Wernicke's Area (वरनिके क्षेत्र): कार्ल वर्निके (1874) ने बाएँ टेम्पोरल लोब के एक क्षेत्र की पहचान की, जो भाषा-बोध से संबंधित है। इसकी क्षति से भाषा प्रवाही तो
रहती है, किंतु अर्थहीन हो जाती है। इस क्षेत्र को उनके नाम पर
‘वरनिके क्षेत्र’ (Wernicke’s Area) कहा
जाता है। यह मुख्य रूप से भाषा को समझने (comprehension) के
लिए जिम्मेदार है, जिसमें बोली जाने वाली और लिखित भाषा
दोनों शामिल हैं। यह मस्तिष्क के टेम्पोरल लोब (temporal lobe) के पीछे के हिस्से में स्थित होता है। इस क्षेत्र को नुकसान होने से
व्यक्ति धाराप्रवाह बोल तो सकता है, लेकिन उसकी बातों में
अर्थ या समझ की कमी होती है, और उसे दूसरों की बातें समझने
में भी परेशानी होती है (जिसे वरनिके अफेज़िया या रिसेप्टिव अफेज़िया कहा जाता
है)।
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