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Thursday, January 22, 2026

संसक्ति (Cohesion)

 

संसक्ति (Cohesion) से आशय उन भाषिक साधनों से है जिनके द्वारा वाक्य और उपवाक्य आपस में जुड़कर एक संबद्ध और अर्थपूर्ण पाठ का निर्माण करते हैं। इनमें संदर्भ (जैसे—वह, यह), प्रतिस्थापन, लोप (ellipsis), संयोजक (और, लेकिन, इसलिए) तथा शब्दों की पुनरावृत्ति आदि आते हैं। प्रोक्ति विश्लेषण और शैलीविज्ञान दृष्टि से देखा जाए तो पाठ में संसक्ति केवल पाठ का औपचारिक गुण नहीं है, बल्कि वह माध्यम है जिसके द्वारा वक्ता या लेखक श्रोता और पाठक को पाठ के भीतर अर्थ-संबंध समझने में मार्गदर्शन करता है। व्यापक रूप से संसक्ति वह शक्ति है जो पाठ को एक इकाई के रूप में बाँधकर रखती है। इसी के कारण सभी वाक्य आपस में जुड़कर एक पाठ का निर्माण करते हैं। यदि संसक्ति से भिन्न किसी वाक्य का पाठ में प्रवेश हो जाए तो पाठक सहज ही बता देगा कि यहाँ भिन्न वाक्य का समावेश हो गया है।

संसक्ति किसी पाठ में संदर्भ और साझा ज्ञान के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़ा पक्ष है। संयोजक संकेत पाठ के विभिन्न भागों के बीच संबंध स्पष्ट करते हैं, किंतु उनका सही अर्थ परिस्थितिजन्य और सांस्कृतिक संदर्भ पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए सर्वनाम “वह” का अर्थ तभी स्पष्ट होता है जब वक्ता और श्रोता के बीच यह साझा ज्ञान हो कि किस व्यक्ति की बात हो रही है। संसक्ति पारस्परिक समझ और सामान्य पृष्ठभूमि ज्ञान पर आधारित होता है।

 संसक्ति पाठ की संप्रेषणात्मक प्रभावशीलता को बढ़ाता है और अभिप्रेत अर्थ को समझने में सहायक होता है। संसक्ति पाठ को जोड़ने वाले साधनों के माध्यम से स्पष्टता, बल, शिष्टता या जैसे तत्त्वों को प्रदर्शित करता है।

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