरण अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि इससे निदान,
उपचार और अनुसंधान में स्पष्टता आती है। भाषा-विकारों को
विभिन्न आधारों पर वर्गीकृत किया जाता है। इस दृष्टि से दो मुख्य वर्ग देखे जा सकते
हैं- विकासात्मक और अर्जित भाषा-विकार। इन्हें संक्षेप में देखते हैं-
(क) विकासात्मक भाषा-विकार
ये विकार बाल्यावस्था में प्रकट
होते हैं,
जैसे - Specific Language Impairment (SLI), विकासात्मक डिस्लेक्सिया, ऑटिज़्म
स्पेक्ट्रम विकार आदि। इनमें भाषा-अधिगम की प्रक्रिया स्वाभाविक रूप से बाधित होती
है।
(ख) अर्जित भाषा-विकार
ये विकार मस्तिष्क-क्षति, स्ट्रोक या दुर्घटना के पश्चात उत्पन्न होते हैं, जैसे- अफेज़िया, डिसआर्थ्रिया, एप्रैक्सिया
ऑफ़ स्पीच आदि।
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