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Wednesday, January 7, 2026

भाषा-मूल्यांकन एवं निदान (Language Assessment and Diagnosis)

 

चिकित्सा (क्लिनिकल) भाषाविज्ञान में भाषा-मूल्यांकन और निदान अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। सटीक निदान के बिना न तो प्रभावी उपचार संभव है और न ही भाषा-विकारों का वैज्ञानिक अध्ययन।

भाषा-मूल्यांकन के प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार हैं-

1. भाषा-विकार की पहचान

2. प्रभावित भाषिक स्तरों का निर्धारण

3. विकार की गंभीरता का आकलन

4. उपचार-योजना के लिए आधार प्रदान करना

इसके लिए मुख्य रूप से निम्नलिखित मूल्यांकन विधियों का प्रयोग होता है-

1. मानकीकृत परीक्षण (Standardized Tests)

ये परीक्षण पूर्व-निर्धारित मापदंडों पर आधारित होते हैं और तुलनात्मक विश्लेषण में सहायक होते हैं।

2. अनौपचारिक मूल्यांकन : इसमें स्वाभाविक संवाद, कथा-वाचन और चित्र-वर्णन, जैसी विधियाँ सम्मिलित की जाती हैं।

3. केस-इतिहास (Case History) : केस-इतिहास में निम्नलिखित जानकारियाँ सम्मिलित होती हैं

§  चिकित्सीय पृष्ठभूमि

§  विकासात्मक इतिहास

§  भाषिक और सामाजिक परिवेश

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