चिकित्सा (क्लिनिकल) भाषाविज्ञान
में भाषा-मूल्यांकन और निदान अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। सटीक निदान के बिना न तो
प्रभावी उपचार संभव है और न ही भाषा-विकारों का वैज्ञानिक अध्ययन।
भाषा-मूल्यांकन के प्रमुख उद्देश्य इस
प्रकार हैं-
1.
भाषा-विकार की पहचान
2.
प्रभावित भाषिक स्तरों का निर्धारण
3.
विकार की गंभीरता का आकलन
4.
उपचार-योजना के लिए आधार प्रदान करना
इसके लिए मुख्य रूप से निम्नलिखित मूल्यांकन
विधियों का प्रयोग होता है-
1. मानकीकृत परीक्षण (Standardized Tests)
ये परीक्षण पूर्व-निर्धारित
मापदंडों पर आधारित होते हैं और तुलनात्मक विश्लेषण में सहायक होते हैं।
2. अनौपचारिक मूल्यांकन : इसमें ‘स्वाभाविक संवाद, कथा-वाचन
और चित्र-वर्णन, जैसी विधियाँ सम्मिलित की जाती हैं।
3. केस-इतिहास (Case History) : केस-इतिहास में निम्नलिखित जानकारियाँ सम्मिलित होती हैं—
§ चिकित्सीय पृष्ठभूमि
§ विकासात्मक इतिहास
§ भाषिक और सामाजिक परिवेश
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